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Rohtak News: बीए-जेबीटी पास युवा आलोक ने नहीं चुनी नौकरी, तीन एकड़ में फसल उगा कमा रहे तीन लाख प्रति एकड़
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4.. कारोर गांव के खेत में टमाटर के पौधों को सर्दी से बचाने के लिए बनाई लॉ टनल दिखाते हुए प्रगति
रोहतक। खेती-किसानी में मुनाफा बढ़ाने की बात हो तो बागवानी बेहतर विकल्प है। रोहतक के कारोर गांव निवासी युवा किसान आलोक मलिक ने पढ़ाई के बाद भी नौकरी की चाह नहीं की और वे गांव में ही तीन एकड़ में बागवानी कर भविष्य संवार रहे हैं।
बीए-जेबीटी पास युवा आलोक ने एचटेट पास भी किया लेकिन उनका मन गांव में ही लगा रहा और यहीं पर बागवानी शुरू की। अलग-अलग फसलें उगाकर वह अब सालाना साढ़े तीन लाख तक प्रति एकड़ की आमदनी कर रहे हैं।
33 वर्षीय प्रगतिशील युवा किसान आलोक के सराहनीय कार्य को देखते हुए बागवानी विभाग की ओर से सब्जी उत्कृष्टता केंद्र घरौंडा करनाल में फरवरी 2024 में हुए सब्जी एक्सपो में उनको जिले का प्रथम पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया जा चुका है।
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आलोक का कहना है कि गांव में ही बागवानी को रोजगार के रूप में अपनाकर वे बहुत खुश हैं। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव का असर फसलों की बिक्री पर पड़ता है लेकिन बाजार की नब्ज समझकर खेती करना फायदेमंद साबित होगा। वे लॉ टनल व आधुनिक ड्रिप सिस्टम जैसी नई तकनीक अपनाकर जैविक खेती करते हैं। उनकी 50 प्रतिशत सब्जियों को खेत से ही ग्राहक खरीद लेते हैं। संवाद
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युवाओं के लिए रोजगार का बेहतर जरिया है बागवानी : आलोक
स्नातक, डिप्लोमा इन एजुकेशन, हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी एचटेट और केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा भी पास कर चुके आलोक का मानना है कि बागवानी न केवल आर्थिक समृद्धि बल्कि युवाओं के लिए रोजगार का बेहतर जरिया भी है। बाजार की मांग के अनुरूप फसलें लगाकर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। बागवानी फसलों की बिक्री व निर्यात संबंधित कोई समस्या भी नहीं आती।
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एक एकड़ में लगाए हैं टमाटर
आलोक ने फिलहाल एक एकड़ में टमाटर लगाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्याज, धनिया, मूली आदि फसलें भी लगाई हैं। वे पशु पालन भी करते हैं, जिससे खेतों में गोबर खाद का प्रयोग करते हैं। उनका कहना है कि बागवानी महज एक शौक नहीं बल्कि उससे कहीं बढ़कर है। यह प्रकृति से जुड़े रहने के साथ ही रचनात्मकता दिखाने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का तरीका भी है।
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बीए-जेबीटी पास युवा आलोक ने एचटेट पास भी किया लेकिन उनका मन गांव में ही लगा रहा और यहीं पर बागवानी शुरू की। अलग-अलग फसलें उगाकर वह अब सालाना साढ़े तीन लाख तक प्रति एकड़ की आमदनी कर रहे हैं।
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33 वर्षीय प्रगतिशील युवा किसान आलोक के सराहनीय कार्य को देखते हुए बागवानी विभाग की ओर से सब्जी उत्कृष्टता केंद्र घरौंडा करनाल में फरवरी 2024 में हुए सब्जी एक्सपो में उनको जिले का प्रथम पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया जा चुका है।
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आलोक का कहना है कि गांव में ही बागवानी को रोजगार के रूप में अपनाकर वे बहुत खुश हैं। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव का असर फसलों की बिक्री पर पड़ता है लेकिन बाजार की नब्ज समझकर खेती करना फायदेमंद साबित होगा। वे लॉ टनल व आधुनिक ड्रिप सिस्टम जैसी नई तकनीक अपनाकर जैविक खेती करते हैं। उनकी 50 प्रतिशत सब्जियों को खेत से ही ग्राहक खरीद लेते हैं। संवाद
युवाओं के लिए रोजगार का बेहतर जरिया है बागवानी : आलोक
स्नातक, डिप्लोमा इन एजुकेशन, हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी एचटेट और केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा भी पास कर चुके आलोक का मानना है कि बागवानी न केवल आर्थिक समृद्धि बल्कि युवाओं के लिए रोजगार का बेहतर जरिया भी है। बाजार की मांग के अनुरूप फसलें लगाकर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। बागवानी फसलों की बिक्री व निर्यात संबंधित कोई समस्या भी नहीं आती।
एक एकड़ में लगाए हैं टमाटर
आलोक ने फिलहाल एक एकड़ में टमाटर लगाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्याज, धनिया, मूली आदि फसलें भी लगाई हैं। वे पशु पालन भी करते हैं, जिससे खेतों में गोबर खाद का प्रयोग करते हैं। उनका कहना है कि बागवानी महज एक शौक नहीं बल्कि उससे कहीं बढ़कर है। यह प्रकृति से जुड़े रहने के साथ ही रचनात्मकता दिखाने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का तरीका भी है।

4.. कारोर गांव के खेत में टमाटर के पौधों को सर्दी से बचाने के लिए बनाई लॉ टनल दिखाते हुए प्रगति