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श्रावण मास के दूसरे सोमवार पर श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक
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सावन के दूसरे सोमवार को शिव मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु।
- फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। शहर के ऐतिहासिक मोती चौक पर स्थित शहर के प्राचीनतम मंदिरों में से एक घंटेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। श्रावण मास में यहां सुबह से लेकर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मंदिर में शहर से ही नहीं, बल्कि दूरदराज से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं।
श्रावण मास में हर साल मंदिर में कोई न कोई कार्यक्रम होते हैं। मगर कोरोना महामारी की वजह से इस बार कोई बड़ा आयोजन नहीं हो रहा है। लेकिन मंदिर कमेटी की ओर से यहां भंडारे का आयोजन किया जाता है। श्रावण मास में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर का इतिहास पुरातत्व काल से बताया जाता है। मंदिर से जुड़े प्रबुद्धजनों का मानना है कि यहां खुदाई के दौरान भूमि से शिवलिंग निकला था। श्रद्धालुओं ने इसे यहीं स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी थी। बताते हैं कि मंदिर में लोहे के जाल हुआ करते थे, जिनपर हजारों की संख्या में घंटे लगे थे। इस बजह से इस मंदिर का नाम घंटेश्वर मंदिर पड़ गया। शहर के मुख्य बाजार में स्थित इस मंदिर में श्रद्धालुओं की श्रद्धा व अटूट विश्वास है।
श्रावण के दूसरे सोमवार को श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना
श्रावण मास दूसरे सोमवार को श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। सोमवार को विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। शहर के घंटेश्वर मंदिर, सेक्टर-1 स्थित भूतेश्वर महादेव मंदिर, बारा पत्थर स्थित भूतेश्वर मंदिर व अनाज मंडी स्थित शिव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। इसके अलावा अधिकांश लोगों ने कोरोनाकाल के चलते घर पर ही रहकर पूजा-अर्चना कर भोलेनाथ से प्रार्थना की।
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श्रावण मास में हर साल मंदिर में कोई न कोई कार्यक्रम होते हैं। मगर कोरोना महामारी की वजह से इस बार कोई बड़ा आयोजन नहीं हो रहा है। लेकिन मंदिर कमेटी की ओर से यहां भंडारे का आयोजन किया जाता है। श्रावण मास में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर का इतिहास पुरातत्व काल से बताया जाता है। मंदिर से जुड़े प्रबुद्धजनों का मानना है कि यहां खुदाई के दौरान भूमि से शिवलिंग निकला था। श्रद्धालुओं ने इसे यहीं स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी थी। बताते हैं कि मंदिर में लोहे के जाल हुआ करते थे, जिनपर हजारों की संख्या में घंटे लगे थे। इस बजह से इस मंदिर का नाम घंटेश्वर मंदिर पड़ गया। शहर के मुख्य बाजार में स्थित इस मंदिर में श्रद्धालुओं की श्रद्धा व अटूट विश्वास है।
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श्रावण के दूसरे सोमवार को श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना
श्रावण मास दूसरे सोमवार को श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। सोमवार को विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। शहर के घंटेश्वर मंदिर, सेक्टर-1 स्थित भूतेश्वर महादेव मंदिर, बारा पत्थर स्थित भूतेश्वर मंदिर व अनाज मंडी स्थित शिव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। इसके अलावा अधिकांश लोगों ने कोरोनाकाल के चलते घर पर ही रहकर पूजा-अर्चना कर भोलेनाथ से प्रार्थना की।
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