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समय पर काम नहीं किया तो जुर्माना भरना होगा
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 11 Dec 2013 01:24 PM IST
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हरियाणा में अगर समय पर काम नहीं किया तो सरकार के कर्मचारियों और अफसरों को जुर्माना भरना पड़ेगा। इसके लिए मंत्रिमंडल ने राइट टू सर्विस एक्ट (सेवा का अधिकार अधिनियम) अध्यादेश को मंजूरी दी है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने गोहाना रैली में इसकी घोषणा की थी। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को बताया कि इसे जल्द ही लागू किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि हालांकि पहले ही 36 सेवाओं को समयबद्ध कर रखा है मगर इस कानून के लागू होने से लोगों के काम जल्द हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि इसके तहत एक आयोग गठित होगा।
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आयोग समय-समय पर सिफारिशें करेगा। इसके लिए शिकायत निवारण प्राधिकरण गठित होगा। राज्य सरकार प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकरण प्राधिकारी पदनामित करने की अधिसूचना जारी करेगी।
पदनामित अधिकारी अधिसूचित समयावधि के अंदर-अंदर पात्र व्यक्तियों की सेवा उपलब्ध करवाएगा। पात्र व्यक्तियों को पदनामित अधिकारी के सामने सेवा लेने के लिए आवेदन भरना होगा।
आवेदन प्राप्त होने पर पदनामित अधिकारी या तो सेवा उपलब्ध करवाएगा या आवेदन रद्द करेगा। रद्द करने का कारण दर्ज होगा और सूचना आवेदक को दी जाएगी। आवदेन प्राप्त होने के तुरंत पश्चात अधिसूचित सेवा की अवधि शुरू हो जाएगी।
अगर निश्चित समय में काम नहीं हुआ तो व्यक्ति 30 दिन के भीतर प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है। प्राधिकारी सात दिन में सेवा देने का निर्देश दे सकेगा।
अगर अपील रद्द हो जाए तो 60 दिन के भीतर दूसरे शिकायत निवारण प्राधिकारी को अपील कर सकता है। असंतुष्ट हो तो आयोग के पास 90 दिन के भीतर पुनर्विचार के लिए आवेदन कर सकता है। जुर्माना राशि 250 रुपये से 5000 रुपये तक है।
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मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने गोहाना रैली में इसकी घोषणा की थी। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को बताया कि इसे जल्द ही लागू किया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि हालांकि पहले ही 36 सेवाओं को समयबद्ध कर रखा है मगर इस कानून के लागू होने से लोगों के काम जल्द हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि इसके तहत एक आयोग गठित होगा।
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आयोग समय-समय पर सिफारिशें करेगा। इसके लिए शिकायत निवारण प्राधिकरण गठित होगा। राज्य सरकार प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकरण प्राधिकारी पदनामित करने की अधिसूचना जारी करेगी।
पदनामित अधिकारी अधिसूचित समयावधि के अंदर-अंदर पात्र व्यक्तियों की सेवा उपलब्ध करवाएगा। पात्र व्यक्तियों को पदनामित अधिकारी के सामने सेवा लेने के लिए आवेदन भरना होगा।
आवेदन प्राप्त होने पर पदनामित अधिकारी या तो सेवा उपलब्ध करवाएगा या आवेदन रद्द करेगा। रद्द करने का कारण दर्ज होगा और सूचना आवेदक को दी जाएगी। आवदेन प्राप्त होने के तुरंत पश्चात अधिसूचित सेवा की अवधि शुरू हो जाएगी।
अगर निश्चित समय में काम नहीं हुआ तो व्यक्ति 30 दिन के भीतर प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है। प्राधिकारी सात दिन में सेवा देने का निर्देश दे सकेगा।
अगर अपील रद्द हो जाए तो 60 दिन के भीतर दूसरे शिकायत निवारण प्राधिकारी को अपील कर सकता है। असंतुष्ट हो तो आयोग के पास 90 दिन के भीतर पुनर्विचार के लिए आवेदन कर सकता है। जुर्माना राशि 250 रुपये से 5000 रुपये तक है।