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Sirsa News: पशु पकड़ने वाली टीम को आदेश के बावजूद नहीं मिल रही पुलिस सुरक्षा
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सिरसा। नगर परिषद की टीम दुधारू पशु पकड़ते हुए। टीम
- फोटो : अभ्यास करते हॉकी खिलाड़ी।
सिरसा। नगर परिषद का पशु पकड़ो अभियान तेजी से चल रहा है। इस अभियान में बुधवार को एडीसी विरेंद्र सेहरावत की बैठक के बाद तेजी आई है। अब नगर परिषद कर्मचारियों ने दूध निकालकर खुला छोड़ने वाले पशु पालकों के पशुओं पर फोक्स कर लिया है। वीरवार को 25 दुधारू पशुओं को गोशाला पहुंचाया गया है। हालांकि, पशु पकड़ो टीम को कोई पुलिस सुरक्षा नहीं दी गई है।
पुलिस की टीमें विवाद होने की सूरत पर फोन आने के बाद ही मौके पर पहुंचती हैं। टीम के साथ कोई पुलिस नहीं होती है, ऐसे में कर्मचारियों के निरंतर दुधारू पशु पकड़ने के दौरान हमले का खतरा बढ़ जाता है। पूर्व में भी पुलिस सुरक्षा नहीं होने पर पशु पकड़ो टीम पर हमला हो चुका है। इतना ही नहीं, दो सप्ताह पहले ही कॉलोनी के लोगों ने पशु पकड़ो टीम को बंधक बना लिया था।
ऐसे में मौके संबंधित वार्ड के पार्षदों ने जाकर टीम को छुड़ाया था। इसलिए रात व दिन के समय पशु पकड़ने के दौरान पुलिस की टीम का होना बेहद जरूरी है। तभी तेजी से पशुओं को पकड़ा जा सकता है। मौजूदा समय में 25 से 30 पशु ही पकड़े जा रहे हैं। यही कारण है कि अब तक 415 के आसपास ही एक माह में पशुओं को पकड़ा जा सका है।
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यह दिए थे एडीसी ने आदेश
- शहरी क्षेत्र दुधारू पशुओं को सड़क पर छोड़ेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- पशु खुले छोड़ने वालों को चयनित करने के लिए विशेष टीम का गठन किया जाएगा।
- पशु डेयरी द्वारा गोबर सीवरेज में डालने की जन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी जांच करेंगे।
- जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी चालान करेंगे, चालान न भरने की सूरत में प्रॉपर्टी टैक्स में उसे अटैच किया जाएगा।
- पशु रखने वाले एरिया का सर्वे किया जाएगा और सर्वे की फोटो व डाटा का स्टोर किया जाएगा।
- पशुओं का चारा डालने वाले टाल की भी पहचान की जाएगी। उसे समझाया जाएगा। नहीं माने पर सख्त कार्रवाई होगी।
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पुलिस की टीमें विवाद होने की सूरत पर फोन आने के बाद ही मौके पर पहुंचती हैं। टीम के साथ कोई पुलिस नहीं होती है, ऐसे में कर्मचारियों के निरंतर दुधारू पशु पकड़ने के दौरान हमले का खतरा बढ़ जाता है। पूर्व में भी पुलिस सुरक्षा नहीं होने पर पशु पकड़ो टीम पर हमला हो चुका है। इतना ही नहीं, दो सप्ताह पहले ही कॉलोनी के लोगों ने पशु पकड़ो टीम को बंधक बना लिया था।
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ऐसे में मौके संबंधित वार्ड के पार्षदों ने जाकर टीम को छुड़ाया था। इसलिए रात व दिन के समय पशु पकड़ने के दौरान पुलिस की टीम का होना बेहद जरूरी है। तभी तेजी से पशुओं को पकड़ा जा सकता है। मौजूदा समय में 25 से 30 पशु ही पकड़े जा रहे हैं। यही कारण है कि अब तक 415 के आसपास ही एक माह में पशुओं को पकड़ा जा सका है।
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यह दिए थे एडीसी ने आदेश
- शहरी क्षेत्र दुधारू पशुओं को सड़क पर छोड़ेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- पशु खुले छोड़ने वालों को चयनित करने के लिए विशेष टीम का गठन किया जाएगा।
- पशु डेयरी द्वारा गोबर सीवरेज में डालने की जन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी जांच करेंगे।
- जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी चालान करेंगे, चालान न भरने की सूरत में प्रॉपर्टी टैक्स में उसे अटैच किया जाएगा।
- पशु रखने वाले एरिया का सर्वे किया जाएगा और सर्वे की फोटो व डाटा का स्टोर किया जाएगा।
- पशुओं का चारा डालने वाले टाल की भी पहचान की जाएगी। उसे समझाया जाएगा। नहीं माने पर सख्त कार्रवाई होगी।