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Sirsa News: पूर्व एमई, जेई के खिलाफ तैयार की चार्जशीट, भेजी जाएगी मुख्यालय
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सिरसा। नगर परिषद सिरसा में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के निर्माण घोटाले की विजिलेंस जांच में 2012-13 से 2014 तक बनी गलियों व अन्य निर्माण कार्यों में अनियमितताएं सामने आईं थी। इसी मामले में नगर परिषद सिरसा ने तत्कालीन म्यूनिसिपल इंजीनियर (एमई) व जूनियर इंजीनियर (जेई) के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर ली है। जिला नगर आयुक्त्त के माध्यम से अब चार्जशीट को मुख्यालय भेजा जाएगा। इसके पश्चात निदेशक इस मामले में आगामी कार्रवाई अमल में लाएंगे। गौरतलब है कि अधिकारियों की मिलीभगत से हुए इस घोटाले की जांच रिपोर्ट में उच्चाधिकारियों ने 21 अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध पाया है। इसके साथ ही ठेकेदार पर भी जुर्माना कार्रवाई की है। ठेकेदार को रिकवरी नोटिस जारी होगा, ताकि उससे रिकवरी की जा सके।
विधायक भी खोल चुके भ्रष्टाचार मामलों की पोल
वर्ष 2012 से 2014 के मामले में भले ही विजिलेंस जांच हो गई हो और कार्रवाई जल्द ही अमल में लाई जाएगी, लेकिन नगर परिषद के पिछले तीन साल के कार्यकाल में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। विभिन्न गलियों के निर्माण पर धांधली हुई है। विधायक तक कागजों में ही बनी गली की पोल खोल चुके हैं। हिसार की फर्म को दिए गए 10 करोड़ के काम की आज तक जांच नहीं हुई है, जिसको लेकर पार्षद तक शिकायत दे चुके हैं। अब एक बार फिर सिरसा नगर परिषद में विजिलेंस पिछले तीन साल की जांच करे तो कई अधिकारी ओर ठेकेदारों का चार्जशीट होना तय है।
इन इंजीनियर पर कार्रवाई प्रस्तावित
- सूबे सिंह : तत्कालीन म्यूनिसिपल इंजीनियर (एमई)
- भूपेंदर सिंह : तत्कालीन म्यूनिसिपल इंजीनियर
- राजेश कुमार : जूनियर इंजीनियर
- अरुण कुमार : जूनियर इंजीनियर
- राजेश दलाल : जूनियर इंजीनियर
- ओमप्रकाश : जूनियर इंजीनियर (रिटा.)
- दीपक कुमार : जूनियर इंजीनियर
यह है मामला
नगर परिषद में वर्ष 2012- 2013 से 2014 के तक बिना प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी मंजूरी और टेंडर प्रक्रिया के नियमों की अवहेलना की गई। अदालत में विचाराधीन जमीन पर भी निर्माण कार्य दर्शाए गए। लाइट लगाने के नाम पर बिना टेंडर के बिल भुगतान किया गया। इतना ही नहीं, तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी, पार्षद, जूनियर इंजीनियर ने टेंडरों को वक्त से पहले खोल दिया था। अधिकारियों ने अपने चहेते ठेकेदारों को यह टेंडर अलॉट कर दिए। ठेकेदार ने निर्माण सामग्री में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया। जब शिकायतें प्राप्त होने पर विजिलेंस ने मामले की जांच की तो सैंपल रिपोर्ट में सीमेंट, रेता और बजरी का अनुपात तय मानकों से कम मिला। डिवाइडर में लगने वाली लोहे की ग्रील और एंगल मौके पर नहीं मिली। बनी हुई गलियों की लंबाई भी तय मापदंड से कम पाई गई। एक नहीं, इन तीन सालों में बनी कई एरिया की गलियों के निर्माण सामग्री व पैमाइश में गड़बड़ी मिली। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पंचकूला की जांच रिपोर्ट के आधार पर सात इंजीनियरों के खिलाफ चार्जशीट जारी करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके अलावा विजिलेंस ने संबंधी अधिकारियों व ठेकेदारों से 34 लाख रुपये की रिकवरी के आदेश भी दिए है।
