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Sirsa News: मजदूरी कम मिलने पर रोष, बढ़ाने के आश्वासन पर माने
Thu, 22 Oct 2026 10:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Thu, 22 Oct 2026 10:51 PM IST
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कालांवाली। अतिरिक्त अनाज मंडी में मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते मजदूर। संवाद
कालांवाली। उपमंडल की अतिरिक्त अनाज मंडी में सरकार की ओर से निर्धारित दरों के अनुसार मजदूरी नहीं मिलने पर वीरवार को मजदूरों ने कामकाज बंद कर विरोध प्रदर्शन किया। मजदूर यूनियन के प्रधान प्रदीप खन्ना की अगुवाई में हुए प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने प्रशासन और व्यापारियों के प्रति रोष जताया। बाद में मजदूरों और व्यापारियों के बीच हुई बैठक में मजदूरी बढ़ाने पर सहमति बनी जिसके बाद कामकाज दोबारा शुरू हो गया।
प्रदर्शन के दौरान मजदूर यूनियन के प्रधान प्रदीप खन्ना, सुखदेव डाबला, रवि कुमार, विजय कुमार, अजय कुमार और विक्रम कुमार ने आरोप लगाया कि मंडी में कई वर्षों से अधिकारियों की मिलीभगत से धान की सीधी खरीद की जा रही है। उनका कहना था कि धान को खाली और भरी ट्रॉलियों के माध्यम से उतारा जाता है। इस प्रक्रिया में न तो धान की पूरी तरह सफाई होती है और न ही उचित तुलाई की जाती है। बिना सफाई के ही धान को बोरियों में भर दिया जाता है।
मजदूरों ने बताया कि उन्हें साल में केवल दो से तीन महीने ही काम मिलता है। इस सीमित अवधि में भी बाहर से मजदूर बुलाकर काम करवाया जाता है जिससे स्थानीय मजदूरों को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पाता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने धान के प्रति बैग की मजदूरी 12 से 15 रुपये निर्धारित की है जबकि व्यापारी इससे कम भुगतान कर रहे हैं। इससे उनकी आमदनी प्रभावित हो रही है और परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है।
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मजदूरों के काम बंद करने के बाद व्यापारियों और मजदूरों के बीच बैठक हुई। इसमें मजदूरी बढ़ाने पर चर्चा की गई। व्यापारियों की ओर से मजदूरी बढ़ाने पर सहमति जताए जाने के बाद मजदूरों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया और मंडी में कामकाज फिर से शुरू कर दिया।
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प्रदर्शन के दौरान मजदूर यूनियन के प्रधान प्रदीप खन्ना, सुखदेव डाबला, रवि कुमार, विजय कुमार, अजय कुमार और विक्रम कुमार ने आरोप लगाया कि मंडी में कई वर्षों से अधिकारियों की मिलीभगत से धान की सीधी खरीद की जा रही है। उनका कहना था कि धान को खाली और भरी ट्रॉलियों के माध्यम से उतारा जाता है। इस प्रक्रिया में न तो धान की पूरी तरह सफाई होती है और न ही उचित तुलाई की जाती है। बिना सफाई के ही धान को बोरियों में भर दिया जाता है।
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मजदूरों ने बताया कि उन्हें साल में केवल दो से तीन महीने ही काम मिलता है। इस सीमित अवधि में भी बाहर से मजदूर बुलाकर काम करवाया जाता है जिससे स्थानीय मजदूरों को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पाता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने धान के प्रति बैग की मजदूरी 12 से 15 रुपये निर्धारित की है जबकि व्यापारी इससे कम भुगतान कर रहे हैं। इससे उनकी आमदनी प्रभावित हो रही है और परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है।
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मजदूरों के काम बंद करने के बाद व्यापारियों और मजदूरों के बीच बैठक हुई। इसमें मजदूरी बढ़ाने पर चर्चा की गई। व्यापारियों की ओर से मजदूरी बढ़ाने पर सहमति जताए जाने के बाद मजदूरों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया और मंडी में कामकाज फिर से शुरू कर दिया।