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राइस मिलर्स के दो सौ करोड़ अटके
कैथल
Updated Sun, 08 Sep 2013 12:25 AM IST
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हरियाणा में केंद्र सरकार की ओर से एक क्विंटल धान की एवज में चावल के भुगतान के लिए दी गई एक प्रतिशत की छूट का मिलर्स को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इसके तहत प्रदेश भर के मिलर्स की लगभग 200 करोड़ रुपये की राशि फंस गई है। इसका मुख्य कारण वर्ष 2007-08 में किसानों को दिए गए बोनस की राशि को लेकर मांगे जा रहे कागजात हैं।
मिलर्स का कहना है कि यह डीएफएससी एवं एफसीआई के बीच का आपसी मामला है। यदि उनका भुगतान नहीं किया गया तो वे न्यायालय की शरण लेंगे।
केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2007-08 में बोनस दिया गया था। इसमें किसानों को मिलर्स के माध्यम से भुगतान किया गया था।
मिलर्स का कहना है कि उन्होंने सरकारी नियमानुसार अधिकारियों को भुगतान के आवश्यक कागजात सौंप दिए थे।
लेकिन इसके लिए अब उन्हें परेशान किया जा रहा है। सरकार की ओर से मिलर्स को एक क्विंटल धान की मिलिंग के बदले दिए जाने वाले 67 प्रतिशत चावल में से एक प्रतिशत की छूट दी गई है।
इसके हिसाब से प्रदेश भर के मिलर्स का लगभग 200 करोड़ रुपया बनता है। इसका भुगतान किया जाना है।
कैथल राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मांगे राम खुरानिया ने कहा कि मिलर्स को सरकार द्वारा दिए गए ड्रायर्स की छूट के तहत मिलने वाली राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
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इसके लिए अधिकारी बोनस के लिए आवश्यक कागजात मांग रहे हैं। जबकि वे ये कागजात हरियाणा सरकार के नियमानुसार पहले ही जमा करवा चुके हैं।
यदि कोई विवाद है तो एफसीआई और प्रदेश सरकार के बीच का है। इसमें मिलर्स को बेवजह घसीटा जा रहा है।
यदि मिलर्स का शीघ्र ही भुगतान नहीं किया गया तो मिलर्स इस मामले में न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
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इसके तहत प्रदेश भर के मिलर्स की लगभग 200 करोड़ रुपये की राशि फंस गई है। इसका मुख्य कारण वर्ष 2007-08 में किसानों को दिए गए बोनस की राशि को लेकर मांगे जा रहे कागजात हैं।
मिलर्स का कहना है कि यह डीएफएससी एवं एफसीआई के बीच का आपसी मामला है। यदि उनका भुगतान नहीं किया गया तो वे न्यायालय की शरण लेंगे।
केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2007-08 में बोनस दिया गया था। इसमें किसानों को मिलर्स के माध्यम से भुगतान किया गया था।
मिलर्स का कहना है कि उन्होंने सरकारी नियमानुसार अधिकारियों को भुगतान के आवश्यक कागजात सौंप दिए थे।
लेकिन इसके लिए अब उन्हें परेशान किया जा रहा है। सरकार की ओर से मिलर्स को एक क्विंटल धान की मिलिंग के बदले दिए जाने वाले 67 प्रतिशत चावल में से एक प्रतिशत की छूट दी गई है।
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इसके हिसाब से प्रदेश भर के मिलर्स का लगभग 200 करोड़ रुपया बनता है। इसका भुगतान किया जाना है।
कैथल राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मांगे राम खुरानिया ने कहा कि मिलर्स को सरकार द्वारा दिए गए ड्रायर्स की छूट के तहत मिलने वाली राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
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इसके लिए अधिकारी बोनस के लिए आवश्यक कागजात मांग रहे हैं। जबकि वे ये कागजात हरियाणा सरकार के नियमानुसार पहले ही जमा करवा चुके हैं।
यदि कोई विवाद है तो एफसीआई और प्रदेश सरकार के बीच का है। इसमें मिलर्स को बेवजह घसीटा जा रहा है।
यदि मिलर्स का शीघ्र ही भुगतान नहीं किया गया तो मिलर्स इस मामले में न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।