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एमए मासकॉम करने से पहले ही कर ली पीएचडी
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इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन (इनसो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप देशवाल ने एमडीयू के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रो. राजबीर ने एमए करने से पहले ही पीएचडी कर ली। वह और भी फर्जीवाड़े में शामिल हैं। सीएम मनोहर लाल तुरंत उन्हें पद से हटाएं और पर्चा दर्ज करवाएं।
स्टूडेंट्स एक्टिविटी सेंटर में मीडिया से बात करते हुए देशवाल ने आरोपों के संबंध में दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। देशवाल ने प्रो. राजबीर सिंह का एक सत्यापित बायोडाटा दिखाया। इसमें लिखा है कि प्रो. राजबीर को 1999 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री अवॉर्ड की गई, जिसका विषय रोल ऑफ मीडिया इन एजुकेटिंग रूरल मासेज - अ स्टडी ऑफ प्रोहिबिशन इन हरियाणा था। वहीं, उसी बायोडाटा में लिखा है कि प्रो. राजबीर ने वर्ष 2000 में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से मासकॉम में मास्टर्स डिग्री हासिल की। देशवाल ने कहा कि प्रो. राजबीर ने 2007 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया था। उसके लिए उनके पास 1995 से वह विषय पढ़ाने का अनुभव होना चाहिए था। पर उन्होंने मासकॉम में मास्टर्स वर्ष 2000 में किया था। देशवाल ने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि प्रो. राजबीर ने 1999 में जिस विषय में पीएचडी की, क्या उसी विषय में मास्टर्स थी, क्या नेट पास किया था। वह किस विषय में प्रोफेसर थे, उससे पहले असिस्टेंट या एसोसिएट प्रोफेसर किस शिक्षण संस्थान में रहे। देशवाल ने कहा कि प्रो. राजबीर 1990 से 2000 तक हरियाणा सरकार में डीपीआरओ और उसके बाद डिप्टी डायरेक्टर के पद पर रहे। इस दौरान वह गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय हिसार में कक्षाएं कैसे ले रहे थे। उन्होंने डीपीआरओ रहते हुए किन नियमों के आधार पर शिक्षण का अनुभव प्रमाणपत्र प्राप्त किया। क्या उन्हें पढ़ाने के बदले कोई वेतन मिला था। देशवाल ने कहा कि वर्ष 2007 में जिन लोगों को भी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में बतौर प्रोफेसर नियुक्त किया गया था, उन सबकी जांच की जाए। उन्होंने मांग की कि सीएम तुरंत कुलपति को हटाएं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला नहीं होने देंगे
प्रदीप देशवाल ने कहा कि हरियाणा सरकार ने हाल ही में नोटिफिकेशन जारी किया। उसके तहत अब विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां सरकार एचएसएससी और एचपीएससी के माध्यम से करेगी। यह विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला है। इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर सरकार ने तुरंत आदेश वापस न लिया तो सभी विश्वविद्यालयों में आंदोलन छेड़ा जाएगा। किसी भी जन प्रतिनिधि को विश्वविद्यालयों में दाखिल नहीं होने देंगे।
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डीएसडब्ल्यू से हुई बहस
इनसो नेता प्रदीप देशवाल और उनके समर्थक प्रेस कांफ्रेंस के लिए स्टूडेंट्स एक्टिविटी सेंटर पहुंचे तो कॉमन रूम में ताला लगा था। पूछने पर बताया गया कि आज छुट्टी है। उन्होंने स्टाफ से कहा कि कॉमन रूम खोलो या किसी आदेश की प्रति लाकर दो। काफी देर तक यह चलता रहा फिर डीन छात्र कल्याण प्रो. राजकुमार वहां आ गए तो देशवाल की उनसे बहस शुरू हो गई। देशवाल ने कहा कि मैं यहां का छात्र हूं, मुझे पढ़ना है कॉमन रूम खोलें। प्रो. राजकुमार ने कहा कि पढ़ने के लिए लाइब्रेरी 24 घंटे खुली है, वहां जाएं। देशवाल अड़े रहे तो प्रो. राजकुमार ने कहा कि अगर प्रेस कांफ्रेंस के लिए कोई अनुमति है तो वह दिखाएं वरना विश्वविद्यालय की गाइडलाइन के अनुसार वह प्रेस कांफ्रेंस के लिए कॉमन रूम नहीं खोलेंगे। फिर इनसो नेताओं ने बाहर ही प्रेस कांफ्रेेंस की।
