{"_id":"6784d351c8f23f8d406913229961e9e3","slug":"run-for-girl-child-mini-marathon","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटी बचाने के लिए दौड़े रोहतक के धावक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटी बचाने के लिए दौड़े रोहतक के धावक
रोहतक/ब्यूरो
Updated Sun, 10 Nov 2013 07:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश-समाज में कन्याओं के प्रति संवेदनशीलता का माहौल बनाने के उद्देश्य से रविवार को भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) ने रन फॉर गर्ल चाइल्ड मिनी मैराथन दौड़ का आयोजन करवाया।
यह दौड़ एमडीयू परिसर स्थित आईआईएम से शुरू हुई। मैराथन का शुभारंभ पद्मश्री मिल्खा सिंह और आईआईएम के निदेशक प्रो. पी रमेशन ने हरी झंडी दिखाकर किया।
मिनी मैराथन में 10 किलोमीटर की दौड़ में हरिशंकर शर्मा प्रथम और देवेंद्र ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। महिलाओं की पांच किलोमीटर रेस में मीना प्रथम और ममता द्वितीय रही। पुरुष वर्ग की 5 किलोमीटर रेस में विशाल प्रथम और विनोद ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
बच्चों की 3 किलोमीटर दौड़ में सचिन प्रथम और शंकर ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। विजेता प्रतिभागियों को पद्मश्री अवार्ड मिल्खा सिंह ने पुरस्कार वितरित किए। यह दौड़ तीन वर्गों में कराई गई और तीन हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
विज्ञापन
मिल्खा सिंह ने बेटी बचाओ मैराथन आयोजित करने पर आईआईएम रोहतक को शुभकामनाएं दी और कहा कि बेटियां किसी पर बोझ नहीं होती। उनकी खुद तीन बेटियां है और उन्हें समान अधिकार परिवार में दिए है, इसलिए हमें इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करते रहना चाहिए।
आईआईएम रोहतक के निदेशक पी. रमेशन ने कहा कि मौजूदा समय में लिंगानुपात गंभीर समस्या हो गई है। जिसके चलते लोगों में जागरूकता पैदा करने की जरूरत है। इस मैराथन के जरिए लोगाें को जागरूक किया गया है कि वे लड़के और लड़की में कोई अंतर न समझें।
संस्थान का यह प्रयास काफी सराहनीय : शर्मा
मैराथन के विजेताओं ने आईआईएम के इस प्रयास की सराहना की है। दस किलोमीटर के विजेता हरिशंकर शर्मा ने कहा कि संस्थान का यह प्रयास काफी सराहनीय है। उनकी राय में यह अच्छा प्रयास है और बाकी संस्थानों को भी इस प्रकार के आयोजनों के लिए आगे आना चाहिए। इससे समाज में जागरूकता पैदा होगी। पांच किलोमीटर की विजेता मीना ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन हर संस्थान में होने चाहिए ताकि लड़कियों के प्रति सोच में बदलाव लाया जा सके।
विज्ञापन
यह दौड़ एमडीयू परिसर स्थित आईआईएम से शुरू हुई। मैराथन का शुभारंभ पद्मश्री मिल्खा सिंह और आईआईएम के निदेशक प्रो. पी रमेशन ने हरी झंडी दिखाकर किया।
मिनी मैराथन में 10 किलोमीटर की दौड़ में हरिशंकर शर्मा प्रथम और देवेंद्र ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। महिलाओं की पांच किलोमीटर रेस में मीना प्रथम और ममता द्वितीय रही। पुरुष वर्ग की 5 किलोमीटर रेस में विशाल प्रथम और विनोद ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
विज्ञापन
बच्चों की 3 किलोमीटर दौड़ में सचिन प्रथम और शंकर ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। विजेता प्रतिभागियों को पद्मश्री अवार्ड मिल्खा सिंह ने पुरस्कार वितरित किए। यह दौड़ तीन वर्गों में कराई गई और तीन हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
विज्ञापन
मिल्खा सिंह ने बेटी बचाओ मैराथन आयोजित करने पर आईआईएम रोहतक को शुभकामनाएं दी और कहा कि बेटियां किसी पर बोझ नहीं होती। उनकी खुद तीन बेटियां है और उन्हें समान अधिकार परिवार में दिए है, इसलिए हमें इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करते रहना चाहिए।
आईआईएम रोहतक के निदेशक पी. रमेशन ने कहा कि मौजूदा समय में लिंगानुपात गंभीर समस्या हो गई है। जिसके चलते लोगों में जागरूकता पैदा करने की जरूरत है। इस मैराथन के जरिए लोगाें को जागरूक किया गया है कि वे लड़के और लड़की में कोई अंतर न समझें।
संस्थान का यह प्रयास काफी सराहनीय : शर्मा
मैराथन के विजेताओं ने आईआईएम के इस प्रयास की सराहना की है। दस किलोमीटर के विजेता हरिशंकर शर्मा ने कहा कि संस्थान का यह प्रयास काफी सराहनीय है। उनकी राय में यह अच्छा प्रयास है और बाकी संस्थानों को भी इस प्रकार के आयोजनों के लिए आगे आना चाहिए। इससे समाज में जागरूकता पैदा होगी। पांच किलोमीटर की विजेता मीना ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन हर संस्थान में होने चाहिए ताकि लड़कियों के प्रति सोच में बदलाव लाया जा सके।