{"_id":"5776cd0d4f1c1bd04979b072","slug":"sde-and-je-surrender-fake-tubewell-connetion-millions-fraud-sirsa","type":"story","status":"publish","title_hn":"एसडीई पंकज गंडा और जेई जंटा सिंह ने किया सरेंडर","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
एसडीई पंकज गंडा और जेई जंटा सिंह ने किया सरेंडर
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Sat, 02 Jul 2016 01:35 AM IST
विज्ञापन
Jail
उपभोक्ताओं और विद्युत निगम को मोटा चूना लगाने के मामले में पिछले लंबे समय से फरार चल रहे विद्युत निगम के एसडीई पंकज गंडा व उसके सहयोगी जेई जंटा सिंह ने शुक्रवार को डबवाली कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया जहां से पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को डीएसपी डबवाली ने रिमांड पर लेना था लेकिन उनके अवकाश पर होने के चलते उन्हें सोमवार तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
विज्ञापन
गौरतलब है कि आरोपी गंडा व जेई जंटा सिंह को अदालत ने विद्युत निगम व उपभोक्ताओं के साथ की गई धोखाधड़ी के दो मुकदमों में 14 जून को भगोड़ा घोषित किया था जिसके चलते शुक्रवार को पुलिस को उनकी ऑर्डर कॉपी मिलनी थी। दोनों आरोपियों ने डबवाली अदालत के समक्ष सरेंडर कर दिया। आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच डबवाली के डीएसपी सत्यपाल यादव को सौंपी गई है।
विज्ञापन
बता दें कि एसडीई पंकज गंडा ने वर्ष 2010 व 2014 में कालांवाली सब-डिविजन में एसडीई पद पर रहते हुए कुछ जेई व ठेकेदारों के साथ मिलकर उपभोक्ताओं व निगम को करोड़ों रुपये के फर्जी सिंगल व ढाणियों के ट्यूबवेल कनेक्शन जारी किए इसके अलावा इन्होंने फर्जी रसीदें काटकर निगम को भी 22 लाख 87 हजार रुपये का चूना लगाया। इस मामले में एक्सईएन डबवाली की शिकायत पर आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया गया।
विज्ञापन
जब आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू हुई तो उनके फर्जी चिट्ठे खुलने शुरू हुए जिनकी बाकी जांच स्टेट विजिलेंस निरीक्षक भूपेंद्र शर्मा हिसार द्वारा की जा रही है। आरोपी गंडा व उसके जेई पर अब तक डेढ़ दर्जन से अधिक धोखाधड़ी के मुकदमे दर्ज हो चुके है जिनमें पुलिस उसे शामिल तफ्तीश करेगी। इस मामले में अब पुलिस को गंडा के सहयोगी आरोपी जेई विनोद शर्मा,लाइनमैन उपभोक्ता क्लर्क हरगोबिंद सिंह, ठेकेदार रोहित कुमार, संदीप व जॉनी की तलाश है। यहां जिक्र योग है कि इस पूरे प्रकरण से निगम के एक कर्मचारी जसकौर सिंह ने पर्दा उठाया जिसके बाद विद्युत निगम में हड़कंप मच गया था।