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स्कूलों में पढ़ाएं भारत-चीन जंग के शहीदों की गाथा
रेवाड़ी/ब्यूरो
Updated Sun, 20 Oct 2013 11:03 PM IST
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रेजांगला युद्ध स्मारक पर रविवार को एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
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सभा में रेजांगला शौर्य समिति की ओर से 1962 की भारत-चीन लड़ाई की 51वीं
वर्षगांठ पर शहीदों को याद किया गया।
रेजांगला मोर्चे समेत 20 अक्तूबर से 21 नवंबर 1962 के बीच शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संजय राव की अध्यक्षता में एक प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार से अनुरोध किया गया कि 1962 की लड़ाई में शहीद हुए प्रदेश के जवानों की शहादत का स्कूल कॉलेज के पाठ्यक्रम में गुणगान शामिल किया जाए।
रेजांगला शौर्य समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में हनुवंत सिंह रतनथल, मेहताब सिंह झाल, रामअवतार श्यामनगर, सुंदरलाल गुजरवास, सूरजभान बास बिटोड़ी, सुमेर सिंह नांधा, माघो सिंह खोल, शहजाद खरखड़ी, शिवनारायण मायन, पतराम पातूहेड़ा, श्योनाथ सिंह कसौली, मोल्हड़, उदमीराम भूड़ला, बलबीर सिंह मूंदी, महताब सिंह कोसली और रामस्वरूप बोहका आदि मौजूद रहे।
रेजांगला मोर्चे समेत 20 अक्तूबर से 21 नवंबर 1962 के बीच शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संजय राव की अध्यक्षता में एक प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार से अनुरोध किया गया कि 1962 की लड़ाई में शहीद हुए प्रदेश के जवानों की शहादत का स्कूल कॉलेज के पाठ्यक्रम में गुणगान शामिल किया जाए।
रेजांगला शौर्य समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में हनुवंत सिंह रतनथल, मेहताब सिंह झाल, रामअवतार श्यामनगर, सुंदरलाल गुजरवास, सूरजभान बास बिटोड़ी, सुमेर सिंह नांधा, माघो सिंह खोल, शहजाद खरखड़ी, शिवनारायण मायन, पतराम पातूहेड़ा, श्योनाथ सिंह कसौली, मोल्हड़, उदमीराम भूड़ला, बलबीर सिंह मूंदी, महताब सिंह कोसली और रामस्वरूप बोहका आदि मौजूद रहे।