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Rohtak News: सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए पहले ही एचपीवी वैक्सीन जरूरी
Sun, 09 Nov 2025 11:28 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 09 Nov 2025 11:28 PM IST
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27...पीजीआई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विजेता प्रतिभागियों के साथ डीन अशोक चौहान, स्त्री रोग
- फोटो : बाईपास किनारे अधजला शव मिलने के बाद घटनास्थल पर जानकारी करते एसएसपी सौरभ दीक्षित। संवाद
रोहतक। राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस पर पीजीआईएमएस के एलटी-1 में विकिरण ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और प्रसूति और स्त्री रोग विभाग की ओर से बहु विषयक सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कैंसर बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन को लेकर चर्चा की गई।
पीजीआई के स्त्री रोग व प्रसूति विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा दहिया ने बताया कि एचपीवी वायरस ब्रेस्ट कैंसर के बाद भारतीय महिलाओं को होने वाला सामान्य कैंसर है। वायरस संक्रमित व्यक्ति से यौन संबंध बनाने पर इसके फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचपीवी) से सर्वाइकल कैंसर, योनि कैंसर, एनल कैंसर, वल्वर कैंसर आदि कैंसर भी होने का खतरा रहता है।
इसको 9 से 14 वर्ष की आयु के व्यक्ति को दो खुराकें छह से बारह महीने के अंतराल पर दी जा सकती है। यदि 15 से 45 वर्ष की आयु के व्यक्तियों की तरफ से किशोरावस्था में इसे पूरा न किया हो तो, 0, 2, और 6 महीने पर तीन खुराक की शृंखला बाद में भी दी जा सकती है। पुरुष भी यह वैक्सीन ले सकते हैं।
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यह वैक्सीन पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए है। वैक्सीन तब सबसे प्रभावी होती है जब इसे व्यक्ति के यौन रूप से सक्रिय होने से पहले ली जाए। बाद में भी दिए जाने पर भी यह सुरक्षा प्रदान कर सकती है। पीजीआई में यह उपलब्ध नहीं है।
भारत में पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु आदि राज्यों में इसको प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। पीजीआई में इसकी व्यवस्था नहीं है लेकिन बाजार से वैक्सीन लाकर डॉक्टरों के परामर्श पर लगवा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि नौ से 14 उम्र के बीच में प्राथमिक इलाज के तौर पर लेकर कैंसर से बचाव किया जा सकता है। इसको 26 से 45 वर्ष के व्यक्तियों को भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार दिया जा सकता है। इसको मार्केट से खरीदा जा सकता है।
इस मौके पर पीजीआई डीन डॉ. अशोक चौहान और ओंकोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव प्रसाद, डॉ. राजेंद्र कुमार, डॉ. अनादि पचौरी, डॉ. राकेश, डॉ. राजीव अत्री और अन्य उपस्थित रहे।
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पीजीआई के स्त्री रोग व प्रसूति विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा दहिया ने बताया कि एचपीवी वायरस ब्रेस्ट कैंसर के बाद भारतीय महिलाओं को होने वाला सामान्य कैंसर है। वायरस संक्रमित व्यक्ति से यौन संबंध बनाने पर इसके फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचपीवी) से सर्वाइकल कैंसर, योनि कैंसर, एनल कैंसर, वल्वर कैंसर आदि कैंसर भी होने का खतरा रहता है।
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इसको 9 से 14 वर्ष की आयु के व्यक्ति को दो खुराकें छह से बारह महीने के अंतराल पर दी जा सकती है। यदि 15 से 45 वर्ष की आयु के व्यक्तियों की तरफ से किशोरावस्था में इसे पूरा न किया हो तो, 0, 2, और 6 महीने पर तीन खुराक की शृंखला बाद में भी दी जा सकती है। पुरुष भी यह वैक्सीन ले सकते हैं।
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यह वैक्सीन पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए है। वैक्सीन तब सबसे प्रभावी होती है जब इसे व्यक्ति के यौन रूप से सक्रिय होने से पहले ली जाए। बाद में भी दिए जाने पर भी यह सुरक्षा प्रदान कर सकती है। पीजीआई में यह उपलब्ध नहीं है।
भारत में पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु आदि राज्यों में इसको प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। पीजीआई में इसकी व्यवस्था नहीं है लेकिन बाजार से वैक्सीन लाकर डॉक्टरों के परामर्श पर लगवा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि नौ से 14 उम्र के बीच में प्राथमिक इलाज के तौर पर लेकर कैंसर से बचाव किया जा सकता है। इसको 26 से 45 वर्ष के व्यक्तियों को भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार दिया जा सकता है। इसको मार्केट से खरीदा जा सकता है।
इस मौके पर पीजीआई डीन डॉ. अशोक चौहान और ओंकोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव प्रसाद, डॉ. राजेंद्र कुमार, डॉ. अनादि पचौरी, डॉ. राकेश, डॉ. राजीव अत्री और अन्य उपस्थित रहे।

27...पीजीआई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विजेता प्रतिभागियों के साथ डीन अशोक चौहान, स्त्री रोग- फोटो : बाईपास किनारे अधजला शव मिलने के बाद घटनास्थल पर जानकारी करते एसएसपी सौरभ दीक्षित। संवाद