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अपहरण के छह दोषियों को उम्रकैद
भिवानी/ब्यूरो
Updated Tue, 26 Nov 2013 08:31 PM IST
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युवक का अपहरण कर परिजनों से 10 लाख रुपये की फिरौती मांगने के मामले में डॉ. अब्दुल माजिद की अदालत ने छह युवकों को दोषी मानते उनको आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
दोषियों पर अदालत ने 10-10 हजार रुपये जुर्माना भी किया है। जुर्माना नहीं देने की सूरत में सजा एक-एक साल और बढ़ा दी जाएगी।
अदालत में पेश पुलिस के चालान के अनुसार चरखी दादरी निवासी सेवानिवृत्त जिला वन अधिकारी परमानंद ने चार दिसंबर 2012 को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में परमानंद ने बताया था कि तीन दिसंबर को सुबह उसके बेटे सुमित का अपहरण हो गया है।
उसके बेटे के मोबाइल पर फोन आया था कि उससे एक प्लॉट के बारे में बातचीत करनी है। सुमित जब दादरी सब माइनर पर पहुंचा तो वहां पहले से खड़े तीन युवकों ने उसके मुंह पर कपड़ा डाल दिया और पिस्टल के बल पर उसे जबरन गाड़ी में डाल कर ले गए। उसी दिन 11.45 मिनट पर सुमित का उसके पास फोन आया और उसने कहा कि वह सड़क हादसे में घायल हो गया और चरखी दादरी के अस्पताल में भर्ती है।
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परमानंद ने बताया कि उस समय वह हिसार जाने के लिए चरखी दादरी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहा था। सुमित की बात सुनकर वह बाइक से चरखी दादरी अस्पताल पहुंचा लेकिन वहां सुमित नहीं मिला। उसने कई जगह सुमित की तलाश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इसी दौरान 1.30 मिनट पर सुमित का फोन आया कि वह घर आ रहा है।
परमानंद अपने पड़ोसी के साथ जब घर पहुंचा तो वहां कोई नहीं मिला। थोड़ी देर बाद फिर सुमित का फोन आया और उसने बताया कि दो युवक अपने दरवाजे पर आएंगे। परमानंद ने बताया कि दो युवक उनके दरवाजे पर पहुंचे। युवकों ने बताया कि सुमित उनके कब्जे में है। सुमित चाहिए तो 10 लाख रुपये देने होंगे। इस बारे में पुलिस को शिकायत की तो सुमित को जान से मार देंगे।
परमानंद ने बताया कि युवकों की बात मानते हुए उसने बैंक से 10 लाख रुपये निकलवा कर युवकों को दे दिए। बाद में आरोपी युवक सुमित को चरखी दादरी के बाहरी क्षेत्र में छोड़ कर भाग गए। परमानंद ने इसकी शिकायत अगले दिन चार दिसंबर को पुलिस को दी।
पुलिस ने मामले की जांच की तो पाया कि संदीप, सुरेंद्र, अमित, टीनू, पवन और राजेश ने मिलकर सुमित के अपहरण की योजना बनाई। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमों का गठन कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके पास से फिरौती की राशि भी बरामद कर ली।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 365, 382 और 364 के तहत मामला दर्ज किया। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश डॉ. अब्दुल माजिद की अदालत ने दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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दोषियों पर अदालत ने 10-10 हजार रुपये जुर्माना भी किया है। जुर्माना नहीं देने की सूरत में सजा एक-एक साल और बढ़ा दी जाएगी।
अदालत में पेश पुलिस के चालान के अनुसार चरखी दादरी निवासी सेवानिवृत्त जिला वन अधिकारी परमानंद ने चार दिसंबर 2012 को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में परमानंद ने बताया था कि तीन दिसंबर को सुबह उसके बेटे सुमित का अपहरण हो गया है।
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उसके बेटे के मोबाइल पर फोन आया था कि उससे एक प्लॉट के बारे में बातचीत करनी है। सुमित जब दादरी सब माइनर पर पहुंचा तो वहां पहले से खड़े तीन युवकों ने उसके मुंह पर कपड़ा डाल दिया और पिस्टल के बल पर उसे जबरन गाड़ी में डाल कर ले गए। उसी दिन 11.45 मिनट पर सुमित का उसके पास फोन आया और उसने कहा कि वह सड़क हादसे में घायल हो गया और चरखी दादरी के अस्पताल में भर्ती है।
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परमानंद ने बताया कि उस समय वह हिसार जाने के लिए चरखी दादरी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहा था। सुमित की बात सुनकर वह बाइक से चरखी दादरी अस्पताल पहुंचा लेकिन वहां सुमित नहीं मिला। उसने कई जगह सुमित की तलाश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इसी दौरान 1.30 मिनट पर सुमित का फोन आया कि वह घर आ रहा है।
परमानंद अपने पड़ोसी के साथ जब घर पहुंचा तो वहां कोई नहीं मिला। थोड़ी देर बाद फिर सुमित का फोन आया और उसने बताया कि दो युवक अपने दरवाजे पर आएंगे। परमानंद ने बताया कि दो युवक उनके दरवाजे पर पहुंचे। युवकों ने बताया कि सुमित उनके कब्जे में है। सुमित चाहिए तो 10 लाख रुपये देने होंगे। इस बारे में पुलिस को शिकायत की तो सुमित को जान से मार देंगे।
परमानंद ने बताया कि युवकों की बात मानते हुए उसने बैंक से 10 लाख रुपये निकलवा कर युवकों को दे दिए। बाद में आरोपी युवक सुमित को चरखी दादरी के बाहरी क्षेत्र में छोड़ कर भाग गए। परमानंद ने इसकी शिकायत अगले दिन चार दिसंबर को पुलिस को दी।
पुलिस ने मामले की जांच की तो पाया कि संदीप, सुरेंद्र, अमित, टीनू, पवन और राजेश ने मिलकर सुमित के अपहरण की योजना बनाई। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमों का गठन कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके पास से फिरौती की राशि भी बरामद कर ली।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 365, 382 और 364 के तहत मामला दर्ज किया। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश डॉ. अब्दुल माजिद की अदालत ने दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।