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डॉक्टर ध्यान दें तो 30 फीसदी ऑक्सीजन बचाने की गुंजाइश

Sat, 26 Jun 2021 01:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jun 2021 01:30 AM IST
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If the doctor pays attention then there is a chance to save 30 percent oxygen
कोरोना की दूसरी लहर में आमजन को ही नहीं प्रदेश के सरकारी व निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों तथा सरकार को भी ऑक्सीजन की अहमियत का पता चल गया। ऑक्सीजन की किल्लत के कारणों को जांचने के लिए आईआईएम रोहतक ने ऑडिट किया तो सामने आया कि यदि डॉक्टर ध्यान दें तो 30 प्रतिशत ऑक्सीजन को बचाने की गुंजाइश है।
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आईआईएम (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट) ने अपने ऑडिट में कहा है कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की वेस्टेज को रोकना होगा। क्योंकि 30 प्रतिशत ऑक्सीजन यहां वेस्ट होती रहती है। ऑडिट टीम ने बताया कि यदि सिलिंडर की बजाय पाइप लाइन से ऑक्सीजन सप्लाई में दी जाए तो 30 प्रतिशत गैस बचेगी। इसके अलावा कोविड व नॉन कोविड एरिया में अलग सप्लाई होनी चाहिए। डॉक्टर को ध्यान देना चाहिए कि लो व हाई फ्लो ऑक्सीजन में मरीज की जरूरत के हिसाब से मात्रा का ध्यान रखा जाए। मरीज की जरूरत के हिसाब से ही ऑक्सीजन दी जाए। हाई फ्लो ऑक्सीजन उसी मरीज को दें, जिसकी उसे जरूरत हो। इसके अलावा ऑक्सीजन पर रहने वाले मरीजों की देखभाल करने के लिए स्टाफ होने चाहिए। मरीज व उसके तीमारदारों को ध्यान देना चाहिए कि 24 घंटे में मरीज खाना खाने, चाय पीने व शौच जाने जैसे कई कार्यों के लिए वह कम से कम चार घंटे के लिए मास्क हटाता है। इस दौरान ऑक्सीजन सप्लाई चलती रहती है। यदि इसे बंद किया जाए तो ऑक्सीजन की बर्बादी को रोका जा सकता है।
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आईआईएम ने सुझाए उपाय
- आइसोलेशन वार्ड के लिए फ्लैट को प्रयोग में ला सकते हैं। यहां 500 बेड लग सकते हैं।
- ब्लॉक पंचायत एरिया व बैंक में 80 हजार कंसंट्रेटर का प्रयोग किया जा सकता है।
सवाल : प्रशासन आइसोलेशन वार्ड तैयार कर सिलिंडर व ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का इंतजाम कर सकता है। लेकिन यहां की मॉनीटरिंग करने के लिए डॉक्टर व स्टाफ की तैनाती जरूरी है। कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग के लिए स्टाफ की किल्लत सबसे बड़ी समस्या बनती है।
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हमने ऑडिट रिपोर्ट सरकार को भेज दी है, यह कोरोना की दूसरी लहर में तैयार की गई थी। उस समय ऑक्सीजन की अधिक किल्लत चल रही थी। कोरोना काल में ऑक्सीजन का सही तरीके से प्रयोग किया जाना जरूरी है। सही प्रयोग से हम 30 से 40 प्रतिशत ऑक्सीजन वेस्ट होने से बचा सकते हैं। यही ऑक्सीजन कई लोगों की जान बचा सकती है।

- प्रोफेसर धीरज शर्मा, निदेशक, आईआईएम रोहतक
कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की हम तैयारी कर रहे हैं। मरीजों को ऑक्सीजन की कमी न हो, इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। दूसरी लहर में भी जरूरत के हिसाब से सभी को ऑक्सीजन उपलब्ध कराई गई है। ऑक्सीजन वितरण के लिए सीनियर अधिकारियों की तैनाती की गई थी।
- कैप्टन मनोज कुमार, उपायुक्त
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