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एक अप्रैल से हरियाणा के बाहर माल ले जाने के लिए चाहिए होगा ई-वे बिल
Updated Thu, 22 Mar 2018 02:36 AM IST
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एक अप्रैल से हरियाणा के बाहर माल ले जाने के लिए चाहिए होगा ई-वे बिल
- फिलहाल इंटरस्टेट ई-वे बिल ही लागू किया जा रहा है, इंटरास्टेट पर बाद में होगा फैसला
- जीएसटी विभाग ने एक बार फिर से ई-वे बिल को लागू कराने के लिए कवायद की शुरू
- राज्य जीएसटी विभाग ने बनाया प्लान, फिर से शहर के व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों से करेंगे संपर्क
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पूरे देश में एक फरवरी को लागू हुई ई-वे बिल की व्यवस्था कुछ ही घंटों में धड़ाम बोल गई थी। गुड्स एवं सर्विसेस टैक्स विभाग का दावा है कि अब दिक्कतों को दूर करने के बाद एक अप्रैल से फिर से ई-वे बिल को लागू किया जा रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि फिलहाल ई-वे बिल माल की इंटरस्टेट आवाजाही के लिए अनिवार्य होगा। इसे इंटरास्टेट लागू करने पर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है, इसे अगले आदेश के बाद ही लागू किया जाएगा। हालांकि व्यापारियों की ई-वे बिल को लेकर चली आ रही दिक्कतें अभी भी दूर नहीं हुई हैं वहीं विभाग का कहना है कि पहले के मुकाबले व्यापारियों में ई-वे बिल की स्वीकार्यता बढ़ी है।
जीएसटी विभाग के उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त (बिक्री कर) सुरेश कुमार बोडवाल ने बताया कि एक अप्रैल से लागू हो रहे ई-वे बिल को लेकर प्लान तैयार कर लिया गया है। अधिकारी व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों से मीटिंग करेंगे और उन्हें ई-वे बिल का उपयोग करने के बारे में फिर से जानकारी देंगे। इसके साथ ही अगर किसी व्यापारी या ट्रांसपोर्टरों को ई-वे बिल संबंधी समस्या है तो विभाग में आकर अधिकारियों से भी संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल हरियाणा से दूसरे राज्य में माल ले जाने और दूसरे राज्यों से हरियाणा में माल आने पर ही ई-वे बिल लागू होगा। राज्य के अंदर माल की आवाजाही में ई-वे बिल को बाद में लागू किया जाएगा। गौरतलब है कि एक फरवरी को हरियाणा में इंटरस्टेट और इंटरास्टेट दोनों ही में ई-वे लागू कर दिया गया था, जबकि अन्य राज्यों में इंटरास्टेट ई-वे बिल लागू नहीं किया गया था।
यह हैं व्यापारियों की मुख्य दिक्कत
1. 24 घंटे में सौ किलोमीटर की दूरी तय करने की बाध्यता।
2. ई-वे जनरेट करने के सभी साधनों की जानकारी नहीं होना।
3. कई व्यापारियों का कंप्यूटर और इंटरनेट से परिचित नहीं होना।
4. ट्रांसपोर्टेशन वाहन बदलने के साथ ही ई-वे बिल को अपडेट करना
5. ट्रक खराब होने या कहीं फंस जाने पर भी ई-वे बिल को अपडेट करना
6. ई-वे बिल के लिए माल की कीमत महज 50 हजार रुपये ही रखा जाना
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- फिलहाल इंटरस्टेट ई-वे बिल ही लागू किया जा रहा है, इंटरास्टेट पर बाद में होगा फैसला
- जीएसटी विभाग ने एक बार फिर से ई-वे बिल को लागू कराने के लिए कवायद की शुरू
- राज्य जीएसटी विभाग ने बनाया प्लान, फिर से शहर के व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों से करेंगे संपर्क
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पूरे देश में एक फरवरी को लागू हुई ई-वे बिल की व्यवस्था कुछ ही घंटों में धड़ाम बोल गई थी। गुड्स एवं सर्विसेस टैक्स विभाग का दावा है कि अब दिक्कतों को दूर करने के बाद एक अप्रैल से फिर से ई-वे बिल को लागू किया जा रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि फिलहाल ई-वे बिल माल की इंटरस्टेट आवाजाही के लिए अनिवार्य होगा। इसे इंटरास्टेट लागू करने पर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है, इसे अगले आदेश के बाद ही लागू किया जाएगा। हालांकि व्यापारियों की ई-वे बिल को लेकर चली आ रही दिक्कतें अभी भी दूर नहीं हुई हैं वहीं विभाग का कहना है कि पहले के मुकाबले व्यापारियों में ई-वे बिल की स्वीकार्यता बढ़ी है।
जीएसटी विभाग के उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त (बिक्री कर) सुरेश कुमार बोडवाल ने बताया कि एक अप्रैल से लागू हो रहे ई-वे बिल को लेकर प्लान तैयार कर लिया गया है। अधिकारी व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों से मीटिंग करेंगे और उन्हें ई-वे बिल का उपयोग करने के बारे में फिर से जानकारी देंगे। इसके साथ ही अगर किसी व्यापारी या ट्रांसपोर्टरों को ई-वे बिल संबंधी समस्या है तो विभाग में आकर अधिकारियों से भी संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल हरियाणा से दूसरे राज्य में माल ले जाने और दूसरे राज्यों से हरियाणा में माल आने पर ही ई-वे बिल लागू होगा। राज्य के अंदर माल की आवाजाही में ई-वे बिल को बाद में लागू किया जाएगा। गौरतलब है कि एक फरवरी को हरियाणा में इंटरस्टेट और इंटरास्टेट दोनों ही में ई-वे लागू कर दिया गया था, जबकि अन्य राज्यों में इंटरास्टेट ई-वे बिल लागू नहीं किया गया था।
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यह हैं व्यापारियों की मुख्य दिक्कत
1. 24 घंटे में सौ किलोमीटर की दूरी तय करने की बाध्यता।
2. ई-वे जनरेट करने के सभी साधनों की जानकारी नहीं होना।
3. कई व्यापारियों का कंप्यूटर और इंटरनेट से परिचित नहीं होना।
4. ट्रांसपोर्टेशन वाहन बदलने के साथ ही ई-वे बिल को अपडेट करना
5. ट्रक खराब होने या कहीं फंस जाने पर भी ई-वे बिल को अपडेट करना
6. ई-वे बिल के लिए माल की कीमत महज 50 हजार रुपये ही रखा जाना