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Rewari News: इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी में डॉ. बीआर आंबेडकर अध्ययन केंद्र का उद्घाटन
Fri, 16 Oct 2026 12:40 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 16 Oct 2026 12:40 AM IST
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आईजीयू में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते शिक्षक। स्रोत : विवि
रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के सरदार पटेल भवन स्थित सेमिनार हॉल में डॉ. बीआर आंबेडकर अध्ययन केंद्र का उद्घाटन वीरवार को किया गया। इस दौरान कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने कहा कि इस केंद्र के माध्यम से विद्यार्थियों को बाबा साहेब के व्यापक दर्शन और विचारों को गहराई से समझने का अवसर मिलेगा।
कुलपति ने कहा कि बाबा साहेब के संदेश शिक्षित रहो, संगठित रहो और समानता के मूल्यों को अपनाकर विद्यार्थी जीवन में आगे बढ़ सकते हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं को भारतीय संविधान के महत्व को समझते हुए उसका गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए।
उन्होंने विश्वविद्यालय में हुई शैक्षणिक, प्रशासनिक और ढांचागत प्रगति की जानकारी भी दी।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की हाल ही में आयोजित कार्यपरिषद की बैठक में डॉ. बीआर आंबेडकर पीठ के अंतर्गत पीएचडी की एक अतिरिक्त सीट सृजित करने का प्रस्ताव पारित किया गया है।
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इससे शोधार्थियों को आंबेडकर के विचारों और दर्शन पर उच्च स्तरीय शोध करने का अवसर मिलेगा।
बाबा साहेब के मूल ग्रंथों का अध्ययन करें युवा : मुख्य अतिथि डॉ. प्रीतम सिंह ने कहा कि बाबा साहेब किसी सीमित दायरे या वर्ग विशेष के नेता नहीं थे, बल्कि असाधारण प्रतिभा और दूरदर्शी सोच के धनी थे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे उनके बारे में प्रचलित धारणाओं के आधार पर राय बनाने के बजाय उनके मूल ग्रंथों का अध्ययन करें।
आगे कहा कि संविधान सभा में डॉ. आंबेडकर ने विभिन्न सवालों का तार्किक ढंग से जवाब दिया। कानून के साथ विदेश नीति और बिजनेस स्टडीज में भी उनकी गहरी रुचि थी।
उन्होंने विभिन्न देशों के संविधान का अध्ययन कर भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विचारों को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के विचारों को व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझना जरूरी है।
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कुलपति ने कहा कि बाबा साहेब के संदेश शिक्षित रहो, संगठित रहो और समानता के मूल्यों को अपनाकर विद्यार्थी जीवन में आगे बढ़ सकते हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं को भारतीय संविधान के महत्व को समझते हुए उसका गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए।
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उन्होंने विश्वविद्यालय में हुई शैक्षणिक, प्रशासनिक और ढांचागत प्रगति की जानकारी भी दी।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की हाल ही में आयोजित कार्यपरिषद की बैठक में डॉ. बीआर आंबेडकर पीठ के अंतर्गत पीएचडी की एक अतिरिक्त सीट सृजित करने का प्रस्ताव पारित किया गया है।
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इससे शोधार्थियों को आंबेडकर के विचारों और दर्शन पर उच्च स्तरीय शोध करने का अवसर मिलेगा।
बाबा साहेब के मूल ग्रंथों का अध्ययन करें युवा : मुख्य अतिथि डॉ. प्रीतम सिंह ने कहा कि बाबा साहेब किसी सीमित दायरे या वर्ग विशेष के नेता नहीं थे, बल्कि असाधारण प्रतिभा और दूरदर्शी सोच के धनी थे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे उनके बारे में प्रचलित धारणाओं के आधार पर राय बनाने के बजाय उनके मूल ग्रंथों का अध्ययन करें।
आगे कहा कि संविधान सभा में डॉ. आंबेडकर ने विभिन्न सवालों का तार्किक ढंग से जवाब दिया। कानून के साथ विदेश नीति और बिजनेस स्टडीज में भी उनकी गहरी रुचि थी।
उन्होंने विभिन्न देशों के संविधान का अध्ययन कर भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विचारों को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के विचारों को व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझना जरूरी है।