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निरंतर शोध और क्षमता निर्माण समय की मांग : प्रो. राजन
Thu, 25 Sep 2025 05:49 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 25 Sep 2025 05:49 AM IST
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06 एमडीयू के यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र द्वारा टूल्स एंड टेक्निक टू अचीव रिसर्च
रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के यूजीसी मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की ओर से टूल्स एंड टेक्निक टू अचीव रिसर्च आउटपुट टू द नेक्स्ट लेवल विषय पर सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आरंभ हुआ।
प्रो. एके राजन ने कहा कि निरंतर शोध और क्षमता निर्माण समय की मांग है। शैक्षणिक संस्थान मजबूत शोध पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करें तो भारत वैश्विक स्तर पर शोध और नवाचार में अग्रणी बन सकता है।
कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा के पूर्व कुलपति प्रो. आरसी. कुहाड़ और प्रो. एके राजन निदेशक, सेंटर फॉर करिकुलम डिजाइन एंड डेवलपमेंट ने किया। पूर्व कुलपति ने शोध पद्धतियों और नवाचार पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि शोध कार्य तभी सार्थक है जब वह समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं से जुड़ा हो।
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यूजीसी-एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. मुनीष गर्ग ने बताया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की आवश्यकता है। वहीं डॉ. केके शर्मा ने शोध उत्पादकता को अगले स्तर तक ले जाने के विभिन्न उपायों की चर्चा की। मंच संचालन डॉ. माधुरी हुड्डा ने किया।
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प्रो. एके राजन ने कहा कि निरंतर शोध और क्षमता निर्माण समय की मांग है। शैक्षणिक संस्थान मजबूत शोध पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करें तो भारत वैश्विक स्तर पर शोध और नवाचार में अग्रणी बन सकता है।
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कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा के पूर्व कुलपति प्रो. आरसी. कुहाड़ और प्रो. एके राजन निदेशक, सेंटर फॉर करिकुलम डिजाइन एंड डेवलपमेंट ने किया। पूर्व कुलपति ने शोध पद्धतियों और नवाचार पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि शोध कार्य तभी सार्थक है जब वह समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं से जुड़ा हो।
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यूजीसी-एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. मुनीष गर्ग ने बताया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की आवश्यकता है। वहीं डॉ. केके शर्मा ने शोध उत्पादकता को अगले स्तर तक ले जाने के विभिन्न उपायों की चर्चा की। मंच संचालन डॉ. माधुरी हुड्डा ने किया।