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Sirsa News: नाटक ईमान से स्वार्थ त्यागने का दिया संदेश
Sat, 30 Aug 2025 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 30 Aug 2025 11:45 PM IST
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राजकीय नेशनल महाविद्यालय में नाटक प्रस्तुत करते कलाकार। स्रोत : आयोजक
सिरसा।
केएल थियेटर प्रोडक्शंस और जेसीडी रंगशाला के संयुक्त तत्तवाधान में चल रहे नाट्य महोत्सव अनुभाव रंग महोत्सव के चौथे दिन पूर्वाभ्यास दिल्ली के कलाकारों की ओर से शनिवार को राजकीय नेशनल महाविद्यालय में नाटक ईमान का मंचन किया गया। इसमें राजकीय नेशनल महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. हरजिंदर सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कलाकारों ने शेख सोहेल के निर्देशन में नाटक ईमान में दर्शाया कि आज के स्वार्थपूर्ण समाज में हर कोई एक दूसरे का लाभ उठाने का अवसर ढूंढता है। सभ्य और विकसित समाज के निर्माण के लिए हमें स्वार्थ को त्यागना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राजकीय नेशनल महाविद्यालय के उप प्राचार्य डाॅ. हरविंदर सिंह ने की। नाटक मंचन के बाद मुख्यातिथि डा. हरजिंदर सिंह ने कहा कि इस नाटक के सभी कलाकारों ने शानदार अभिनय से सभी दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि इंसान का ईमान उसके भीतर सदैव जीवित रहना बहुत जरूरी है। एक इंसान का ईमान, जमीर ही एक सभ्य समाज की रचना कर सकता है और कला इसमें एक अहम भूमिका अदा करती है। एक विकसित और सभ्य समाज केवल बड़ी-बड़ी इमारतों से नहीं बनता बल्कि कला का विकास उस समाज की विकास शीलता का एक सशक्त उदाहरण होता है।
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केएल थियेटर प्रोडक्शंस और जेसीडी रंगशाला के संयुक्त तत्तवाधान में चल रहे नाट्य महोत्सव अनुभाव रंग महोत्सव के चौथे दिन पूर्वाभ्यास दिल्ली के कलाकारों की ओर से शनिवार को राजकीय नेशनल महाविद्यालय में नाटक ईमान का मंचन किया गया। इसमें राजकीय नेशनल महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. हरजिंदर सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कलाकारों ने शेख सोहेल के निर्देशन में नाटक ईमान में दर्शाया कि आज के स्वार्थपूर्ण समाज में हर कोई एक दूसरे का लाभ उठाने का अवसर ढूंढता है। सभ्य और विकसित समाज के निर्माण के लिए हमें स्वार्थ को त्यागना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राजकीय नेशनल महाविद्यालय के उप प्राचार्य डाॅ. हरविंदर सिंह ने की। नाटक मंचन के बाद मुख्यातिथि डा. हरजिंदर सिंह ने कहा कि इस नाटक के सभी कलाकारों ने शानदार अभिनय से सभी दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि इंसान का ईमान उसके भीतर सदैव जीवित रहना बहुत जरूरी है। एक इंसान का ईमान, जमीर ही एक सभ्य समाज की रचना कर सकता है और कला इसमें एक अहम भूमिका अदा करती है। एक विकसित और सभ्य समाज केवल बड़ी-बड़ी इमारतों से नहीं बनता बल्कि कला का विकास उस समाज की विकास शीलता का एक सशक्त उदाहरण होता है।
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