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विश्व हृदय दिवस पर विशेष : महिलाओं के मुकाबले पुरुषों के बढ़ रहे हृदय घात के मामले

Sat, 28 Sep 2024 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Sat, 28 Sep 2024 11:54 PM IST
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Special on World Heart Day: Heart attack cases are increasing in men compared to women.
सिरसा में ह्रदय रोग के मरीज की जांच करते डाॅ. दीपेश तलवाड़। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। जिले में हृदय घात के मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। इसका सीधा कारण हमारी दैनिक दिनचर्या और खानपान है। इस कारण महिलाओं से अधिक पुरुष हृदय घात के शिकार हो रहे हैं। जिले के नागरिक अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ न होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालाें में जाना पड़ रहा है। जिले के नागरिक और निजी अस्पतालों में दिल के मरीजों की दैनिक ओपीडी 500 तक हो रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में करीब 10 साल पहले दिल का दौरा पड़ रहा है। 45 साल के बाद पुरुषों और 55 के बाद महिलाओं में हृदय घात का खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं में मौजूद एस्ट्रोजेन उन्हें हृदय घात से बचाते हैं लेकिन रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद यह खतरा बढ़ जाता है।
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महिलाओं में रजोनिवृत्ति से पहले एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण ज्यादा बचाव होता है। धमनियों में प्लेक डिपॉजिट (फैटी डिपॉजिट) जमा होने को एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं। इससे हृदय घात का खतरा बढ़ जाता है। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिरना शुरू हो जाता है। हाई प्री-मेनोपॉज एस्ट्रोजन स्तर के कारण ही महिलाओं का हृदय घात से बचाव होता है। इसी कारण महिलाएं 45 साल की उम्र में हृदय घात का शिकार नहीं होती हैं। व्यस्त दिनचर्या के कारण पुरुष ज्यादा मानसिक तनाव लेते हैं। इसका असर दिल पर पड़ता है।
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कोट्स
अब किसी भी उम्र में दिल का दौरा पड़ सकता है। इसके लिए कोई विशेष उम्र तय नहीं है। युवा इसके ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इसकी वजह दिनचर्या, खानपान और तनाव है। यहां रोजाना करीब 20 हृदय रोगी भर्ती हो रहे हैं। इनमें से ज्यादातर तनाव और गलत खानपान से प्रभावित होते हैं। लोगों ने सादे खानपान को छोड़कर बाहरी खाने को अपने जीवनशैली में इतना शामिल कर लिया है। इसके आदी होने के कारण वह हृदय रोगी बन रहे हैं। पाश्चात्य सभ्यता के अनुसरण, धूम्रपान और शराब आदि के सेवन से भी इसका खतरा बढ़ रहा है। -डॉ. दीपेश तलवाड़, सिरसा।


कोट्स
फोटो --16
हमारे अस्पताल में रोजाना 30 से अधिक हृदय रोगी आ रहे हैं। इनमें से अधिकतर मरीज 30 से 60 साल की उम्र के हैं। इनमें से कुछ मरीज अनुवांशिक हैं जबकि कई ऐसे मरीज गलत जीवनशैली और खानपान ठीक न होने के कारण ह्रदय रोगी बन रहे हैं। इनमें से ज्यादातर मरीज युवा और पुरुष हैं। इनमें महिलाओं की संख्या कम है। मरीजों की जांच के बाद ही उनका इलाज शुरू किया जाता है। समय पर इलाज शुरू करवाने वाले मरीजों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। हर साल पांच प्रतिशत से अधिक लोगों की मौत हृदय घात से हो रही है। - डॉ. मनदीप गर्ग, सिरसा।


हृदय रोग के लक्षण :

पसीना आना।

गर्दन में दर्द।
मतली या उल्टी।
सोने में कठिनाई।
थकान या थकावट।
ह्रदय रोग की पहचान।
सांस लेने में तकलीफ।
चक्कर आना या बेहोशी आना।

शरीर के निचले हिस्से में सूजन।
तेज़ या अनियमित दिल की धड़कन।

सीने में दर्द, दबाव, भारीपन, या बेचैनी।




कैसे करें बचाव :
1- धूम्रपान न करें।
2- तनाव मुक्त रहें।
3- स्वस्थ आहार लें।
5- नियमित रूप से व्यायाम करें।
6- नियमित हृदय की जांच कराएं।
4- शरीर का उचित वजन बनाए रखें।
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