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सीएम ने रोहतक शहर में पहुंचकर दंगा पीड़ितों का दर्द बांटा
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 19 Apr 2016 02:24 AM IST
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दंगों की पीड़ा
- फोटो : अमर उजाला
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव के बाद मुख्यमंत्री सोमवार को पहली बार शहर के दंगा पीड़ितों से उनका हालचाल जानने पहुंचे। इस दौरान दंगा पीड़ितों ने सीएम के सामने अपना सब कुछ तबाह होने का दर्द सुनाया और दंगे के जख्म भी दिखाए। दंगे में हुए नुकसान का मुआवजा कम मिलने पर नाराजगी भी जताई। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका नुकसान देखकर मेरा भी दिल दुखी है। उन्होंने कहा कि यदि उनसे कम मुआवजे पर साइन कराए जा रहे हैं तो फार्म पर साइन न करें। अधिकारियों से मिलकर नुकसान का दोबारा आकलन करवा लें।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर दंगे के बाद वैसे तो दो बार जिले में आ चुके हैं, लेकिन पहली बार शहर के दंगा पीड़ितों के बीच पहुंचे। इससे पहले सीएम व्यापारियों से कैनाल रेस्ट हाउस में मिले थे। दूसरी बार महम और कलानौर पहुंचकर झज्जर चले गए थे। सोमवार को सीएम सुबह लगभग साढ़े दस बजे शहर पहुंच गए। सबसे पहले वह सुखपुरा चौक पर दंगा पीड़ितों के पास पहुंचे।
इस दौरान सुखपुरा चौक व्यापारी एसोसिएशन के प्रधान धर्मपाल सैनी ने कहा कि दंगे में क्षेत्र की 85 दुकानों को जला दिया गया। जिसमें उनका सबकुछ तबाह हो गया। सैनी ने भर्राई आवाज में कहा कि अब तो परिवार का गुजारा भी किसी तरह से कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 27 लाख रुपये का नुकसान हुआ। उसका क्लेम भी कर दिया, लेकिन मुआवजे के रूप में मिले केवल आठ लाख रुपये। इस पर सीएम खट्टर ने कहा कि जिस तरह से दंगा हुआ और लोगों का नुकसान हुआ है, उससे उनका भी दिल दुखी है।
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लेकिन यदि वह मुआवजे से संतुष्ट नहीं हैं तो फार्म पर साइन ना करें। यहां कुछ देर रुकने के बाद सीएम कैनाल रेस्ट हाउस चले गए। यहां काफी देर तक उद्यमियों और व्यापारियों के साथ बैठक करने के बाद सीएम डी-पार्क पहुंचे। यहां भी उन्होंने दंगा पीड़ित व्यापारियों से बातचीत की और उनकी जली हुई दुकानों को देखा। सीएम ने आर्चीज गैलरी की हालत को देखा और दुख जताया।
पीड़ितों ने सीएम के सामने कम मुआवजा मिलने की शिकायत की। इस पर सीएम ने कहा कि अगर उनको किसी तरह की परेशानी है तो वह दोबारा से आवेदन करके जांच करा सकते हैं। सीएम ने यह भी कहा कि कोई गलत तरह से मुआवजा नहीं ले, क्योंकि उससे उनको परेशानी हो सकती है।
सीएम के सुरक्षाकर्मियों ने पीड़ितों को धकियाया, हंगामा
सुखपुरा चौक पर जब मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्ट पहुंचे तो काफी भीड़ जमा हो गई। दंगा पीड़ित भी काफी संख्या में पहुंच गए। जब पीड़ितों ने सीएम से मिलने का प्रयास किया तो उनको सुरक्षा कर्मियों ने धक्का देकर पीछे धकेल दिया। इस पर पीड़ितों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा होता देख सीएम खुद ही रुक गए और पीड़ितों के पास पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनी। लोगों ने कहा कि उनके सुरक्षाकर्मी धक्का देकर पीछे हटा रहे थे, जबकि वह उनसे मिलने आये हैं। सीएम उनसे मिलने के बाद ही आगे गए।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर दंगे के बाद वैसे तो दो बार जिले में आ चुके हैं, लेकिन पहली बार शहर के दंगा पीड़ितों के बीच पहुंचे। इससे पहले सीएम व्यापारियों से कैनाल रेस्ट हाउस में मिले थे। दूसरी बार महम और कलानौर पहुंचकर झज्जर चले गए थे। सोमवार को सीएम सुबह लगभग साढ़े दस बजे शहर पहुंच गए। सबसे पहले वह सुखपुरा चौक पर दंगा पीड़ितों के पास पहुंचे।
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इस दौरान सुखपुरा चौक व्यापारी एसोसिएशन के प्रधान धर्मपाल सैनी ने कहा कि दंगे में क्षेत्र की 85 दुकानों को जला दिया गया। जिसमें उनका सबकुछ तबाह हो गया। सैनी ने भर्राई आवाज में कहा कि अब तो परिवार का गुजारा भी किसी तरह से कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 27 लाख रुपये का नुकसान हुआ। उसका क्लेम भी कर दिया, लेकिन मुआवजे के रूप में मिले केवल आठ लाख रुपये। इस पर सीएम खट्टर ने कहा कि जिस तरह से दंगा हुआ और लोगों का नुकसान हुआ है, उससे उनका भी दिल दुखी है।
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लेकिन यदि वह मुआवजे से संतुष्ट नहीं हैं तो फार्म पर साइन ना करें। यहां कुछ देर रुकने के बाद सीएम कैनाल रेस्ट हाउस चले गए। यहां काफी देर तक उद्यमियों और व्यापारियों के साथ बैठक करने के बाद सीएम डी-पार्क पहुंचे। यहां भी उन्होंने दंगा पीड़ित व्यापारियों से बातचीत की और उनकी जली हुई दुकानों को देखा। सीएम ने आर्चीज गैलरी की हालत को देखा और दुख जताया।
पीड़ितों ने सीएम के सामने कम मुआवजा मिलने की शिकायत की। इस पर सीएम ने कहा कि अगर उनको किसी तरह की परेशानी है तो वह दोबारा से आवेदन करके जांच करा सकते हैं। सीएम ने यह भी कहा कि कोई गलत तरह से मुआवजा नहीं ले, क्योंकि उससे उनको परेशानी हो सकती है।
सीएम के सुरक्षाकर्मियों ने पीड़ितों को धकियाया, हंगामा
सुखपुरा चौक पर जब मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्ट पहुंचे तो काफी भीड़ जमा हो गई। दंगा पीड़ित भी काफी संख्या में पहुंच गए। जब पीड़ितों ने सीएम से मिलने का प्रयास किया तो उनको सुरक्षा कर्मियों ने धक्का देकर पीछे धकेल दिया। इस पर पीड़ितों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा होता देख सीएम खुद ही रुक गए और पीड़ितों के पास पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनी। लोगों ने कहा कि उनके सुरक्षाकर्मी धक्का देकर पीछे हटा रहे थे, जबकि वह उनसे मिलने आये हैं। सीएम उनसे मिलने के बाद ही आगे गए।