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Sirsa News: बप्पा के स्वागत में सजे द्वार, गणेश चतुर्थी की धूम आज से
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सिरसा।बरनाला रोड स्थित मूर्तिकार के पास ऑर्डर पर तैयार किए हुए आकार में छोटे गणपति। संवाद
सिरसा। जिलेभर में गणेश चतुर्थी का उल्लास चरम पर है। बुधवार को श्रद्धालु गणपति बप्पा को धूमधाम से अपने घरों और पंडालों में स्थापित करेंगे। मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों को रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों और सजावटी झांकियों से सजाया गया है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर तक गणेश भक्ति की बयार बह रही है।
10 दिवसीय इस पर्व के दौरान मंदिरों में विशेष पूजन, हवन, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला चलेगी। अंतिम दिन बप्पा को शोभायात्रा के साथ विदाई दी जाएगी।
पर्यावरण के लिए मिट्टी की मूर्तियां चुन रहे लोग
गणेश चतुर्थी को लेकर मूर्तिकारों के पास इस बार छोटी मूर्तियों की अधिक मांग रही। मूर्तिकारों के अनुसार लोग अब पर्यावरण के प्रति जागरूक हो गए हैं और प्लास्टर ऑफ पेरिस की बजाय मिट्टी से बनी मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे न केवल विसर्जन में आसानी होती है, बल्कि जल स्रोतों का प्रदूषण भी कम होता है। श्रद्धालु पहले ही बुकिंग कर चुके थे और अब मूर्तियां अपने घरों में बप्पा की स्थापना के लिए ले जा रहे हैं।
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पगड़ीधारी बप्पा बन रहे आकर्षण का केंद्र
इस बार गणेशजी की पारंपरिक छवियों में एक नया रूप दिखाई दे रहा है – पगड़ीधारी बप्पा। मूर्तिकार लाला राम ने बताया कि राजस्थान और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक झलक लिए ये मूर्तियां श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रही हैं। इन पारंपरिक पोशाकों की मांग इतनी बढ़ी कि बाजारों में भगवान की पोशाकों के साथ-साथ पगड़ियों की भी खरीदारी हो रही है।
कोलकाता और मुंबई से आईं विशेष पोशाकें
गणेश उत्सव की भव्यता को और निखारने के लिए लोग कोलकाता और मुंबई से आयातित पोशाकों का चयन कर रहे हैं। इन पोशाकों की रंगीनता, कपड़े की गुणवत्ता और डिजाइन की विविधता ने बाजार में एक अलग ही रौनक पैदा कर दी है। श्रद्धालु इन खास पोशाकों से बप्पा को और आकर्षक रूप में सजा रहे हैं।
मंदिरों में भक्तिमय माहौल, भजन-कीर्तन से गूंजेंगे दरबार
जिले के प्रमुख मंदिरों में भव्य सजावट के साथ गणेश उत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दरबारों को रंगीन लाइटों, पुष्पों और पारंपरिक सजावटी सामग्री से सजाया गया है। सुबह-शाम आरती और भजन-कीर्तन के साथ मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा।
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10 दिवसीय इस पर्व के दौरान मंदिरों में विशेष पूजन, हवन, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला चलेगी। अंतिम दिन बप्पा को शोभायात्रा के साथ विदाई दी जाएगी।
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पर्यावरण के लिए मिट्टी की मूर्तियां चुन रहे लोग
गणेश चतुर्थी को लेकर मूर्तिकारों के पास इस बार छोटी मूर्तियों की अधिक मांग रही। मूर्तिकारों के अनुसार लोग अब पर्यावरण के प्रति जागरूक हो गए हैं और प्लास्टर ऑफ पेरिस की बजाय मिट्टी से बनी मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे न केवल विसर्जन में आसानी होती है, बल्कि जल स्रोतों का प्रदूषण भी कम होता है। श्रद्धालु पहले ही बुकिंग कर चुके थे और अब मूर्तियां अपने घरों में बप्पा की स्थापना के लिए ले जा रहे हैं।
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पगड़ीधारी बप्पा बन रहे आकर्षण का केंद्र
इस बार गणेशजी की पारंपरिक छवियों में एक नया रूप दिखाई दे रहा है – पगड़ीधारी बप्पा। मूर्तिकार लाला राम ने बताया कि राजस्थान और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक झलक लिए ये मूर्तियां श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रही हैं। इन पारंपरिक पोशाकों की मांग इतनी बढ़ी कि बाजारों में भगवान की पोशाकों के साथ-साथ पगड़ियों की भी खरीदारी हो रही है।
कोलकाता और मुंबई से आईं विशेष पोशाकें
गणेश उत्सव की भव्यता को और निखारने के लिए लोग कोलकाता और मुंबई से आयातित पोशाकों का चयन कर रहे हैं। इन पोशाकों की रंगीनता, कपड़े की गुणवत्ता और डिजाइन की विविधता ने बाजार में एक अलग ही रौनक पैदा कर दी है। श्रद्धालु इन खास पोशाकों से बप्पा को और आकर्षक रूप में सजा रहे हैं।
मंदिरों में भक्तिमय माहौल, भजन-कीर्तन से गूंजेंगे दरबार
जिले के प्रमुख मंदिरों में भव्य सजावट के साथ गणेश उत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दरबारों को रंगीन लाइटों, पुष्पों और पारंपरिक सजावटी सामग्री से सजाया गया है। सुबह-शाम आरती और भजन-कीर्तन के साथ मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा।