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हड़ताल से थमी जिंदगी की रफ्तार
सिरसा/ब्यूरो
Updated Wed, 13 Nov 2013 11:07 PM IST
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हरियाणा कर्मचारी तालमेल कमेटी के बैनर तले विभिन्न मांगों को लेकर की गई
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कर्मचारी हड़ताल से प्रदेश में लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
प्रदेश में करीब तीन लाख कर्मचारियों के हड़ताल पर होने की वजह से जनसेवाएं बाधित रही। सबसे ज्यादा दिक्कत रोडवेज कर्मचारियों के दो दिवसीय चक्का जाम की वजह से बस यात्रियों को हुई। बुधवार सुबह से ही सभी डिपो से कोई बस नहीं गई। प्रशासन द्वारा किए गए वैकल्पिक इंतजाम धरे के धरे रह गए।
रोडवेज के सभी 23 डिपो, 15 सब डिपो, एचआरईसी गुड़गांव, आईएसबीटी दिल्ली और कार सेक्सन चंडीगढ़ के समस्त 18 हजार रोडवेज कर्मचारियों ने पूर्ण हड़ताल करके रोडवेज की सभी 3850 बसों का चक्का जाम रखा। वीरवार को भी बसों की हड़ताल जारी रहेगी। इस वजह से जहां ट्रेनों में भारी भीड़ रही। वहीं, मैक्सी कैब और जीप भी ठसाठस भरकर चली।
सुबह दो बजे ही डट गए पुलिस और कर्मचारी
दिन : बुधवार, समय : सुबह दो बजे, स्थान : रोडवेज बस स्टैंड सिरसा
सिरसा। बस स्टैंड परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ था। पुलिसकर्मियों के बूटों की टक टक की आवाज इस बात की गवाही दे रही थी कि पुलिस ने बस स्टैंड परिसर में पहले से ही डेरा डाला हुआ है। बसें निर्धारित स्थान पर खड़ी थीं। एक छोर पर रोडवेज कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बसें न चलने देने का प्रण लेकर डटे हुए थे। डीआई हंसराज बिश्नोई, थाना प्रभारी दलीप सिंह पुलिसबल सहित मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों को बताया कि अड्डे में धारा 144 लागू है, ऐसे में भीतर प्रदर्शन नहीं किया जा सकता। ऐसे में हड़ताली कर्मचारी बोरिया बिस्तर उठाकर निकासी द्वार के बाहर एक कोने में टेंट लगाकर धरने पर बैठ गए। ठंड के मारे सभी ने पैरों पर रजाई डाली हुई थी। पुलिस प्रशासन पहले ही अनुबंधित रोडवेज कर्मचारियों को विश्वास में ले चुका था कि सबसे पहली बस ढाई बजे दिल्ली के लिए रवाना की जाएगी। दो बजकर दस मिनट पर रोडवेज बस का चालक आकर साफ कह देता है कि वह बस नहीं ले जा सकता। इसके बाद रोडवेज की एक भी बस अड्डे से बाहर नहीं निकली। वहीं, पंजाब और राजस्थान की ओर से आने और जाने वाली बसों का संचालन निर्धारित समय के अनुसार जारी रहा। सिरसा डिपो के बाहर धरने पर रामकुमार, मदनलाल, चंद्रशेखर, चंचल सिंह और हरी सिंह गोदारा आदि ने संबोधित किया।
स्कूल में हुए लेट, घर पर वेट
सोनीपत। कर्मचारी हड़ताल के कारण रोडवेज का चक्का जाम रहा। इससे छात्रों को काफी परेशानियां उठानी पड़ी। मालवीय स्कूल में ग्यारहवीं कक्षा के छात्र गौतम ने बताया कि उसने बस पास होने के बावजूद उसे निजी वाहन से स्कूल आना पड़ा। वह दस साथियों के साथ गांव मोहाना से प्रतिदिन पढ़ने आता है। साधन न मिलने की वजह से वे स्कूल में भी देरी से पहुंचेंगे। बुराड़ी दिल्ली से हिंदू इंजीनियरिंग कालेज में प्रथम सेमेस्टर के छात्र दीपक व अजय का कहना है कि वह रोडवेज की बस से कॉलेज आते हैं। बुधवार को हड़ताल के कारण उन्हें लगभग दो सौ रुपये खर्च करने पड़े। इसके बावजूद दो घंटे देरी से पहुंचे। गांव जाखौली निवासी महिला सतवंती ने बताया कि वह मंगलवार को गांव राजलु में अपनी रिश्तेदारी में आई थी तथा बुधवार को वापस गांव जा रही थी। उसने बताया कि वह अपने दो बच्चों के साथ राजलु से सोनीपत तक रेल से पहुंची, किंतु सुबह आठ बजे से दोपहर बारह बजे तक गांव के लिए उसे कोई साधन नहीं मिला।