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-- -- -- -- -- -- -- -- -- -निदेशालय ने जांच रिपोर्ट की कॉपी पिछले सप्ताह मिली थी। रिपोर्ट में सात इंजीनियरों के खिलाफ चार्जशीट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें एक-दो इंजीनियर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। चार्जशीट के लिए मसौदा तैयार हो चुका है। उसे जिला नगर आयुक्त के मार्फत डायरेक्टर को भेज दिया जाएगा। इस मामले में आगामी कार्रवाई मुख्यालय स्तर पर होगी। - सुनील रंगा, ईओ, नगर परिषद, सिरसा।
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विधायक भी खोल चुके भ्रष्टाचार मामलों की पोल
वर्ष 2012 से 2014 के मामले में भले ही विजिलेंस जांच हो गई हो और कार्रवाई जल्द ही अमल में लाई जाएगी, लेकिन नगर परिषद के पिछले तीन साल के कार्यकाल में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। विभिन्न गलियों के निर्माण पर धांधली हुई है। विधायक तक कागजों में ही बनी गली की पोल खोल चुके हैं। हिसार की फर्म को दिए गए 10 करोड़ के काम की आज तक जांच नहीं हुई है, जिसको लेकर पार्षद तक शिकायत दे चुके हैं। अब एक बार फिर सिरसा नगर परिषद में विजिलेंस पिछले तीन साल की जांच करे तो कई अधिकारी ओर ठेकेदारों का चार्जशीट होना तय है।
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इन इंजीनियर पर कार्रवाई प्रस्तावित
- सूबे सिंह : तत्कालीन म्यूनिसिपल इंजीनियर (एमई)
- भूपेंदर सिंह : तत्कालीन म्यूनिसिपल इंजीनियर
- राजेश कुमार : जूनियर इंजीनियर
- अरुण कुमार : जूनियर इंजीनियर
- राजेश दलाल : जूनियर इंजीनियर
- ओमप्रकाश : जूनियर इंजीनियर (रिटा.)
- दीपक कुमार : जूनियर इंजीनियर
यह है मामला
नगर परिषद में वर्ष 2012- 2013 से 2014 के तक बिना प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी मंजूरी और टेंडर प्रक्रिया के नियमों की अवहेलना की गई। अदालत में विचाराधीन जमीन पर भी निर्माण कार्य दर्शाए गए। लाइट लगाने के नाम पर बिना टेंडर के बिल भुगतान किया गया। इतना ही नहीं, तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी, पार्षद, जूनियर इंजीनियर ने टेंडरों को वक्त से पहले खोल दिया था। अधिकारियों ने अपने चहेते ठेकेदारों को यह टेंडर अलॉट कर दिए। ठेकेदार ने निर्माण सामग्री में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया। जब शिकायतें प्राप्त होने पर विजिलेंस ने मामले की जांच की तो सैंपल रिपोर्ट में सीमेंट, रेता और बजरी का अनुपात तय मानकों से कम मिला। डिवाइडर में लगने वाली लोहे की ग्रील और एंगल मौके पर नहीं मिली। बनी हुई गलियों की लंबाई भी तय मापदंड से कम पाई गई। एक नहीं, इन तीन सालों में बनी कई एरिया की गलियों के निर्माण सामग्री व पैमाइश में गड़बड़ी मिली। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पंचकूला की जांच रिपोर्ट के आधार पर सात इंजीनियरों के खिलाफ चार्जशीट जारी करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके अलावा विजिलेंस ने संबंधी अधिकारियों व ठेकेदारों से 34 लाख रुपये की रिकवरी के आदेश भी दिए है।
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