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Rewari News: हर साल टेंडर, अभियान और दावे... आज भी बेसहारा पशुओं को सहारे का इंतजार

Sat, 03 Oct 2026 11:34 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sat, 03 Oct 2026 11:34 PM IST
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Tenders, campaigns, and claims every year... yet stray animals still await support.
सेक्टर 1 में घूम रहे पशु। संवाद
रेवाड़ी। हर साल टेंडर, अभियान और दावे के बाद भी बेसहारा पशुओं को सहारे का इंतजार है। जिले में बड़ी संख्या में बेसहारा पशु आज भी सड़कों पर घूम रहे हैं। कई बार ये पशु सड़क के बीचो-बीच बैठ जाते हैं, जिससे वाहन चालकों को परेशानी होती है। दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।
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नगर परिषद की ओर से बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजने की व्यवस्था की जाती है। इसके लिए हर साल पशु पकड़ने का टेंडर भी लगाया जाता है। अभियान चलाकर पशुओं को पकड़ा जाता है और गोशालाओं तक पहुंचाया जाता है लेकिन इसके बावजूद सड़कों पर बेसहारा पशुओं की संख्या कम होती नजर नहीं आ रही है।
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शहर में लगातार बढ़ रही पशुओं की संख्या के कारण गोशालाओं पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। पशुओं की संख्या अधिक होने के कारण कई गोशालाओं में क्षमता के अनुसार जगह उपलब्ध नहीं रह जाती। ऐसे में नए पशुओं को रखने की व्यवस्था करना भी चुनौती बन जाता है।
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पशुओं के लिए चारे, पानी, उपचार और देखभाल की पर्याप्त व्यवस्था भी जरूरी है। जब तक इस पूरी व्यवस्था को मजबूत नहीं किया जाता, तब तक सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं की समस्या पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है।
हादसों का भी बना रहता है खतरा
सड़कों पर घूमते बेसहारा पशु केवल यातायात व्यवस्था के लिए परेशानी नहीं हैं, बल्कि इनके कारण हादसों का खतरा भी बना रहता है। रात के समय सड़क पर बैठे पशु वाहन चालकों को दूर से दिखाई नहीं देते। अचानक सामने आने या सड़क के बीच झुंड में खड़े होने से वाहन चालक संतुलन खो बैठते हैं। जिले में बेसहारा पशुओं के कारण कई सड़क हादसे हो चुके हैं और 2 बुजुर्गों की हादसों में जान तक जा चुकी है। कई सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन भी किए फिर भी स्थिति में कोई सुधार नहीं है।


पशुओं के लिए उचित व्यवस्था जरूरी
पशु प्रेमी रामपाल कुमार ने कहा कि बेसहारा पशुओं की समस्या को केवल उन्हें पकड़कर गोशाला भेजने तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। पशुओं के लिए पर्याप्त आश्रय, चारा-पानी और उपचार की व्यवस्था के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वे दोबारा सड़कों पर न आएं। अनिल यादव ने कहा कि विश्व पशु दिवस केवल एक दिन पशुओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाने का अवसर नहीं है। बेसहारा पशुओं के संरक्षण के लिए पूरे साल काम होना चाहिए। सड़कों पर घूमने वाले पशु खुद भी असुरक्षित हैं और उनके कारण वाहन चालकों की जान को भी खतरा रहता है।
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