रोहतक बस स्टैंड पर रही तनातनी
रोहतक। कर्मचारी हड़ताल का रोहतक में व्यापक असर रहा। बस स्टैंड पर रोडवेज कर्मचारियों व पुलिसकर्मियों के बीच तनातनी भी हुई। बुधवार को तड़के चार बजे बस स्टैंड पर कर्मचारी नारेबाजी करते हुए बस स्टैंड मुख्य गेट पर आ गए और उन्होंने बस अड्डे के दोनों गेटों पर बसों को खड़ाकर मार्ग अवरुद्ध कर दिया। दोपहर को लगभग खाली रहने वाली रोहतक से दिल्ली जाने वाली पैसेंजर गाड़ी में बसों की हड़ताल की वजह से पैर रखने को जगह नहीं थी। मंडी बोर्ड, पर्यटन विभाग, बिजली बोर्ड, सिंचाई विभाग, हुडा, एचएसआईडीसी, वन विभाग, लोक निर्माण विभाग, एमडीयू, शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। दोपहर बाद विभिन्न विभागों के हड़ताली कर्मचारी मानसरोवर पार्क में एकत्रित हुए।
माकपा ने कहा, प्राइवेट रूट वापस ले सरकार
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि इस सफल हड़ताल के बाद राज्य सरकार को रोडवेज के 3519 रूटों को निजी हाथों में देने के निर्णय को वापस ले लेना चाहिए।
कर्मचारियों ने ये रखीं मांगें
रोहतक। स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारी संघ ने हड़ताल रखी। इस वजह से छात्रों के कई काम लटक गए। गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष तारीफ सिंह के नेतृत्व में कर्मचारी विजय पार्क में एकत्रित हुए। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार पंजाब के समान सभी वर्गों के कर्मचारियों को वेतनमान व अन्य भत्ते लागू करे। इसके अलावा कच्चे कर्मचारियों को पक्का करे, ठकेदारी प्रथा बंद करे व सभी वर्गों में रिक्त पडे़ पदों को भरा जाए।
रोडवेज कर्मचारियों ने मांगें दोहराई
झज्जर। कर्मचारी हड़ताल की वजह से एक भी बस सड़क पर नहीं उतरी। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के सदस्य कर्मबीर चाहार ने कहा कि सरकार रोडवेज बेड़े में दस हजार सरकारी बसें शामिल करें। नियमित कर्मचारियों की भर्ती हो और कर्मशाला कर्मचारियों की लंबित पड़ी मांगों को जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है तो 23 नवंबर के बाद आंदोलन और तेज करेंगे।
पंजाब के लिपिक से 12 हजार वेतन कम
रेवाड़ी। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के प्रांतीय प्रेस प्रवक्ता देवेंद्र तिवारी ने कहा कि एक तरफ सरकार छात्रों को रोडवेज में फ्री यात्रा करने की घोषण करती है और दूसरी तरफ रोडवेज का निजीकरण करने का प्रयास कर रही है। मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन के जिला प्रधान रामनिवास ने कहा कि धरने पर कहा कि पंजाब का लिपिक हरियाणा के लिपिक से 12 हजार रुपये ज्यादा वेतन लेता है।
रोडवेज को इतना हुआ नुकसान
