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Sirsa News: उधम फाउंडेशन ने सात वर्षों में समाज सेवा की मिसाल कायम की
Sun, 08 Feb 2026 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 08 Feb 2026 11:41 PM IST
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उधम फाउंडेशन के सदस्य झुग्गी झोपड़ी में बच्चों को पढ़ाने के दौरान। फाउंडेशन
- रक्तदान शिविर, पौधरोपण, बेटियों की शादियां और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा से बनाई मजबूत पहचान
फोटो-2
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। समाज सेवा के क्षेत्र में उधम फाउंडेशन आज एक भरोसेमंद नाम बन चुका है। बीते सात वर्षों से यह संगठन लगातार जरूरतमंदों की मदद करता आ रहा है। रक्तदान शिविरों से लेकर पौधरोपण, गरीब परिवारों की बेटियों की शादियों और बच्चों की शिक्षा तक, फाउंडेशन ने हर स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई है। इसकी शुरुआत एक साधारण सोच से हुई थी, जो आज सैकड़ों लोगों के जीवन में उम्मीद की रोशनी बन चुकी है।
उधम फाउंडेशन की नींव पारिवारिक संस्कारों से पड़ी। संस्था के संस्थापक गगन कंबोज बताते हैं कि उनके पिता लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे हैं। उन्हें देखकर ही समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा मिली। बचपन से ही यह देखा कि किसी की मदद करने से जो संतोष मिलता है, वह किसी और चीज में नहीं। यही भावना आगे चलकर उधम फाउंडेशन के गठन की वजह बनी।
शुरुआती दिनों में संस्थापक गगन कंबोज मुलाना स्थित एमएमडीयू में पढ़ाई कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने पहली बार रक्तदान किया। वहां यह अनुभव भी हुआ कि कई जगह रक्तदाता रक्तदान करने के 1 हजार रुपये लेते थे। यह बात मन को खटक गई। उन्होंने अपने दोस्तों के साथ बैठकर इस विषय पर चर्चा की और तय किया कि जरूरतमंद मरीजों के लिए बिना किसी शुल्क के रक्तदान किया जाएगा।
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जुड़वां बच्चों का इलाज करवाना लाया बड़ा मोड़
धीरे-धीरे दोस्तों का समूह तैयार हुआ। सभी ने मिलकर रक्तदान करना शुरू किया और फिर छोटे स्तर पर शिविर लगाने लगे। यह काम आसान नहीं था, लेकिन जज्बा मजबूत था। पहला बड़ा मामला जुड़वां बच्चों का सामने आया, जिनका वजन मात्र 700 और 800 ग्राम था। परिवार के पास इलाज के पैसे नहीं थे। हालात बेहद गंभीर थे। ऐसे समय में उधम फाउंडेशन ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली। दोस्तों ने मिलकर धन इकट्ठा किया और बच्चों का इलाज संभव कराया। यह घटना संस्था के सफर में एक बड़ा मोड़ साबित हुई। उसके बाद काम रुकने का नाम नहीं लिया। एक के बाद एक जरूरतमंद मरीजों और परिवारों की मदद की जाने लगी। फाउंडेशन खास तौर पर बच्चों पर ज्यादा ध्यान देता है, क्योंकि उनका मानना है कि बच्चे ही भविष्य हैं। बीमार बच्चों के इलाज से लेकर उनकी पढ़ाई तक, हर संभव सहयोग दिया जाता है।
झुग्गी-झोपड़ी में बच्चों को देते हैं शिक्षा
शिक्षा के क्षेत्र में भी उधम फाउंडेशन ने सराहनीय पहल की है। झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए शिक्षकों की व्यवस्था की गई। स्वयंसेवक वहां जाकर बच्चों को पढ़ाते हैं, ताकि गरीबी उनकी पढ़ाई में बाधा न बने। कई बच्चों ने पहली बार किताब और कॉपी का मतलब यहीं समझा। शिक्षा के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास भी जगाया गया।
अब तक 35 से ज्यादा रक्तदान शिविर लगाए
संस्था ने अब तक 35 रक्तदान शिविर आयोजित किए हैं। इन शिविरों में सैकड़ों यूनिट रक्त एकत्र हुआ, जिससे अनगिनत मरीजों की जान बचाई जा सकी। इसके अलावा, 15 गरीब परिवारों की बेटियों की शादियां भी करवाई गईं। इन आयोजनों में समाज के युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पौधरोपण अभियानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
60 विद्यार्थियों ने अलग-अलग बनाई संस्था
मुलाना क्षेत्र से करीब 60 युवा इस सामाजिक यात्रा का हिस्सा बने। पढ़ाई पूरी होने के बाद सभी अलग-अलग क्षेत्रों में चले गए, लेकिन समाज सेवा से नाता नहीं टूटा। आज ये युवा अलग-अलग जगह काम कर रहे हैं। जब भी किसी को मदद की जरूरत होती है, एक फोन कॉल पर सभी सक्रिय हो जाते हैं। यही नेटवर्क उधम फाउंडेशन की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।
वर्जन
सात वर्षों के सफर में उधम फाउंडेशन ने यह साबित किया है कि अगर नीयत साफ हो और साथ देने वाले लोग हों, तो बड़े बदलाव संभव हैं। संस्था का उद्देश्य आगे भी समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक मदद पहुंचाना है। आने वाले समय में शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण के क्षेत्र में और व्यापक स्तर पर काम करने की योजना है।
