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Sirsa News: एसएसबी जवान की सड़क हादसे में गई जान
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चोपटा।गांव ढूकड़ा के जवान सुरजीत सिंह
चोपटा। गांव ढुकड़ा के सुरजीत सिंह की असम के गुवाहाटी में 21 दिसंबर को सड़क हादसे में ट्रक पलटने से जान चली गई। सुरजीत सिंह सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में देशसेवा में तैनात थे। सुरजीत सिंह का 23 दिसंबर को गांव में अंतिम संस्कार किया जाएगा। सुरजीत सिंह 20 दिसंबर को ही 15 दिन की छुट्टी बिताने के बाद ड्यूटी पर जा रहे थे।
परिजनों को सोमवार सुबह घटना की सूचना मिली तो गांव में मातम छा गया। इसके बाद परिजन सुरजीत सिंह के पार्थिव शरीर को लाने के लिए दिल्ली रवाना हो गए। गांव निवासी किसान भंवरलाल सिंह के तीन बेटे सुरजीत सिंह, अमर सिंह, रमेश कुमार हैं, सुरजीत सबसे बड़े थे। सुरजीत गांव ढुकड़ा के राजकीय स्कूल में दसवीं कक्षा पास करने के बाद एसएसबी में वर्ष 2013 में नौकरी लग गए। उनकी गांव नेजाडेला कलां में सीमा रानी से शादी हुई।
सुरजीत के दो बेटे हैं। राहुल दसवीं कक्षा व अश्वनी सातवीं कक्षा में पढ़ाई करता है। सुरजीत फौजी केवल एक साहसी सैनिक ही नहीं थे, बल्कि वे गांव के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत, मार्गदर्शक और आदर्श व्यक्तित्व थे। उन्होंने गांव में खेल ग्राउंड के लिए निरंतर प्रयास किए और आर्मी की तैयारी कर रहे बच्चों से उनका विशेष लगाव रहा। वे हमेशा युवाओं को अनुशासन, मेहनत, आत्मविश्वास और देशभक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहे। उनका जीवन सेवा, सादगी और समर्पण का प्रतीक था।
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परिजनों को सोमवार सुबह घटना की सूचना मिली तो गांव में मातम छा गया। इसके बाद परिजन सुरजीत सिंह के पार्थिव शरीर को लाने के लिए दिल्ली रवाना हो गए। गांव निवासी किसान भंवरलाल सिंह के तीन बेटे सुरजीत सिंह, अमर सिंह, रमेश कुमार हैं, सुरजीत सबसे बड़े थे। सुरजीत गांव ढुकड़ा के राजकीय स्कूल में दसवीं कक्षा पास करने के बाद एसएसबी में वर्ष 2013 में नौकरी लग गए। उनकी गांव नेजाडेला कलां में सीमा रानी से शादी हुई।
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सुरजीत के दो बेटे हैं। राहुल दसवीं कक्षा व अश्वनी सातवीं कक्षा में पढ़ाई करता है। सुरजीत फौजी केवल एक साहसी सैनिक ही नहीं थे, बल्कि वे गांव के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत, मार्गदर्शक और आदर्श व्यक्तित्व थे। उन्होंने गांव में खेल ग्राउंड के लिए निरंतर प्रयास किए और आर्मी की तैयारी कर रहे बच्चों से उनका विशेष लगाव रहा। वे हमेशा युवाओं को अनुशासन, मेहनत, आत्मविश्वास और देशभक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहे। उनका जीवन सेवा, सादगी और समर्पण का प्रतीक था।
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