यह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में प्रो. राजबीर सिंह की नियुक्ति का मामला है। जोकि पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए इस पर एमडीयू की ओर से कोई भी अधिकारिक टिप्पणी नहीं की जा सकती है।
- प्रवक्ता, एमडीयू
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स्टूडेंट्स एक्टिविटी सेंटर में मीडिया से बात करते हुए देशवाल ने आरोपों के संबंध में दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। देशवाल ने प्रो. राजबीर सिंह का एक सत्यापित बायोडाटा दिखाया। इसमें लिखा है कि प्रो. राजबीर को 1999 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री अवॉर्ड की गई, जिसका विषय रोल ऑफ मीडिया इन एजुकेटिंग रूरल मासेज - अ स्टडी ऑफ प्रोहिबिशन इन हरियाणा था। वहीं, उसी बायोडाटा में लिखा है कि प्रो. राजबीर ने वर्ष 2000 में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से मासकॉम में मास्टर्स डिग्री हासिल की। देशवाल ने कहा कि प्रो. राजबीर ने 2007 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया था। उसके लिए उनके पास 1995 से वह विषय पढ़ाने का अनुभव होना चाहिए था। पर उन्होंने मासकॉम में मास्टर्स वर्ष 2000 में किया था। देशवाल ने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि प्रो. राजबीर ने 1999 में जिस विषय में पीएचडी की, क्या उसी विषय में मास्टर्स थी, क्या नेट पास किया था। वह किस विषय में प्रोफेसर थे, उससे पहले असिस्टेंट या एसोसिएट प्रोफेसर किस शिक्षण संस्थान में रहे। देशवाल ने कहा कि प्रो. राजबीर 1990 से 2000 तक हरियाणा सरकार में डीपीआरओ और उसके बाद डिप्टी डायरेक्टर के पद पर रहे। इस दौरान वह गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय हिसार में कक्षाएं कैसे ले रहे थे। उन्होंने डीपीआरओ रहते हुए किन नियमों के आधार पर शिक्षण का अनुभव प्रमाणपत्र प्राप्त किया। क्या उन्हें पढ़ाने के बदले कोई वेतन मिला था। देशवाल ने कहा कि वर्ष 2007 में जिन लोगों को भी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में बतौर प्रोफेसर नियुक्त किया गया था, उन सबकी जांच की जाए। उन्होंने मांग की कि सीएम तुरंत कुलपति को हटाएं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
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विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला नहीं होने देंगे
प्रदीप देशवाल ने कहा कि हरियाणा सरकार ने हाल ही में नोटिफिकेशन जारी किया। उसके तहत अब विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां सरकार एचएसएससी और एचपीएससी के माध्यम से करेगी। यह विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला है। इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर सरकार ने तुरंत आदेश वापस न लिया तो सभी विश्वविद्यालयों में आंदोलन छेड़ा जाएगा। किसी भी जन प्रतिनिधि को विश्वविद्यालयों में दाखिल नहीं होने देंगे।
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डीएसडब्ल्यू से हुई बहस
इनसो नेता प्रदीप देशवाल और उनके समर्थक प्रेस कांफ्रेंस के लिए स्टूडेंट्स एक्टिविटी सेंटर पहुंचे तो कॉमन रूम में ताला लगा था। पूछने पर बताया गया कि आज छुट्टी है। उन्होंने स्टाफ से कहा कि कॉमन रूम खोलो या किसी आदेश की प्रति लाकर दो। काफी देर तक यह चलता रहा फिर डीन छात्र कल्याण प्रो. राजकुमार वहां आ गए तो देशवाल की उनसे बहस शुरू हो गई। देशवाल ने कहा कि मैं यहां का छात्र हूं, मुझे पढ़ना है कॉमन रूम खोलें। प्रो. राजकुमार ने कहा कि पढ़ने के लिए लाइब्रेरी 24 घंटे खुली है, वहां जाएं। देशवाल अड़े रहे तो प्रो. राजकुमार ने कहा कि अगर प्रेस कांफ्रेंस के लिए कोई अनुमति है तो वह दिखाएं वरना विश्वविद्यालय की गाइडलाइन के अनुसार वह प्रेस कांफ्रेंस के लिए कॉमन रूम नहीं खोलेंगे। फिर इनसो नेताओं ने बाहर ही प्रेस कांफ्रेेंस की।
यह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में प्रो. राजबीर सिंह की नियुक्ति का मामला है। जोकि पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए इस पर एमडीयू की ओर से कोई भी अधिकारिक टिप्पणी नहीं की जा सकती है।
- प्रवक्ता, एमडीयू