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हुक्क-शराब छोड़कर सिंथेटिक नशे के शिकार हो रहे युवा
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राजीव गांधी खेल मैदान के शौचालय मे पड़ी इस्तेमाल की गई सिरिंज। अमर उजाला
महिला पहलवान पूजा के पति अजय नांदल की मौत ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि जिले का युवा किस दिशा में बढ़ रहा है। क्योंकि अंदेशा है कि अजय की मौत नशे की ओवरडोज से हुई है। हालांकि इसकी पुष्टि होना अभी बाकी है। स्थिति यह है कि अब बीड़ी-सिगरेट, हुक्का, शराब को पीछे छोड़कर युवा सिंथेटिक नशे का शिकार हो रहे हैं। इसके सबूत खेल स्टेडियमों, सार्वजनिक शौचालयों व एकांत में रह रहे हॉस्टलों व कमरों के बाहर-अंदर देखे जा सकते हैं। पुलिस प्रशासन, नारकोटिक्स विभाग लगातार इन पर कार्रवाई भी करता है, लेकिन नशा युवाओं को अपना शिकार बना रहा है।
जिले के अंदर नशा तस्करी बढ़ती जा रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2022 के पहले सात माह में औसतन हर दूसरे दिन एक नशा तस्करी का केस दर्ज हो रहा है। पुलिस विभाग के मुताबिक 15 मई तक जिले में एनडीपीएस एक्ट के तहत 70 केस दर्ज किए गए। जून में पुलिस ने नौ केस दर्ज कर दस आरोपियों से सात किलो 350 ग्राम गांजा, 24 ग्राम हेरोइन व एक किलो से ज्यादा चरस बरामद की। जुलाई में पिछले माह की अपेक्षा दर्ज केसों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई। रिकॉर्ड 26 एनडीपीएस एक्ट के मामले दर्ज कर पुलिस ने 31 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से 104 ग्राम गांजा, 723 ग्राम हेरोइन व एक किलो 480 ग्राम चरस मिली। अगस्त के आंकड़ों का पुलिस अभी अध्ययन कर रही है।
गौरतलब है कि एक साल पहले रोहतक पुलिस के एसआई संदीप की भी नशे की ओवर डोज के चलते मौत हो चुकी है। मामले में पुलिस ने पिता के बयान पर पुरानी सब्जी मंडी थाने के तत्कालीन मुंशी सहित पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था।
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पुलिस ने नशा तस्करी रोकने के लिए सख्त कदम उठा रहे हैं। यहीं कारण है कि ज्यादा से ज्यादा नशा तस्करी के मामले में उजागर हो रहे हैं। जो लोग हाथ नहीं आ रहे, उनके लिए भी पुलिस की टीमें तालमेल से काम कर रही हैं। उदय सिंह मीना, एसपी रोहतक
पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है सिंथेटिक नशे की लत
पीजीआईएमएस के स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के निदेशक कम सीईओ डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि आज नशा हर जगह आसानी से उपलब्ध है। पिछले कुछ वर्षों में इसकी लत बढ़ी है। समाज व अभिभावकों के साथ सरकार व सभी महकमों को मिलकर इस ओर सख्त कदम उठाते हुए कार्रवाई करने की जरूरत है। इसी से नशे की प्रवृत्ति से छुटकारा मिल सकता है। नशे की सप्लाई मजबूत चेन इसी से तोड़ी जा सकती है। इसके बाद ही नशे पर जीत दर्ज करना संभव है। राज्य व्यसन निर्भरता उपचार केंद्र में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। यहां सभी इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
15 मरीज नए आ रहे उपचार कराने
राज्य व्यसन निर्भरता उपचार केंद्र की ओपीडी की बात करें तो यहां करीबन 80 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से 15 नए मरीज होते हैं। इसमें लगभग सभी तरह का नशा करने वाले मरीज शामिल हैं। युवा वर्ग ज्यादा हैं। यही वर्ग नशे के सबसे करीब भी हैं। हैरानी की बात है कि नशा करने वालों में महिला वर्ग की भी संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। वह भी हार्ड नशे की ओर जा रही हैं। इसमें मध्यम व उच्च वर्ग से जुड़े लोग शामिल हैं।
1500 रुपये की एक डोज
ड्रग की डोज लेने वालों को 1500 रुपये की एक डोज पड़ती है। इसका उपचार करने वालों की मानें तो एक व्यक्ति तीन से पांच डोज प्रतिदिन लेता है। यही वजह है कि ड्रग की डोज लेने वालों को अधिक रुपयों की जरूरत होती है और इसके चक्कर में जुर्म की दलदल में फंस जाते हैं। क्योंकि एक बार लत लगने के बाद इससे निकल पाना आसान नहीं है। इसमें डॉक्टर के अलावा परिजनों, रिश्तेदारों के मोटिवेशन व उपचार की जरूरत होती है। समय पर यदि अस्पताल लाया जाए तो उसे बचाया जा सकता है।
