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गलत संगत में पड़कर ऑरकेस्ट्रा ग्रुप की महिला आई नशे की चपेट में, परिणाम को जानकर अब इलाज करवाया शुरू
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अमनदीप कंबोज
सिरसा। नशे की चपेट में न केवल युवा बल्कि महिलाएं भी आ रही हैं। हेरोइन सहित मेडिकल नशा अब जानलेवा साबित हो रहा है। नशे के कारण जिले में 18 दिनों में सात युवकों की मौत हो चुकी है। पंजाब और राजस्थान की सीमा पर स्थित सिरसा जिले में गुप्त रास्तों के माध्यम से नशा आसानी से घर-घर तक पहुंच रहा है। फिर भी पुलिस सुस्त है। नशे के खिलाफ पुलिस का ऑपरेशन क्लीन अभियान केवल डोर-टू-डोर सर्वे और जागरूकता भाषण तक सिमटकर रह गया है। नशा मुक्ति केंद्र में उपचाराधीन रोगियों ने संवाददाता से बातचीत में कई खुलासे किए। नशा के नेटवर्क से जुड़ी कई कहानियां निकलकर सामने आईं। ऐसी ही एक कहानी ऑरकेस्ट्रा ग्रुप में शामिल महिला की है।
नाम और पहचान न छापने की शर्त पर 30 वर्षीय महिला बताती है कि वह काफी समय से ऑरकेस्ट्रा ग्रुप में काम करती थी। साथ में काम करने वाली अन्य लड़कियां मेडिकल नशा करती थी। इसके कारण वह भी मेडिकल नशे की गोलियों का सेवन करने लग गई। महिला का कहना है कि वह जिले की ही रहने वाली है और विवाहित है। नशे की लत पड़ने के बाद वह उसकी पूर्ति के लिए आसपास के लोगों से नशे की खरीदा करती थी। नशे के पदार्थों की सप्लाई उसे आसानी से मिल जाती थी। कॉलोनी में रहने वाले काफी लोग नशे के पदार्थों की सप्लाई करते थे। इसके कारण उसे नशे की गोलियों की खरीद के लिए उसे भटकना नहीं पड़ता था। जब उसे समझ में आया कि नशा का सेवन करने का परिणाम बहुत ही खतरनाक है तो उसने नशा छोड़ने का निर्णय लिया है। अब वह नशे की लत को छोड़ने के लिए नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल हुई है। यहां पर उसे अच्छा महसूस हो रहा है वह बिलकुल स्वस्थ हो चुुकी है। अगर वह कुछ समय तक और नशे का सेवन करती रहती तो शायद उसकी मौत ही हो जाती। (संवाद)
ड्राइवरी करता था, पहले डोडापोस्त और अब गोलियों का हो गया आदी
27 वर्षीय युवक ने बताया कि वह ट्रक ड्राइवरी के दौरान पहले डोडा पोस्त का सेवन करता था। इसके बाद मेडिकल नशे की चपेट में आ गया। आदी होने के बाद शरीर भी टूटने लगता और नशे की पूर्ति करने का प्रयास करता। अब नशे की लत को छोड़ने के लिए नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल हुआ हूं। इससे स्वास्थ्य बेहतर है।
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केस दो
23 वर्षीय युवक ने बताया कि गलत संगत में पड़ने के कारण चिट्टे का सेवन पन्नी से करना शुरू कर दिया था। कुछ नशे की लत छोड़ने के लिए अब केंद्र में दाखिल हुआ हूं। नशे की पन्नी आसानी से ही मिल जाती थी। रुपये होने पर सप्लायर खुद नशा देने के लिए पहुंचते थे।
18 दिनों में 7 नशा पीड़ितों की हुई मौत, कॉलोनियों में सरेआम बिकता है नशा
जिले में पुलिस की ओर से नशा सप्लायरों पर सख्ती करने के दावे किए जाते हैं और इसके लिए ऑपरेशन क्लीन अभियान भी चलाया गया है। लेकिन नशे बीते 18 दिनों में नशे के सात पीड़ितों की मौत हो गई है। शहर की खैरपुर कॉलोनी, चत्तरगढ़पट्टी, प्रेम नगर, जेजे कॉलोनी, नगर अस्पताल क्षेत्र की कॉलोनियां, थेहड़ मोहल्ला, हाउसिंग बोर्ड के फ्लैटों में रहने वाले फ्लैट वासी, शमशाबाद पट्टी, रानियां रोड, मीरपुर कॉलोनी में भी नशेड़ियों को आसानी से नशे की सप्लाई मिल रही है।
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पंजाब और राजस्थान की सीमा से सटा है सिरसा
सिरसा की सीमाएं पंजाब और राजस्थान के साथ लगती हैं। ऐसे में राजस्थान और पंजाब में नशे का अधिक सेवन होने के बाद अब सिरसा भी नशेड़ियों का गढ़ बन गया है। यहां तक कि मध्यप्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों से भी सिरसा में नशे की सप्लाई होती है। राजस्थान और पंजाब सीमा के साथ लगते गुप्त रास्तों से नशे की सप्लाई होती है।
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वर्जन
नशा पीड़ित इलाज लेने के लिए केंद्र में पहुंच रहे हैं। उन्हें दाखिल करने के बाद उपचार किया जा रहा है। मेडिकल नशे के पीड़ितों की संख्या भी काफी तेजी से बढ़ रही है। 10 बेडों पर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है, ताकि वे नशे की चपेट से बाहर निकल सके।
