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Rohtak News: अस्पताल पहुंचाने से पहले दम तोड़ रहीं एंबुलेंस
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21jjrp23- सिविल अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस। संवाद
झज्जर। स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस सेवा फिलहाल चरमरा गई है। कहीं रोहतक मरीज ले जाते समय रास्ते में एंबुलेंस खराब हो रही है, तो कहीं कई एंबुलेंस एजेंसियों में कई माह से खड़ी हैं।
इसका कारण मुख्यालय की तरफ से एंबुलेंस ठीक करवाने के लिए बजट की मंजूरी नहीं मिलना है। ऐसे में अलग-अलग एजेंसियों में ठीक होने गई 8 एंबुलेंस कई माह से वहीं खड़ी हैं। फिलहाल तीन एंबुलेंस के बजट को मंजूरी मिलने पर उन्हें ऑन रोड कर दिया गया है, जबकि बाकी के लिए बजट का इंतजार है।
ऐसे में पूरे जिले में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आसपास की सीएचसी और पीएचसी में तैनात एंबुलेंस को बुलाकर काम चलाया जा रहा है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास कुल 24 एंबुलेंस हैं। इनमें से 11 एंबुलेंस ऑफ रोड थीं, जिनमें से तीन को मंगलवार को ऑन रोड किया गया है। बाकी बची 8 एंबुलेंस अब भी ऑफ रोड हैं। इसका मुख्य कारण मुख्यालय से बजट की मंजूरी नहीं मिलना है।
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ये एंबुलेंस कई माह से खराब पड़ी हैं। इन्हें ठीक करवाने के लिए एजेंसियों में भेजा गया था, लेकिन मुख्यालय की तरफ से बजट की मंजूरी नहीं मिलने के कारण अब तक वहीं खड़ी हैं। यहां बता दें कि जिस एंबुलेंस को ठीक करवाने का खर्च 50 हजार रुपये से ज्यादा होता है, उसके लिए मुख्यालय से बजट की मंजूरी लेनी पड़ती है।
जिले की 11 एंबुलेंस में से 8 के लिए अभी भी बजट का इंतजार है।
पिछले सप्ताह बस अड्डे के पास खराब हो गई थी एंबुलेंस: पिछले सप्ताह झज्जर सरकारी अस्पताल से रोहतक जाते समय एक सरकारी एंबुलेंस नए बस अड्डे के पास खराब हो गई थी। मौके पर मैकेनिक को भी बुलाया गया था, लेकिन वह ठीक नहीं हुई।
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इसका कारण मुख्यालय की तरफ से एंबुलेंस ठीक करवाने के लिए बजट की मंजूरी नहीं मिलना है। ऐसे में अलग-अलग एजेंसियों में ठीक होने गई 8 एंबुलेंस कई माह से वहीं खड़ी हैं। फिलहाल तीन एंबुलेंस के बजट को मंजूरी मिलने पर उन्हें ऑन रोड कर दिया गया है, जबकि बाकी के लिए बजट का इंतजार है।
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ऐसे में पूरे जिले में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आसपास की सीएचसी और पीएचसी में तैनात एंबुलेंस को बुलाकर काम चलाया जा रहा है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास कुल 24 एंबुलेंस हैं। इनमें से 11 एंबुलेंस ऑफ रोड थीं, जिनमें से तीन को मंगलवार को ऑन रोड किया गया है। बाकी बची 8 एंबुलेंस अब भी ऑफ रोड हैं। इसका मुख्य कारण मुख्यालय से बजट की मंजूरी नहीं मिलना है।
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ये एंबुलेंस कई माह से खराब पड़ी हैं। इन्हें ठीक करवाने के लिए एजेंसियों में भेजा गया था, लेकिन मुख्यालय की तरफ से बजट की मंजूरी नहीं मिलने के कारण अब तक वहीं खड़ी हैं। यहां बता दें कि जिस एंबुलेंस को ठीक करवाने का खर्च 50 हजार रुपये से ज्यादा होता है, उसके लिए मुख्यालय से बजट की मंजूरी लेनी पड़ती है।
जिले की 11 एंबुलेंस में से 8 के लिए अभी भी बजट का इंतजार है।
पिछले सप्ताह बस अड्डे के पास खराब हो गई थी एंबुलेंस: पिछले सप्ताह झज्जर सरकारी अस्पताल से रोहतक जाते समय एक सरकारी एंबुलेंस नए बस अड्डे के पास खराब हो गई थी। मौके पर मैकेनिक को भी बुलाया गया था, लेकिन वह ठीक नहीं हुई।