सिरसा में हड़ताल की वजह से रोडवेज को साढे़ नौ लाख रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, रेलवे को करीब छह लाख रुपये का लाभ हुआ। रोहतक डिपो को आठ लाख रुपये का नुकसान हुआ है। भिवानी डिपो को करीब 11 लाख का नुकसान हुआ।
प्रदेश में करीब तीन लाख कर्मचारियों के हड़ताल पर होने की वजह से जनसेवाएं बाधित रही। सबसे ज्यादा दिक्कत रोडवेज कर्मचारियों के दो दिवसीय चक्का जाम की वजह से बस यात्रियों को हुई। बुधवार सुबह से ही सभी डिपो से कोई बस नहीं गई। प्रशासन द्वारा किए गए वैकल्पिक इंतजाम धरे के धरे रह गए।
रोडवेज के सभी 23 डिपो, 15 सब डिपो, एचआरईसी गुड़गांव, आईएसबीटी दिल्ली और कार सेक्सन चंडीगढ़ के समस्त 18 हजार रोडवेज कर्मचारियों ने पूर्ण हड़ताल करके रोडवेज की सभी 3850 बसों का चक्का जाम रखा। वीरवार को भी बसों की हड़ताल जारी रहेगी। इस वजह से जहां ट्रेनों में भारी भीड़ रही। वहीं, मैक्सी कैब और जीप भी ठसाठस भरकर चली।
सुबह दो बजे ही डट गए पुलिस और कर्मचारी
दिन : बुधवार, समय : सुबह दो बजे, स्थान : रोडवेज बस स्टैंड सिरसा
सिरसा। बस स्टैंड परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ था। पुलिसकर्मियों के बूटों की टक टक की आवाज इस बात की गवाही दे रही थी कि पुलिस ने बस स्टैंड परिसर में पहले से ही डेरा डाला हुआ है। बसें निर्धारित स्थान पर खड़ी थीं। एक छोर पर रोडवेज कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बसें न चलने देने का प्रण लेकर डटे हुए थे। डीआई हंसराज बिश्नोई, थाना प्रभारी दलीप सिंह पुलिसबल सहित मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों को बताया कि अड्डे में धारा 144 लागू है, ऐसे में भीतर प्रदर्शन नहीं किया जा सकता। ऐसे में हड़ताली कर्मचारी बोरिया बिस्तर उठाकर निकासी द्वार के बाहर एक कोने में टेंट लगाकर धरने पर बैठ गए। ठंड के मारे सभी ने पैरों पर रजाई डाली हुई थी। पुलिस प्रशासन पहले ही अनुबंधित रोडवेज कर्मचारियों को विश्वास में ले चुका था कि सबसे पहली बस ढाई बजे दिल्ली के लिए रवाना की जाएगी। दो बजकर दस मिनट पर रोडवेज बस का चालक आकर साफ कह देता है कि वह बस नहीं ले जा सकता। इसके बाद रोडवेज की एक भी बस अड्डे से बाहर नहीं निकली। वहीं, पंजाब और राजस्थान की ओर से आने और जाने वाली बसों का संचालन निर्धारित समय के अनुसार जारी रहा। सिरसा डिपो के बाहर धरने पर रामकुमार, मदनलाल, चंद्रशेखर, चंचल सिंह और हरी सिंह गोदारा आदि ने संबोधित किया।
स्कूल में हुए लेट, घर पर वेट
सोनीपत। कर्मचारी हड़ताल के कारण रोडवेज का चक्का जाम रहा। इससे छात्रों को काफी परेशानियां उठानी पड़ी। मालवीय स्कूल में ग्यारहवीं कक्षा के छात्र गौतम ने बताया कि उसने बस पास होने के बावजूद उसे निजी वाहन से स्कूल आना पड़ा। वह दस साथियों के साथ गांव मोहाना से प्रतिदिन पढ़ने आता है। साधन न मिलने की वजह से वे स्कूल में भी देरी से पहुंचेंगे। बुराड़ी दिल्ली से हिंदू इंजीनियरिंग कालेज में प्रथम सेमेस्टर के छात्र दीपक व अजय का कहना है कि वह रोडवेज की बस से कॉलेज आते हैं। बुधवार को हड़ताल के कारण उन्हें लगभग दो सौ रुपये खर्च करने पड़े। इसके बावजूद दो घंटे देरी से पहुंचे। गांव जाखौली निवासी महिला सतवंती ने बताया कि वह मंगलवार को गांव राजलु में अपनी रिश्तेदारी में आई थी तथा बुधवार को वापस गांव जा रही थी। उसने बताया कि वह अपने दो बच्चों के साथ राजलु से सोनीपत तक रेल से पहुंची, किंतु सुबह आठ बजे से दोपहर बारह बजे तक गांव के लिए उसे कोई साधन नहीं मिला।