- डॉ. पंकज शर्मा, मनोरोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल सिरसा।
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सिरसा। नशे की चपेट में न केवल युवा बल्कि महिलाएं भी आ रही हैं। हेरोइन सहित मेडिकल नशा अब जानलेवा साबित हो रहा है। नशे के कारण जिले में 18 दिनों में सात युवकों की मौत हो चुकी है। पंजाब और राजस्थान की सीमा पर स्थित सिरसा जिले में गुप्त रास्तों के माध्यम से नशा आसानी से घर-घर तक पहुंच रहा है। फिर भी पुलिस सुस्त है। नशे के खिलाफ पुलिस का ऑपरेशन क्लीन अभियान केवल डोर-टू-डोर सर्वे और जागरूकता भाषण तक सिमटकर रह गया है। नशा मुक्ति केंद्र में उपचाराधीन रोगियों ने संवाददाता से बातचीत में कई खुलासे किए। नशा के नेटवर्क से जुड़ी कई कहानियां निकलकर सामने आईं। ऐसी ही एक कहानी ऑरकेस्ट्रा ग्रुप में शामिल महिला की है।
नाम और पहचान न छापने की शर्त पर 30 वर्षीय महिला बताती है कि वह काफी समय से ऑरकेस्ट्रा ग्रुप में काम करती थी। साथ में काम करने वाली अन्य लड़कियां मेडिकल नशा करती थी। इसके कारण वह भी मेडिकल नशे की गोलियों का सेवन करने लग गई। महिला का कहना है कि वह जिले की ही रहने वाली है और विवाहित है। नशे की लत पड़ने के बाद वह उसकी पूर्ति के लिए आसपास के लोगों से नशे की खरीदा करती थी। नशे के पदार्थों की सप्लाई उसे आसानी से मिल जाती थी। कॉलोनी में रहने वाले काफी लोग नशे के पदार्थों की सप्लाई करते थे। इसके कारण उसे नशे की गोलियों की खरीद के लिए उसे भटकना नहीं पड़ता था। जब उसे समझ में आया कि नशा का सेवन करने का परिणाम बहुत ही खतरनाक है तो उसने नशा छोड़ने का निर्णय लिया है। अब वह नशे की लत को छोड़ने के लिए नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल हुई है। यहां पर उसे अच्छा महसूस हो रहा है वह बिलकुल स्वस्थ हो चुुकी है। अगर वह कुछ समय तक और नशे का सेवन करती रहती तो शायद उसकी मौत ही हो जाती। (संवाद)
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27 वर्षीय युवक ने बताया कि वह ट्रक ड्राइवरी के दौरान पहले डोडा पोस्त का सेवन करता था। इसके बाद मेडिकल नशे की चपेट में आ गया। आदी होने के बाद शरीर भी टूटने लगता और नशे की पूर्ति करने का प्रयास करता। अब नशे की लत को छोड़ने के लिए नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल हुआ हूं। इससे स्वास्थ्य बेहतर है।
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23 वर्षीय युवक ने बताया कि गलत संगत में पड़ने के कारण चिट्टे का सेवन पन्नी से करना शुरू कर दिया था। कुछ नशे की लत छोड़ने के लिए अब केंद्र में दाखिल हुआ हूं। नशे की पन्नी आसानी से ही मिल जाती थी। रुपये होने पर सप्लायर खुद नशा देने के लिए पहुंचते थे।
18 दिनों में 7 नशा पीड़ितों की हुई मौत, कॉलोनियों में सरेआम बिकता है नशा
जिले में पुलिस की ओर से नशा सप्लायरों पर सख्ती करने के दावे किए जाते हैं और इसके लिए ऑपरेशन क्लीन अभियान भी चलाया गया है। लेकिन नशे बीते 18 दिनों में नशे के सात पीड़ितों की मौत हो गई है। शहर की खैरपुर कॉलोनी, चत्तरगढ़पट्टी, प्रेम नगर, जेजे कॉलोनी, नगर अस्पताल क्षेत्र की कॉलोनियां, थेहड़ मोहल्ला, हाउसिंग बोर्ड के फ्लैटों में रहने वाले फ्लैट वासी, शमशाबाद पट्टी, रानियां रोड, मीरपुर कॉलोनी में भी नशेड़ियों को आसानी से नशे की सप्लाई मिल रही है।
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पंजाब और राजस्थान की सीमा से सटा है सिरसा
सिरसा की सीमाएं पंजाब और राजस्थान के साथ लगती हैं। ऐसे में राजस्थान और पंजाब में नशे का अधिक सेवन होने के बाद अब सिरसा भी नशेड़ियों का गढ़ बन गया है। यहां तक कि मध्यप्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों से भी सिरसा में नशे की सप्लाई होती है। राजस्थान और पंजाब सीमा के साथ लगते गुप्त रास्तों से नशे की सप्लाई होती है।
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वर्जन
नशा पीड़ित इलाज लेने के लिए केंद्र में पहुंच रहे हैं। उन्हें दाखिल करने के बाद उपचार किया जा रहा है। मेडिकल नशे के पीड़ितों की संख्या भी काफी तेजी से बढ़ रही है। 10 बेडों पर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है, ताकि वे नशे की चपेट से बाहर निकल सके।
- डॉ. पंकज शर्मा, मनोरोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल सिरसा।