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Rewari News: स्नातकोत्तर में दाखिले की समय सीमा समाप्त, अब भी सीटें रिक्त
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रेवाड़ी। स्नातकोत्तर में दाखिले की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। उच्चतर शिक्षा विभाग ने चौथे चरण में 28 अगस्त से 12 सितंबर तक ऑनलाइन पोर्टल खोला था। इस दौरान हजारों छात्रों ने विभिन्न विषयों में दाखिला लिया लेकिन अब भी कई कॉलेजों में सीटें रिक्त हैं।
यह स्थिति कॉलेज प्रबंधन और विद्यार्थियों के लिए चिंता का विषय है। कई कॉलेजों में विज्ञान, कला और भाषा संकाय की सीटें अपेक्षित संख्या में नहीं भर पाई हैं। इन विषयों में शुरुआत से ही आवेदन करने वालों की संख्या कम रही।
अंतिम तिथि तक भी दाखिले की रफ्तार तेज नहीं हो सकी, जिसके चलते निर्धारित कई सीटें खाली रह गई। इस स्थिति को देखते हुए अब उम्मीद लगाए जा रहे हैं कि उच्चतर शिक्षा विभाग रिक्त सीटों को भरने के लिए पोर्टल को दोबारा खोल सकता है।
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यदि प्रवेश प्रक्रिया फिर से शुरू होती है तो उन अभ्यर्थियों को लाभ मिलेगा, जो किसी कारणवश पहली बार आवेदन नहीं कर पाए थे। वहीं, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।
एक ओर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को प्राथमिकता दे रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ अभ्यर्थियों ने निजी विश्वविद्यालयों और पेशेवर कोर्सों का रुख कर लिया है।
पीजी में दाखिले की स्थिति :
जिले के विभिन्न राजकीय कॉलेजों में पीजी में दाखिले की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सेक्टर-18 महिला कॉलेज में एमए योग की 40 सीटों पर कोई दाखिला नहीं हुआ है। एमए अंग्रेजी की 40 सीटों में 24 दाखिले हुए और 16 सीटें रिक्त रह गई। कंवाली राजकीय कॉलेज में एमकॉम की 60 सीटें पूरी तरह भर गई, जबकि एमए भूगोल में भी सभी 40 सीटें फुल हो गई। हालांकि, पीजीडीसीए के नए कोर्स में 40 में से केवल 22 दाखिले हुए और 18 सीटें खाली रह गईं। बावल राजकीय कॉलेज में पीजीडीसीए की 40 सीटों में 22 दाखिले हुए और 18 सीटें खाली रह गईं। एमए संस्कृत की 50 सीटों में से केवल 14 दाखिले हुए और 36 सीटें रिक्त रह गईं। वहीं गुरावड़ा राजकीय कॉलेज में राजनीति विज्ञान की 40 सीटों में 37 दाखिले हुए और केवल 3 सीटें खाली बची हुई है।
वर्जन
शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने और अधिक से अधिक छात्रों को अवसर देने के लिए रिक्त सीटों को भरना बेहद जरूरी है। सभी की निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा कि पोर्टल दोबारा खुलेगा या नहीं।- डॉ. मनु कुमार, एडमिशन नोडल अधिकारी, राजकीय महाविद्यालय खरखड़ा।
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यह स्थिति कॉलेज प्रबंधन और विद्यार्थियों के लिए चिंता का विषय है। कई कॉलेजों में विज्ञान, कला और भाषा संकाय की सीटें अपेक्षित संख्या में नहीं भर पाई हैं। इन विषयों में शुरुआत से ही आवेदन करने वालों की संख्या कम रही।
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अंतिम तिथि तक भी दाखिले की रफ्तार तेज नहीं हो सकी, जिसके चलते निर्धारित कई सीटें खाली रह गई। इस स्थिति को देखते हुए अब उम्मीद लगाए जा रहे हैं कि उच्चतर शिक्षा विभाग रिक्त सीटों को भरने के लिए पोर्टल को दोबारा खोल सकता है।
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यदि प्रवेश प्रक्रिया फिर से शुरू होती है तो उन अभ्यर्थियों को लाभ मिलेगा, जो किसी कारणवश पहली बार आवेदन नहीं कर पाए थे। वहीं, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।
एक ओर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को प्राथमिकता दे रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ अभ्यर्थियों ने निजी विश्वविद्यालयों और पेशेवर कोर्सों का रुख कर लिया है।
पीजी में दाखिले की स्थिति :
जिले के विभिन्न राजकीय कॉलेजों में पीजी में दाखिले की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सेक्टर-18 महिला कॉलेज में एमए योग की 40 सीटों पर कोई दाखिला नहीं हुआ है। एमए अंग्रेजी की 40 सीटों में 24 दाखिले हुए और 16 सीटें रिक्त रह गई। कंवाली राजकीय कॉलेज में एमकॉम की 60 सीटें पूरी तरह भर गई, जबकि एमए भूगोल में भी सभी 40 सीटें फुल हो गई। हालांकि, पीजीडीसीए के नए कोर्स में 40 में से केवल 22 दाखिले हुए और 18 सीटें खाली रह गईं। बावल राजकीय कॉलेज में पीजीडीसीए की 40 सीटों में 22 दाखिले हुए और 18 सीटें खाली रह गईं। एमए संस्कृत की 50 सीटों में से केवल 14 दाखिले हुए और 36 सीटें रिक्त रह गईं। वहीं गुरावड़ा राजकीय कॉलेज में राजनीति विज्ञान की 40 सीटों में 37 दाखिले हुए और केवल 3 सीटें खाली बची हुई है।
वर्जन
शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने और अधिक से अधिक छात्रों को अवसर देने के लिए रिक्त सीटों को भरना बेहद जरूरी है। सभी की निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा कि पोर्टल दोबारा खुलेगा या नहीं।- डॉ. मनु कुमार, एडमिशन नोडल अधिकारी, राजकीय महाविद्यालय खरखड़ा।