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हरियाणा की आग को उत्तर प्रदेश और दिल्ली से मिला सहारा

Sun, 21 Feb 2016 10:49 PM IST
ब्यूरो/ अंकित चौहान, रोहतक
ब्यूरो/ अंकित चौहान, रोहतक Updated Sun, 21 Feb 2016 10:49 PM IST
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jat reservation : up and delhi supporting stir

जाट आरक्षण आंदोलन की आग भले ही हरियाणा में लगी हो। लेकिन इस आग को उत्तर प्रदेश और दिल्ली से सहारा मिल रहा है। उत्तर प्रदेश और दिल्ली के जाट नेता भी लगातार हरियाणा में संपर्क बनाए हुए हैं। हालांकि वे जाट नेताओं और खापों के मुखियाओं से शांति कायम कराने के लिए कह रहे हैं, लेकिन जाट आरक्षण आंदोलन में गठजोड़ बनाकर ही हरियाणा और केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है। 

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जाटों के इस गठजोड़ के कारण ही उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक आरक्षण के लिए सड़कों पर आंदोलन शुरू हुआ है। इस आंदोलन में अन्य राज्य भी जुड़ सकते हैं।

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जाट आरक्षण की आग में हरियाणा जल रहा है। यह आग पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में पहुंचने के बाद वहां भी सड़क और रेल मार्ग जाम कर दिए गए हैं। वहीं, राजधानी दिल्ली में भी जाट सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं। तीनों राज्यों के जाट नेता एकजुट होते जा रहे हैं। वे एक-दूसरे से संपर्क बनाए हुए हैं। हालांकि वह जाट आरक्षण आंदोलन के नाम पर होने वाले उपद्रव को रोकने के साथ ही शांति की अपील कर रहे हैं।

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 इसके साथ ही, वह आरक्षण मिलने के बाद ही आंदोलन से पीछे हटने की बात भी कह रहे हैं। यही नहीं, अब अन्य राज्यों के अंदर भी जाट आरक्षण आंदोलन शुरू कराने की तैयारी हो रही है। इससे अन्य राज्यों के हालात भी खराब हो सकते हैं। इस रणनीति के पीछे कारण यह है कि जाट बिरादरी वाले सभी राज्यों को एकजुट करके केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा सके और सरकार जल्द इस पर अध्यादेश लेकर आए। लेकिन देखना होगा कि यह आग बढ़ने से पहले कोई हल निकलता है या नहीं। 


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यह आंदोलन तभी खत्म हो सकता है, जब मांग पूरी करने का आश्वासन नहीं बल्कि उसे माना जाए। इस मामले में हरियाणा की जगह केंद्र सरकार पूरी तरह आगे आए और जाट आरक्षण के लिए अध्यादेश लागू किया जाए। इस पर बजट सत्र में बिल लाया जाए। वहीं, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन बिल भी लाया जाए, जिसमें विसंगतियां दूर हो सकें।

यशपाल मलिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति।


जाट आरक्षण के लिए आंदोलन होना चाहिए, लेकिन इस आंदोलन का रुख मोड़ दिया गया है। जाट केवल आरक्षण चाहते हैं जो उपद्रव न चाहते हैं और वह न शामिल रहे हैं। असामाजिक तत्वों को इस आंदोलन से दूर किया जाएगा। 

आजाद सिंह जाटियान, महासचिव जाट महासभा।

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