किसान आंदोलन के समर्थन में उतरीं खाप पंचायतें, आज हरियाणा से करेंगी दिल्ली कूच
पहले मैं सांगवान खाप का प्रधान हूं। म्हारे लिए भाईचारा पहले है, राजनीति बाद में। यहां पूरे हरियाणा की 30 से ज्यादा खापें इकट्ठा हुई। सभी ने फैसला लिया है कि सोमवार को अपनी-अपनी खापों को एकत्रित कर दिल्ली की ओर कूच करेंगे। कूच करने से पहले एक बार मीटिंग होगी।
हरियाणा व दिल्ली की खापें तन-मन-धन से किसानों के साथ हैं। आंदोलनरत किसान जितना भी मदद चाहेंगे, दी जाएगी। रविवार को जाट भवन में हुई खाप पंचायतों की मीटिंग में पहुंचे सांगवान खाप के प्रधान एवं दादरी से विधायक सोमबीर सांगवान ने यह बात कही। वे विभिन्न खाप प्रतिनिधियों की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
विधायक ने कहा कि मैं सरकार का हिस्सा हूं। अच्छे काम के लिए अपना समर्थन दिया है। समाज का नुकसान होगा तो राजनीति छोड़कर पहले खाप का प्रधान हूं। पहले खाप की जिम्मेदारी निभाऊंगा। विपक्ष को तो मुद्दा चाहिए। उन्हें बोलने का मौका नहीं देना चाहिए।
कृषि कानून में कमी है तो सरकार को उसे तुरंत दूर करना चाहिए। खापें समाज का हिस्सा हैं। समाज के लिए बनी हैं। समाज हित में ही काम करती हैं। अनगिनत लोगों ने अपना जीवन समाज सेवा में लगाया हुआ है।
उन्होंने बताया कि खापों ने किसान आंदोलन को समर्थन देने का निर्णय लिया है। सोमवार को सरकार को अहसास हो जाएगा कि हरियाणा के किसान भी आंदोलन में शामिल हैं। अपने हक के लिए सभी दिल्ली कूच करेंगे। वहां आंदोलनरत किसानों की हर संभव मदद की जाएगी।
सरकार भी किसानों को उनका जायज हक दे। जब इतना विरोध हो रहा है तो सरकार को भी इन कृषि कानूनों पर पुनर्विचार करना चाहिए। इसके बाद किसान हित में सही व बेहतर फैसला लिया। किसी भी सरकार ने अब तक किसानों का भला नहीं चाहा है। अब समय है। इसीलिए किसान सड़कों पर उतरे हैं।
किसान व देश को बचाने के लिए काफी सुधार की संभावनाएं हैं। इसलिए कृषि कानूनों पर पुनर्विचार किया जाए। वहीं, पालम 360 के प्रधान रामकरण सोलंकी ने कहा कि किसानों पर मुकदमे नहीं होने चाहिए। सोमवार से खापें दिल्ली सीमाओं पर परेशान लोगों को राहत पहुंचाएगी।
उन्हें शांति से आंदोलन चलाने की भी अपील करेंगे। उन्हें सड़क से हटाने का भी प्रयास करेंगे। इसके लिए उन्हें समझाया जाएगा। किसान देश का अन्नदाता है। इसके बावजूद इनके खिलाफ कानून बनाया गया है। यह गलत है। किसान वर्ग के साथ ज्यादती नहीं होनी चाहिए। जाट भवन में 30 से ज्यादा खापें पहुंची हैं। बैठक के उद्देश्य को सराहते हुए सभी ने अपने स्तर पर आंदोलन को समर्थन देंगे।