शहर के आउटर एरिया में मिल जाता है नशा
शहर के आउटर एरिया में नशा आसानी से मिल जाता है। यही नहीं आन डिमांड डिलीवरी भी की जाती है। इसके लिए व्यक्ति को कीमत चुकानी पड़ती है।
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जिले के अंदर नशा तस्करी बढ़ती जा रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2022 के पहले सात माह में औसतन हर दूसरे दिन एक नशा तस्करी का केस दर्ज हो रहा है। पुलिस विभाग के मुताबिक 15 मई तक जिले में एनडीपीएस एक्ट के तहत 70 केस दर्ज किए गए। जून में पुलिस ने नौ केस दर्ज कर दस आरोपियों से सात किलो 350 ग्राम गांजा, 24 ग्राम हेरोइन व एक किलो से ज्यादा चरस बरामद की। जुलाई में पिछले माह की अपेक्षा दर्ज केसों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई। रिकॉर्ड 26 एनडीपीएस एक्ट के मामले दर्ज कर पुलिस ने 31 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से 104 ग्राम गांजा, 723 ग्राम हेरोइन व एक किलो 480 ग्राम चरस मिली। अगस्त के आंकड़ों का पुलिस अभी अध्ययन कर रही है।
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गौरतलब है कि एक साल पहले रोहतक पुलिस के एसआई संदीप की भी नशे की ओवर डोज के चलते मौत हो चुकी है। मामले में पुलिस ने पिता के बयान पर पुरानी सब्जी मंडी थाने के तत्कालीन मुंशी सहित पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था।
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पुलिस ने नशा तस्करी रोकने के लिए सख्त कदम उठा रहे हैं। यहीं कारण है कि ज्यादा से ज्यादा नशा तस्करी के मामले में उजागर हो रहे हैं। जो लोग हाथ नहीं आ रहे, उनके लिए भी पुलिस की टीमें तालमेल से काम कर रही हैं। उदय सिंह मीना, एसपी रोहतक
पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है सिंथेटिक नशे की लत
पीजीआईएमएस के स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के निदेशक कम सीईओ डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि आज नशा हर जगह आसानी से उपलब्ध है। पिछले कुछ वर्षों में इसकी लत बढ़ी है। समाज व अभिभावकों के साथ सरकार व सभी महकमों को मिलकर इस ओर सख्त कदम उठाते हुए कार्रवाई करने की जरूरत है। इसी से नशे की प्रवृत्ति से छुटकारा मिल सकता है। नशे की सप्लाई मजबूत चेन इसी से तोड़ी जा सकती है। इसके बाद ही नशे पर जीत दर्ज करना संभव है। राज्य व्यसन निर्भरता उपचार केंद्र में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। यहां सभी इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
15 मरीज नए आ रहे उपचार कराने
राज्य व्यसन निर्भरता उपचार केंद्र की ओपीडी की बात करें तो यहां करीबन 80 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से 15 नए मरीज होते हैं। इसमें लगभग सभी तरह का नशा करने वाले मरीज शामिल हैं। युवा वर्ग ज्यादा हैं। यही वर्ग नशे के सबसे करीब भी हैं। हैरानी की बात है कि नशा करने वालों में महिला वर्ग की भी संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। वह भी हार्ड नशे की ओर जा रही हैं। इसमें मध्यम व उच्च वर्ग से जुड़े लोग शामिल हैं।
1500 रुपये की एक डोज
ड्रग की डोज लेने वालों को 1500 रुपये की एक डोज पड़ती है। इसका उपचार करने वालों की मानें तो एक व्यक्ति तीन से पांच डोज प्रतिदिन लेता है। यही वजह है कि ड्रग की डोज लेने वालों को अधिक रुपयों की जरूरत होती है और इसके चक्कर में जुर्म की दलदल में फंस जाते हैं। क्योंकि एक बार लत लगने के बाद इससे निकल पाना आसान नहीं है। इसमें डॉक्टर के अलावा परिजनों, रिश्तेदारों के मोटिवेशन व उपचार की जरूरत होती है। समय पर यदि अस्पताल लाया जाए तो उसे बचाया जा सकता है।
शहर के आउटर एरिया में मिल जाता है नशा
शहर के आउटर एरिया में नशा आसानी से मिल जाता है। यही नहीं आन डिमांड डिलीवरी भी की जाती है। इसके लिए व्यक्ति को कीमत चुकानी पड़ती है।