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एमडीयू के डिस्टेंस सेंटर की मान्यता पर इस बार भी संकट
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Mon, 09 May 2016 02:48 AM IST
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एजुकेश्ान
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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के डिस्टेंस एजुकेशन की मान्यता पर इस बार भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सरकार की अनदेखी के चलते एक साल बाद भी डिस्टेंस सेंटर में नियमित शिक्षकों की भर्ती नहीं हो सकी, जबकि यूजीसी ने पिछले साल सख्त हिदायत दी थी कि बिना नियमित शिक्षकों के मान्यता नहीं दी जा सकती है। ऐसे में अगले सत्र के लिए एमडीयू के डिस्टेंस सेंटर की मान्यता खतरे में पड़ सकती है।
सत्र 2012-13 में एमडीयू को डिस्टेंस एजुकेशन के कोर्सों की मान्यता मिली थी, जो तीन साल के लिए मान्य थी। उस समय यूजीसी ने मानक जारी किए थे कि डिस्टेंस एजुकेशन के कोर्स कराने के लिए विषय के अनुसार नियमित शिक्षक होने चाहिए। लेकिन एमडीयू में तभी से डिपार्टमेंट के शिक्षक ही डिस्टेंस के कोर्स करा रहे हैं। साल 2015-16 की मान्यता के लिए भी एमडीयू को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी थी। एडमिशन के नजदीक पहुंचने के बाद ही एमडीयू को मान्यता दी गई थी। इस साल जुलाई माह से 2016-17 का सत्र शुरू हो जाएगा, जिसके लिए एमडीयू को फिर से यूजीसी से मान्यता लेनी होगी, लेकिन एमडीयू की स्थिति पुराने वाली ही है। एक भी नियमित शिक्षक की भर्ती नहीं हो सकी है। जबकि पिछले वर्ष यूजीसी ने स्पष्ट कर दिया था कि अब नियमित शिक्षक होने पर ही मान्यता मिलेगी। ऐसे में एमडीयू को अगले सत्र के लिए बिना स्थायी शिक्षकों के मान्यता मिलती है या नहीं, यह तो आने वाले दिनों में पता चलेगा, लेकिन यदि मान्यता नहीं मिलती है तो लाखों छात्रों के भविष्य पर ग्रहण लग सकता है।
निकाल चुकी हैं पोस्ट, नहीं मिल रही सरकार की अनुमति
डिस्टेंस एजुकेशन में नियमित शिक्षकों की भर्ती के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ईसी की मीटिंग में पोस्ट भी निकाल चुका है। साल 2013 से अब तक कई बार सरकार को पत्र भी लिखे जा चुके हैं, लेकिन सरकार की तरफ से नियमित शिक्षकों की भर्ती के लिए अनुमति नहीं मिल रही है।
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इन कोर्सों की है मान्यता, लगभग 70 हजार विद्यार्थी
एमडीयू के डिस्टेंस एजुकेशन में अंग्रेजी, हिंदी, राजनीति विज्ञान, संस्कृत, लोक प्रशासन, इतिहास, प्रबंधन, लाइब्रेरी साइंस, गणित, कामर्स, ज्योग्राफी और कंप्यूटर साइंस समेत अन्य कोर्सों की मान्यता है। इस साल लगभग 70 हजार विद्यार्थियों ने एडमिशन लिया है।
नियमित शिक्षकों के लिए सरकार की अनुमति चाहिए, जिसके बाद ही शिक्षकों की भर्ती होगी। फिलहाल अगले सत्र की मान्यता के लिए यूजीसी ने प्रपोजल मांगे थे, जिसे भेज दिया गया है।
- प्रो. कुलदीप छिकारा, डायरेक्टर डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर एमडीयू
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सत्र 2012-13 में एमडीयू को डिस्टेंस एजुकेशन के कोर्सों की मान्यता मिली थी, जो तीन साल के लिए मान्य थी। उस समय यूजीसी ने मानक जारी किए थे कि डिस्टेंस एजुकेशन के कोर्स कराने के लिए विषय के अनुसार नियमित शिक्षक होने चाहिए। लेकिन एमडीयू में तभी से डिपार्टमेंट के शिक्षक ही डिस्टेंस के कोर्स करा रहे हैं। साल 2015-16 की मान्यता के लिए भी एमडीयू को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी थी। एडमिशन के नजदीक पहुंचने के बाद ही एमडीयू को मान्यता दी गई थी। इस साल जुलाई माह से 2016-17 का सत्र शुरू हो जाएगा, जिसके लिए एमडीयू को फिर से यूजीसी से मान्यता लेनी होगी, लेकिन एमडीयू की स्थिति पुराने वाली ही है। एक भी नियमित शिक्षक की भर्ती नहीं हो सकी है। जबकि पिछले वर्ष यूजीसी ने स्पष्ट कर दिया था कि अब नियमित शिक्षक होने पर ही मान्यता मिलेगी। ऐसे में एमडीयू को अगले सत्र के लिए बिना स्थायी शिक्षकों के मान्यता मिलती है या नहीं, यह तो आने वाले दिनों में पता चलेगा, लेकिन यदि मान्यता नहीं मिलती है तो लाखों छात्रों के भविष्य पर ग्रहण लग सकता है।
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निकाल चुकी हैं पोस्ट, नहीं मिल रही सरकार की अनुमति
डिस्टेंस एजुकेशन में नियमित शिक्षकों की भर्ती के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ईसी की मीटिंग में पोस्ट भी निकाल चुका है। साल 2013 से अब तक कई बार सरकार को पत्र भी लिखे जा चुके हैं, लेकिन सरकार की तरफ से नियमित शिक्षकों की भर्ती के लिए अनुमति नहीं मिल रही है।
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इन कोर्सों की है मान्यता, लगभग 70 हजार विद्यार्थी
एमडीयू के डिस्टेंस एजुकेशन में अंग्रेजी, हिंदी, राजनीति विज्ञान, संस्कृत, लोक प्रशासन, इतिहास, प्रबंधन, लाइब्रेरी साइंस, गणित, कामर्स, ज्योग्राफी और कंप्यूटर साइंस समेत अन्य कोर्सों की मान्यता है। इस साल लगभग 70 हजार विद्यार्थियों ने एडमिशन लिया है।
नियमित शिक्षकों के लिए सरकार की अनुमति चाहिए, जिसके बाद ही शिक्षकों की भर्ती होगी। फिलहाल अगले सत्र की मान्यता के लिए यूजीसी ने प्रपोजल मांगे थे, जिसे भेज दिया गया है।
- प्रो. कुलदीप छिकारा, डायरेक्टर डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर एमडीयू