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खेल मैदान से खिलाड़ी का शव निकलेगा तो कौन अपने बच्चे भेजेगा : भगवंत मान
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माई सिटी रिपोर्ट
रोहतक। खेल मैदान से खिलाड़ी का शव निकलेगा तो कौन अपने बच्चे खेलने भेजेगा। खेल मैदान से बच्चा लौटेगा या नहीं, अभिभावकों को यह डर नहीं होना चाहिए। इसके लिए व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए। असुरक्षित खेल सुविधाओं व मैदानों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यह कहना है पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का। वह वीरवार को लाखनमाजरा में राष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी हार्दिक राठी के परिवार से मिलने पहुंचे थे।
पंजाब के मुख्यमंत्री ने लाखनमाजरा में उस खेल मैदान का जायजा लेने भी पहुंचे जहां जर्जर पोल के नीचे दबने से हार्दिक की मौत हुई थी। बाद में पत्रकारों से बातचीत में मान बोले-मैं यहां राजनीति करने नहीं आया हूं। खेल मंत्री व खेल प्रेमी होने के नाते खिलाड़ी के शोकाकुल परिवार से मिलने आया हूं।
उन्होंने कहा कि असुरक्षित खेल सुविधाओं व मैदानों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पीएम मोदी और केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया लाखनमाजरा में हुई घटना पर संज्ञान लें। ऐसे कमजोर खेल ढांचे के दम पर क्या देश खेलों में विश्व गुरु बन पाएगा।
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हरियाणा में तीन दिन में दो राष्ट्रीय खिलाड़ियों की मैदान में मौत हो गई। क्या हरियाणा सरकार की यही खेल नीति है। गर्व से भाजपा सरकार अपनी खेल नीति का बखान करती है।
उन्होंने कहा कि घटना से पूरे देश के खिलाड़ी व उनके परिजन स्तब्ध हैं। कहा, अमेरिका में बॉस्केटबाल की सबसे बड़ी लीग होती है। वहां सात फीट तक डेढ़ क्विंटल वजनी पोल हैं। वहां कभी ऐसे पोल गिरने से घटना नहीं हुई। कहा, 2030 में देश राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा। क्या उससे पहले ऐसे खेल ढांचे के उदाहरण दुनिया के सामने पेश किए जाएंगे। खेल मंत्री पूरे देश के खेल ढांचे की जांच करवाकर उचित कदम उठाएं।
पंजाब में खिलाड़ी की हत्या के सवाल पर यह बोले मान
पंजाब में खिलाड़ी की हत्या के सवाल पर मान ने कहा कि वह विषय कानून व्यवस्था का था लेकिन यह तो सरेआम खेल ढांचे से जुड़ा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि सांसद कोटे से मिली राशि को क्यों नहीं खर्च किया गया, इसकी जांच होनी चाहिए। अगर समय पर खेल स्टेडियम में पैसे लग जाते तो आज हार्दिक जिंदा होता।
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पंजाब के मुख्यमंत्री ने केंद्र व राज्य सरकार के समक्ष रखी ये मांगें
- हार्दिक राठी के परिवार को सरकारी नौकरी दी जाए।
- परिवार को उचित आर्थिक सहायता मिले ताकि आगे गुजारे के लिए परेशानी न उठानी पड़े।
- गांव में हार्दिक राठी के नाम से खेल स्टेडियम बनाया जाए।
- स्टेडियमों की जांच कर मजबूत ढांचा विकसित किया जाए।
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रोहतक। खेल मैदान से खिलाड़ी का शव निकलेगा तो कौन अपने बच्चे खेलने भेजेगा। खेल मैदान से बच्चा लौटेगा या नहीं, अभिभावकों को यह डर नहीं होना चाहिए। इसके लिए व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए। असुरक्षित खेल सुविधाओं व मैदानों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यह कहना है पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का। वह वीरवार को लाखनमाजरा में राष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी हार्दिक राठी के परिवार से मिलने पहुंचे थे।
पंजाब के मुख्यमंत्री ने लाखनमाजरा में उस खेल मैदान का जायजा लेने भी पहुंचे जहां जर्जर पोल के नीचे दबने से हार्दिक की मौत हुई थी। बाद में पत्रकारों से बातचीत में मान बोले-मैं यहां राजनीति करने नहीं आया हूं। खेल मंत्री व खेल प्रेमी होने के नाते खिलाड़ी के शोकाकुल परिवार से मिलने आया हूं।
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उन्होंने कहा कि असुरक्षित खेल सुविधाओं व मैदानों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पीएम मोदी और केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया लाखनमाजरा में हुई घटना पर संज्ञान लें। ऐसे कमजोर खेल ढांचे के दम पर क्या देश खेलों में विश्व गुरु बन पाएगा।
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हरियाणा में तीन दिन में दो राष्ट्रीय खिलाड़ियों की मैदान में मौत हो गई। क्या हरियाणा सरकार की यही खेल नीति है। गर्व से भाजपा सरकार अपनी खेल नीति का बखान करती है।
उन्होंने कहा कि घटना से पूरे देश के खिलाड़ी व उनके परिजन स्तब्ध हैं। कहा, अमेरिका में बॉस्केटबाल की सबसे बड़ी लीग होती है। वहां सात फीट तक डेढ़ क्विंटल वजनी पोल हैं। वहां कभी ऐसे पोल गिरने से घटना नहीं हुई। कहा, 2030 में देश राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा। क्या उससे पहले ऐसे खेल ढांचे के उदाहरण दुनिया के सामने पेश किए जाएंगे। खेल मंत्री पूरे देश के खेल ढांचे की जांच करवाकर उचित कदम उठाएं।
पंजाब में खिलाड़ी की हत्या के सवाल पर यह बोले मान
पंजाब में खिलाड़ी की हत्या के सवाल पर मान ने कहा कि वह विषय कानून व्यवस्था का था लेकिन यह तो सरेआम खेल ढांचे से जुड़ा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि सांसद कोटे से मिली राशि को क्यों नहीं खर्च किया गया, इसकी जांच होनी चाहिए। अगर समय पर खेल स्टेडियम में पैसे लग जाते तो आज हार्दिक जिंदा होता।
पंजाब के मुख्यमंत्री ने केंद्र व राज्य सरकार के समक्ष रखी ये मांगें
- हार्दिक राठी के परिवार को सरकारी नौकरी दी जाए।
- परिवार को उचित आर्थिक सहायता मिले ताकि आगे गुजारे के लिए परेशानी न उठानी पड़े।
- गांव में हार्दिक राठी के नाम से खेल स्टेडियम बनाया जाए।
- स्टेडियमों की जांच कर मजबूत ढांचा विकसित किया जाए।