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Rewari News: ऑनलाइन ट्रांसफर नीति को कर्मचारी विरोधी बताया

Tue, 20 Jan 2026 12:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Tue, 20 Jan 2026 12:03 AM IST
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Online transfer policy was termed anti-employee.
रेवाड़ी। हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (एचएसईबी) वर्कर यूनियन ने ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को कर्मचारियों के लिए असुरक्षित बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है। यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि ऑनलाइन तबादला नीति बिजली कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है। इससे कर्मचारियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
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पदाधिकारियों ने कहा कि इस नीति के तहत कर्मचारियों को अचानक दूर-दराज के क्षेत्रों में भेज दिया जाता है जिससे उनके पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और दैनिक जीवन की व्यवस्था बिगड़ जाती हैं, जिसकी जिम्मेदारी निगम नहीं लेता।
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यूनियन के सर्कल प्रधान विक्रम यादव ने बताया कि बिजली निगम का कार्य अत्यंत जोखिम भरा होता है। फील्ड में काम करने वाले तकनीकी कर्मचारी प्रतिदिन हाई वोल्टेज लाइनों, ट्रांसफॉर्मरों और बिजली आपूर्ति से जुड़े खतरनाक कार्यों को अंजाम देते हैं। ऐसे में बिना कर्मचारी की सहमति और बिना पर्याप्त तैयारी के उनका तबादला करना उनकी जान को जोखिम में डालने जैसा है।
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यूनियन से जुड़े शमशेर सिंह ने कहा कि कई बार नई जगह पर कर्मचारियों को लाइन सिस्टम, कार्य क्षेत्र, उपकरणों की स्थिति और स्थानीय परिस्थितियों की पूरी जानकारी नहीं होती जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।
बिजली विभाग में अनुभव और क्षेत्रीय जानकारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। सोमदत्त यादव ने बताया कि वर्षों से किसी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारी वहां की लाइन व्यवस्था, उपभोक्ताओं की समस्याओं और तकनीकी चुनौतियों से भली-भांति परिचित होते हैं।
कहा कि अचानक बड़े पैमाने पर तबादले करने से न केवल कर्मचारियों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, बल्कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित होती है। इससे फॉल्ट ठीक करने में देरी, उपभोक्ताओं की शिकायतों में बढ़ोतरी और विभाग की छवि को नुकसान पहुंचता है।

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कामकाज और आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है प्रभाव
यूनियन के मनोज सैनी ने कहा कि ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी फील्ड स्टाफ की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है। यह नीति न केवल कर्मचारियों के हितों को नजरअंदाज करती है, बल्कि निगम के कामकाज और आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। विनोद ने कहा कि बड़े पैमाने पर तबादलों के कारण राजस्व वसूली और बकाया राशि की रिकवरी प्रभावित होगी। नए कर्मचारी जब किसी क्षेत्र में जाते हैं, तो उन्हें वहां की उपभोक्ता सूची, बकाया मामलों और स्थानीय परिस्थितियों को समझने में लंबा समय लगता है, जिससे निगम को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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