रोहतक बस स्टैंड पर रही तनातनी
रोहतक। कर्मचारी हड़ताल का रोहतक में व्यापक असर रहा। बस स्टैंड पर रोडवेज कर्मचारियों व पुलिसकर्मियों के बीच तनातनी भी हुई। बुधवार को तड़के चार बजे बस स्टैंड पर कर्मचारी नारेबाजी करते हुए बस स्टैंड मुख्य गेट पर आ गए और उन्होंने बस अड्डे के दोनों गेटों पर बसों को खड़ाकर मार्ग अवरुद्ध कर दिया। दोपहर को लगभग खाली रहने वाली रोहतक से दिल्ली जाने वाली पैसेंजर गाड़ी में बसों की हड़ताल की वजह से पैर रखने को जगह नहीं थी। मंडी बोर्ड, पर्यटन विभाग, बिजली बोर्ड, सिंचाई विभाग, हुडा, एचएसआईडीसी, वन विभाग, लोक निर्माण विभाग, एमडीयू, शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। दोपहर बाद विभिन्न विभागों के हड़ताली कर्मचारी मानसरोवर पार्क में एकत्रित हुए।
माकपा ने कहा, प्राइवेट रूट वापस ले सरकार
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि इस सफल हड़ताल के बाद राज्य सरकार को रोडवेज के 3519 रूटों को निजी हाथों में देने के निर्णय को वापस ले लेना चाहिए।
कर्मचारियों ने ये रखीं मांगें
रोहतक। स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारी संघ ने हड़ताल रखी। इस वजह से छात्रों के कई काम लटक गए। गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष तारीफ सिंह के नेतृत्व में कर्मचारी विजय पार्क में एकत्रित हुए। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार पंजाब के समान सभी वर्गों के कर्मचारियों को वेतनमान व अन्य भत्ते लागू करे। इसके अलावा कच्चे कर्मचारियों को पक्का करे, ठकेदारी प्रथा बंद करे व सभी वर्गों में रिक्त पडे़ पदों को भरा जाए।
रोडवेज कर्मचारियों ने मांगें दोहराई
झज्जर। कर्मचारी हड़ताल की वजह से एक भी बस सड़क पर नहीं उतरी। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के सदस्य कर्मबीर चाहार ने कहा कि सरकार रोडवेज बेड़े में दस हजार सरकारी बसें शामिल करें। नियमित कर्मचारियों की भर्ती हो और कर्मशाला कर्मचारियों की लंबित पड़ी मांगों को जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है तो 23 नवंबर के बाद आंदोलन और तेज करेंगे।
पंजाब के लिपिक से 12 हजार वेतन कम
रेवाड़ी। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के प्रांतीय प्रेस प्रवक्ता देवेंद्र तिवारी ने कहा कि एक तरफ सरकार छात्रों को रोडवेज में फ्री यात्रा करने की घोषण करती है और दूसरी तरफ रोडवेज का निजीकरण करने का प्रयास कर रही है। मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन के जिला प्रधान रामनिवास ने कहा कि धरने पर कहा कि पंजाब का लिपिक हरियाणा के लिपिक से 12 हजार रुपये ज्यादा वेतन लेता है।
रोडवेज को इतना हुआ नुकसान
सिरसा में हड़ताल की वजह से रोडवेज को साढे़ नौ लाख रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, रेलवे को करीब छह लाख रुपये का लाभ हुआ। रोहतक डिपो को आठ लाख रुपये का नुकसान हुआ है। भिवानी डिपो को करीब 11 लाख का नुकसान हुआ।