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Sirsa News: धार से बाहर लगी धान की फसलें डूबीं, किसानों की बढ़ रही चिंता
Thu, 28 Aug 2025 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Thu, 28 Aug 2025 12:29 AM IST
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सिरसा। डबवाली रोड पर गांव खैरेका के पास घग्गर की धार में आने वाले खेतों में भरा पानी। संवाद
- फोटो : mathura
रानियां। पंजाब व हिमाचल में हो रही जोरदार बारिश के कारण घग्गर का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे ओटू झील पूरी तरह से भर गई और बीते चार दिनों से राजस्थान की बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। हेड इंचार्ज ओम प्रकाश ने बताया कि झील में जलस्तर बढ़ने से ओटू हेड के चार दरवाजे खोले गए हैं। बुधवार को करीब 11 हजार क्यूसेक पानी राजस्थान की ओर बह रहा है।
पूरे क्षेत्र में अच्छी बरसात के चलते चैनलों पर पानी की खपत नहीं हो रही। इसके चलते हेड से निकलने वाली सभी खरीफ चैनलों में पानी बंद किया गया है। बुधवार को घग्गर का बरसाती पानी धार से करीब दो फीट ऊपर तटबंधों के साथ लगकर बह रहा है। किसानों की धान व ज्वार की फसलें पूरी तरह से पानी में डूब गई हैं।
किसानों को बढ़ते जलस्तर से फसलों से होने वाले नुकसान की चिंता सताने लगी है। किसानों का कहना है कि अगर इसी तरह से पानी का स्तर बढ़ता रहा तो घग्गर के कमजोर तटबंधों के टूटने की आशंका है। इससे पास लगते गांवों में जलभराव व फसलों का बड़ा नुकसान हो सकता है। क िसानों ने बताया कि धार से बाहर के खेतों की फसलों के डूबने से न तो सरकार कोई मुआवजा देती है और न ही किसी प्रकार का बीमा मिलता है। घग्गर के जल स्तर से उन्हें हर साल बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने सरकार से फसलों के डूबने का मुआवजा व कमजोर तटबंधों को मजबूत करने की मांग की है।
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पूरे क्षेत्र में अच्छी बरसात के चलते चैनलों पर पानी की खपत नहीं हो रही। इसके चलते हेड से निकलने वाली सभी खरीफ चैनलों में पानी बंद किया गया है। बुधवार को घग्गर का बरसाती पानी धार से करीब दो फीट ऊपर तटबंधों के साथ लगकर बह रहा है। किसानों की धान व ज्वार की फसलें पूरी तरह से पानी में डूब गई हैं।
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किसानों को बढ़ते जलस्तर से फसलों से होने वाले नुकसान की चिंता सताने लगी है। किसानों का कहना है कि अगर इसी तरह से पानी का स्तर बढ़ता रहा तो घग्गर के कमजोर तटबंधों के टूटने की आशंका है। इससे पास लगते गांवों में जलभराव व फसलों का बड़ा नुकसान हो सकता है। क िसानों ने बताया कि धार से बाहर के खेतों की फसलों के डूबने से न तो सरकार कोई मुआवजा देती है और न ही किसी प्रकार का बीमा मिलता है। घग्गर के जल स्तर से उन्हें हर साल बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने सरकार से फसलों के डूबने का मुआवजा व कमजोर तटबंधों को मजबूत करने की मांग की है।
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