- गगन कंबोज, संस्थापक, उधम फाउंडेशन सिरसा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। समाज सेवा के क्षेत्र में उधम फाउंडेशन आज एक भरोसेमंद नाम बन चुका है। बीते सात वर्षों से यह संगठन लगातार जरूरतमंदों की मदद करता आ रहा है। रक्तदान शिविरों से लेकर पौधरोपण, गरीब परिवारों की बेटियों की शादियों और बच्चों की शिक्षा तक, फाउंडेशन ने हर स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई है। इसकी शुरुआत एक साधारण सोच से हुई थी, जो आज सैकड़ों लोगों के जीवन में उम्मीद की रोशनी बन चुकी है।
उधम फाउंडेशन की नींव पारिवारिक संस्कारों से पड़ी। संस्था के संस्थापक गगन कंबोज बताते हैं कि उनके पिता लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे हैं। उन्हें देखकर ही समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा मिली। बचपन से ही यह देखा कि किसी की मदद करने से जो संतोष मिलता है, वह किसी और चीज में नहीं। यही भावना आगे चलकर उधम फाउंडेशन के गठन की वजह बनी।
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शुरुआती दिनों में संस्थापक गगन कंबोज मुलाना स्थित एमएमडीयू में पढ़ाई कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने पहली बार रक्तदान किया। वहां यह अनुभव भी हुआ कि कई जगह रक्तदाता रक्तदान करने के 1 हजार रुपये लेते थे। यह बात मन को खटक गई। उन्होंने अपने दोस्तों के साथ बैठकर इस विषय पर चर्चा की और तय किया कि जरूरतमंद मरीजों के लिए बिना किसी शुल्क के रक्तदान किया जाएगा।
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जुड़वां बच्चों का इलाज करवाना लाया बड़ा मोड़
धीरे-धीरे दोस्तों का समूह तैयार हुआ। सभी ने मिलकर रक्तदान करना शुरू किया और फिर छोटे स्तर पर शिविर लगाने लगे। यह काम आसान नहीं था, लेकिन जज्बा मजबूत था। पहला बड़ा मामला जुड़वां बच्चों का सामने आया, जिनका वजन मात्र 700 और 800 ग्राम था। परिवार के पास इलाज के पैसे नहीं थे। हालात बेहद गंभीर थे। ऐसे समय में उधम फाउंडेशन ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली। दोस्तों ने मिलकर धन इकट्ठा किया और बच्चों का इलाज संभव कराया। यह घटना संस्था के सफर में एक बड़ा मोड़ साबित हुई। उसके बाद काम रुकने का नाम नहीं लिया। एक के बाद एक जरूरतमंद मरीजों और परिवारों की मदद की जाने लगी। फाउंडेशन खास तौर पर बच्चों पर ज्यादा ध्यान देता है, क्योंकि उनका मानना है कि बच्चे ही भविष्य हैं। बीमार बच्चों के इलाज से लेकर उनकी पढ़ाई तक, हर संभव सहयोग दिया जाता है।
झुग्गी-झोपड़ी में बच्चों को देते हैं शिक्षा
शिक्षा के क्षेत्र में भी उधम फाउंडेशन ने सराहनीय पहल की है। झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए शिक्षकों की व्यवस्था की गई। स्वयंसेवक वहां जाकर बच्चों को पढ़ाते हैं, ताकि गरीबी उनकी पढ़ाई में बाधा न बने। कई बच्चों ने पहली बार किताब और कॉपी का मतलब यहीं समझा। शिक्षा के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास भी जगाया गया।
अब तक 35 से ज्यादा रक्तदान शिविर लगाए
संस्था ने अब तक 35 रक्तदान शिविर आयोजित किए हैं। इन शिविरों में सैकड़ों यूनिट रक्त एकत्र हुआ, जिससे अनगिनत मरीजों की जान बचाई जा सकी। इसके अलावा, 15 गरीब परिवारों की बेटियों की शादियां भी करवाई गईं। इन आयोजनों में समाज के युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पौधरोपण अभियानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
60 विद्यार्थियों ने अलग-अलग बनाई संस्था
मुलाना क्षेत्र से करीब 60 युवा इस सामाजिक यात्रा का हिस्सा बने। पढ़ाई पूरी होने के बाद सभी अलग-अलग क्षेत्रों में चले गए, लेकिन समाज सेवा से नाता नहीं टूटा। आज ये युवा अलग-अलग जगह काम कर रहे हैं। जब भी किसी को मदद की जरूरत होती है, एक फोन कॉल पर सभी सक्रिय हो जाते हैं। यही नेटवर्क उधम फाउंडेशन की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।
वर्जन
सात वर्षों के सफर में उधम फाउंडेशन ने यह साबित किया है कि अगर नीयत साफ हो और साथ देने वाले लोग हों, तो बड़े बदलाव संभव हैं। संस्था का उद्देश्य आगे भी समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक मदद पहुंचाना है। आने वाले समय में शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण के क्षेत्र में और व्यापक स्तर पर काम करने की योजना है।
- गगन कंबोज, संस्थापक, उधम फाउंडेशन सिरसा।