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मोह माया में न पड़कर भगवान की भक्ति में लगना चाहिए : पंडित सुगन
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सिरसा।प्रभात पैलेस मेंआयोजित श्रीमद्भागवत कथा सुनते हुए श्रद्धालु। समिति
सिरसा। श्री बंशीवट कथा समिति की ओर से रविवार को प्रभात पैलेस में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पंडित सुगन शर्मा ने भगवान ऋषभ देव, जैन पंथ कि स्थापना, भरत ऋषि के जन्म, हिरन के बच्चे के प्रति आसक्ति होने से अगले जन्म हिरन के रूप में लेकर भगवान कि भक्ति कर परम धाम पाने की मनमोहक कथा सुनाई।
पंडित ने बताया प्रत्येक प्राणी को ये मनुष्य तन पाकर सांसारिक मोह माया में ने पड़कर भगवान कि भक्ति में लगना चाहिए। हम उस परमात्मा के हाथ कि कठपुतली हैं जैसा किरदार हमें इस कठपुतली के खेल में मिला है उसे पूर्ण रूप से निभाना चाहिए। परमात्मा को भोले व निष्कपट ही प्रिय हैं जो ज्यादा तर्क करता है या बुद्धिमान बनता है वो परमात्मा को प्रिय नहीं है।
भगवान तो भाव के भूखे हैं धन वैभव के नहीं। स्वयं मां लक्ष्मी उनके अधीन है। पंडित ने जड़ भरत जी व भरत राजा कि कथा सुनाते हुए बताया कि उन्हीं के नाम से हमारे इस भारत वर्ष का नामकरण हुआ। भगवान का भजन बाल्यकाल से आरंभ कर देना चाहिए। हमें पल का भरोसा नहीं है बुढ़ापा किसने देखा है। कथा व्यास सुगन शर्मा ने सुंदर-सुंदर भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को कथा के बारे में बताया।
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उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा एक ऐसा ज्ञान सागर है, जिसमें डुबकी लगाने से व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है। कथा हमें न केवल धर्म के मार्ग पर चलना सिखाती है, बल्कि एक बेहतर इंसान बनने के लिए भी प्रेरित करती है। कथा दौरान वामन भगवान की झांकी भी निकाली गई। तत्पश्चात कथा व्यास ने भजन प्रस्तुत किए। जिस पर श्रद्धालु झूमे। इस मौके पर प्रधान इंद्रकुमार चिड़ावेवाला, उपप्रधान सुनील गोयल, सचिव संजय तायल, सहायक उपप्रधान राधेश्याम बंसल, कोषाध्यक्ष रामकुमार जैन व अन्य मौजूद रहे।
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पंडित ने बताया प्रत्येक प्राणी को ये मनुष्य तन पाकर सांसारिक मोह माया में ने पड़कर भगवान कि भक्ति में लगना चाहिए। हम उस परमात्मा के हाथ कि कठपुतली हैं जैसा किरदार हमें इस कठपुतली के खेल में मिला है उसे पूर्ण रूप से निभाना चाहिए। परमात्मा को भोले व निष्कपट ही प्रिय हैं जो ज्यादा तर्क करता है या बुद्धिमान बनता है वो परमात्मा को प्रिय नहीं है।
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भगवान तो भाव के भूखे हैं धन वैभव के नहीं। स्वयं मां लक्ष्मी उनके अधीन है। पंडित ने जड़ भरत जी व भरत राजा कि कथा सुनाते हुए बताया कि उन्हीं के नाम से हमारे इस भारत वर्ष का नामकरण हुआ। भगवान का भजन बाल्यकाल से आरंभ कर देना चाहिए। हमें पल का भरोसा नहीं है बुढ़ापा किसने देखा है। कथा व्यास सुगन शर्मा ने सुंदर-सुंदर भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को कथा के बारे में बताया।
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उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा एक ऐसा ज्ञान सागर है, जिसमें डुबकी लगाने से व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है। कथा हमें न केवल धर्म के मार्ग पर चलना सिखाती है, बल्कि एक बेहतर इंसान बनने के लिए भी प्रेरित करती है। कथा दौरान वामन भगवान की झांकी भी निकाली गई। तत्पश्चात कथा व्यास ने भजन प्रस्तुत किए। जिस पर श्रद्धालु झूमे। इस मौके पर प्रधान इंद्रकुमार चिड़ावेवाला, उपप्रधान सुनील गोयल, सचिव संजय तायल, सहायक उपप्रधान राधेश्याम बंसल, कोषाध्यक्ष रामकुमार जैन व अन्य मौजूद रहे।

सिरसा।प्रभात पैलेस मेंआयोजित श्रीमद्भागवत कथा सुनते हुए श्रद्धालु। समिति