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मरीज के लिए स्टेरॉयड की मात्रा तय करने पर होगा फोकस : डॉ. गठवाला

Mon, 21 Jun 2021 01:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 21 Jun 2021 01:00 AM IST
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The focus will be on deciding the dosage of steroids for the patient: Dr. Gathwala
पीजीआईएमएस का बाल रोग विभाग स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों-नर्सों को प्रशिक्षण देगा। इसमें पूरा ध्यान कोरोना संक्रमित बच्चों की स्थिति पहचानने एवं स्टेरॉयड व एंटीबॉयोटिक के गलत प्रयोग को रोकने पर रहेगा। कोरोना की दूसरी लहर में इसका बेहिसाब प्रयोग ही मरीजों के लिए नुकसानदायक बन गया। यह बात बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गीता गठवाला ने कही।
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डॉ. गठवाला ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के ज्यादा संक्रमित होने की आशंका है। प्रदेश सरकार हर स्तर पर समुचित उपचार की व्यवस्था कर रही है। बच्चों के डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पीजीआईएमएस में सोमवार से 36 नर्स और मंगलवार से पीएचसी-सीएचसी व सिविल अस्पताल के डॉक्टरों को प्रशिक्षण मिलेगा। डॉ. गीता गठवाला ने बताया कि प्रशिक्षण में बताया जाएगा कि डॉक्टर बच्चे की स्थिति को कैसे जानें। क्योंकि बच्चा पहले सीएचसी पर आता है, यहां जरूरी है कि मरीज की हालत खराब होने पर उसे तुरंत रेफर किया जाए। हर हाल में कोरोना उपचार की स्टैंडर्ड गाइड लाइन का पालन करना बताया जाएगा। क्योंकि कोरोना की दूसरी लहर में स्टेरॉयड व एंटीबायोटिक के बेधड़क प्रयोग से हुए नुकसान को हमें दोहराना नहीं है।
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लगातार हालत बिगड़ने पर ही देनी होगी स्टेरॉयड
डॉ. गीता गठवाला ने बताया कि बगैर लक्षण व कम लक्षण वाले मरीजों की तबियत खराब होने पर स्टेरॉयड इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। जब मरीज की हालत अधिक खराब हो तो स्टेरॉयड का प्रयोग किया जाता है। यह भी पांच से दस दिन के लिए होता है, यदि इसका अधिक प्रयोग हो तो यह घातक होता है।
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नर्सों को सिखाया जाएगा मरीज की देखभाल करना
नर्सों को सिखाया जाएगा कि मरीज की देखभाल कैसे करनी है। इसमें मरीज को कैनुला (ड्रिप की सुई) लगाना, ऑक्सीजन थेरेपी देना आदि के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। क्योंकि ऑक्सीजन थेरेपी में चूक खतरनाक साबित होती है।

कोरोना निगेटिव होने के बाद छह सप्ताह रखनी होगी निगरानी
कोरोना निगेटिव होने के बाद भी बच्चे पर दो से छह सप्ताह निगरानी रखनी होगी। इस दौरान बच्चों को सबसे ज्यादा मिस-सी (मल्टी इनफ्लेमेट्री सिंड्रोम इन चाइल्ड) होने का खतरा रहता है। 24 घंटे से ज्यादा बुखार, आंख लाल, उल्टी-दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर रेशे, धड़कन बढ़ना, सांस तेज होने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। परिजनों को चाहिए कि वह बच्चे की त्वचा, आंख, होंठ व जीभ की जांच करते रहें। बुखार, उल्टी-दस्त व पेट दर्द, त्वचा पर रेशे, चिड़चिड़ापन, धड़कन बढ़ना, सांस लेने में दिक्कत, आंखें लाल होना, होंठ-जीभ पर लालपन व सूजन, हाथ-पैर पर लालपन व सूजन, सिर दर्द मिस-सी के लक्षण हैं।
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