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वैचारिक नशे से दूर रहना चाहिए : प्रो. प्रमोद
Fri, 22 Mar 2024 02:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 22 Mar 2024 02:10 AM IST
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रेवाड़ी। आईजीयू में आयोजित जिला स्तरीय नशा मुक्ति सेमिनार में मुख्य वक्ता को स्मृति चिन्ह भेंट
रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में उपायुक्त राहुल हुड्डा के नेतृत्व में रेडक्रॉस सोसाइटी इकाई, रेवाड़ी ने नशामुक्ति सेमिनार का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना और यूथ रेड क्रॉस कोऑर्डिनेटर डॉ. समृद्धि के तत्वावधान में किया। मुख्य वक्ता के रूप में जिला ओर सत्र न्यायालय से अधिवक्ता रणजीत सिंह और राजनीतिक विज्ञान विभाग से डॉ. मुकेश कुमार रहे।
मुख्य वक्ता रणजीत सिंह ने विद्यार्थियों को नशे के खिलाफ जागरूक करते हुए कहा कि नशा शरीर, मित्र, धन, परिवार सब कुछ नष्ट कर देता है। आज का युवा नशे की लत में फंसता जा रहा है। जिस युवा के हाथ में किताबें और पेन होने चाहिए वह युवा आज शराब, अफीम, गांजा, भांग का सेवन कर रहा है। डॉ. मुकेश ने स्वयंसेवकों को नशे से होने वाले नुकसानों की जानकारी दी। कहा कि जिंदगी की रफ्तार की तरह आज के युवा नशाकर ड्राइविंग करते हैं जो सड़क हादसों का कारण बनता है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. प्रमोद कुमार ने कहा कि आज अन्य नशीले पदार्थों के अलावा वैचारिक नशे से भी दूर रहना चाहिए है। अपनी सभ्यता में संस्कृति को बचाने के लिए यह जरूरी है कि हम सब संस्कृति पर गर्व करें। नशा मुक्ति केंद्र, रेवाड़ी से विशिष्ट अतिथि के रूप में आई संदीपा अरोड़ा ने बताया कि 1995 से उन्होंने नशे के खिलाफ जंग में सहयोग करना शुरू किया था। नशामुक्ति केंद्र रेवाड़ी ने अभी तक हजारों लोगों के जीवन को बदला। नशा छुड़वाकर देश का अच्छा नागरिक बनने में सहयोग किया है।
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सिविल अस्पताल रेवाड़ी से आई डॉ. प्रीति ने कहा कि युवा कैसे छोटे-मोटे कार्यक्रमों में हल्का नशा शुरू कर कब उसके आदि हो जाते हैं पता ही नहीं चलता। जिला रेड क्रॉस सेक्रेटरी महेश गुप्ता ने कहा कि समय-समय पर विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों को सामाजिक संवेदनशील मुद्दों जैसे- नशा मुक्त समाज, एड्स, टीबी, मलेरिया, अंगदान, पर्यावरण आपदाएं आदि विषयों पर कार्यक्रम करवाता रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुशांत, डॉ. अनीता, डॉ. ललित तथा वाईआरसी काउंसलर डॉ. भारती, डॉ. जसविंदर, डॉ. रितु, पवन कुमार व राष्ट्रीय सेवा योजना और वाईआरसी के 200 से ज्यादा स्वयंसेवक व सेविकाएं उपस्थित रहें।
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मुख्य वक्ता रणजीत सिंह ने विद्यार्थियों को नशे के खिलाफ जागरूक करते हुए कहा कि नशा शरीर, मित्र, धन, परिवार सब कुछ नष्ट कर देता है। आज का युवा नशे की लत में फंसता जा रहा है। जिस युवा के हाथ में किताबें और पेन होने चाहिए वह युवा आज शराब, अफीम, गांजा, भांग का सेवन कर रहा है। डॉ. मुकेश ने स्वयंसेवकों को नशे से होने वाले नुकसानों की जानकारी दी। कहा कि जिंदगी की रफ्तार की तरह आज के युवा नशाकर ड्राइविंग करते हैं जो सड़क हादसों का कारण बनता है।
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विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. प्रमोद कुमार ने कहा कि आज अन्य नशीले पदार्थों के अलावा वैचारिक नशे से भी दूर रहना चाहिए है। अपनी सभ्यता में संस्कृति को बचाने के लिए यह जरूरी है कि हम सब संस्कृति पर गर्व करें। नशा मुक्ति केंद्र, रेवाड़ी से विशिष्ट अतिथि के रूप में आई संदीपा अरोड़ा ने बताया कि 1995 से उन्होंने नशे के खिलाफ जंग में सहयोग करना शुरू किया था। नशामुक्ति केंद्र रेवाड़ी ने अभी तक हजारों लोगों के जीवन को बदला। नशा छुड़वाकर देश का अच्छा नागरिक बनने में सहयोग किया है।
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सिविल अस्पताल रेवाड़ी से आई डॉ. प्रीति ने कहा कि युवा कैसे छोटे-मोटे कार्यक्रमों में हल्का नशा शुरू कर कब उसके आदि हो जाते हैं पता ही नहीं चलता। जिला रेड क्रॉस सेक्रेटरी महेश गुप्ता ने कहा कि समय-समय पर विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों को सामाजिक संवेदनशील मुद्दों जैसे- नशा मुक्त समाज, एड्स, टीबी, मलेरिया, अंगदान, पर्यावरण आपदाएं आदि विषयों पर कार्यक्रम करवाता रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुशांत, डॉ. अनीता, डॉ. ललित तथा वाईआरसी काउंसलर डॉ. भारती, डॉ. जसविंदर, डॉ. रितु, पवन कुमार व राष्ट्रीय सेवा योजना और वाईआरसी के 200 से ज्यादा स्वयंसेवक व सेविकाएं उपस्थित रहें।