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कवियों ने शब्दों से व्यवस्था को तोला

Mon, 07 Oct 2013 11:26 PM IST
रेवाड़ी/ब्यूरो
रेवाड़ी/ब्यूरो Updated Mon, 07 Oct 2013 11:26 PM IST
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हरियाणा के जिला रेवाड़ी के बाल भवन में अग्रवाल सभा रेवाड़ी के तत्वावधान में हास्य कवि सम्मेलन करवाया गया। हास्य कवि सम्मेलन में राम किशन भालखीवाले मुख्य अतिथि, जबकि भीमसेन गर्ग विशिष्ट अतिथि थे।
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इन्होंने महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। अग्रवाल सभा के प्रधान राधेश्याम गुप्ता, महाराजा अग्रसेन जयंती के चेयरमैन विनोद मोदी ने मुख्यातिथि और विशिष्ट अतिथि का स्वागत किया।
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कवि सम्मेलन में विश्वविख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास सहित मैनपुरी एटा से कवि सतीश मधुप, काशी बनारस से कवि डॉ. अनिल चौबे, रोहतक से कवि जगबीर राठी, हाथरस से कवि सबरस मुरसानी और अलीगढ़ से कवियित्री कीर्ति माथुर ने शिरकत की।
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कवि सम्मेलन का आगाज कवियत्री कीर्ति माथुर ने मां सरस्वती की वंदना ‘बल-बुद्धि-विद्या का वरदान दीजिए’ ‘चरणों को तेरे है मां गंगा पखारती’ के साथ किया।

मंच संचालन करते कवि डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि तन-मन से देश के लिए कुछ करने का जज्बा हो यही आज के युवाओं से अपेक्षा है।

उन्होंने कहा कि ‘पनाहों में जो आया हो, तो उस पे वार क्या करना, जो दिल हारा हुआ हो, उस पर अधिकार क्या करना।

मोहब्बत का मजा तो कशमकश में है, जो हो मालूम गहराई तो दरिया पार क्या करना’ से वाहवाही लूटी। उनकी प्रसिद्ध रचना ‘कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है’ पर पांडाल तालियों से गूंज उठा।  

मैनपुरी एटा से आए कवि सतीश मधुप ने राजनीतिज्ञों पर कटाक्ष करते कहा कि ‘पाखंडी चाह रहे हैं कि हम उनको भगवान कहें’, ‘घाव दामिनी के देखे तो जड़थल पिघल गए’ से दर्शकों को मार्मिक संदेश दिया।

कवि सबरस मुरसानी ने अपने भाव से एक पति की पीड़ा को व्यक्त करते हुए आज की सामाजिक व्यवस्था पर प्रहार किया।

वाराणसी से आए कवि अनिल चौबे ने भ्रष्टाचार से अमीर बनने की चाह रखने वालों को नुस्खा बताते हुए कहा कि ‘आत्मा का अंतिम संस्कार करके आईए सब भ्रष्ट हो जाएं’।


अलीगढ़ से पधारीं डॉ. कीर्ति माथुर ने ‘मेरे प्यार की कद्र हो, कद्रदान चाहिए, एक चांद सितारों से भरी रात चाहिए’ पेश कर खूब तालियां बटोरीं।

एमडीयू के सांस्कृतिक विभाग के निदेशक कवि जगबीर राठी ने हरियाणवी अंदाज में कई छंदों द्वारा अपनी प्रस्तुति दी।

कवि सम्मेलन का समापन उन्होंने अपनी प्रसिद्ध देशभक्ति से ओतप्रोत ‘तिरंगा’ रचना से किया।
इस अवसर पर बाबू मानसिंह गुप्ता एडवोकेट, ब्रजलाल गोयल, मुरारीलाल अग्रवाल, प्रवीण अग्रवाल सातोंवाले, अरूण गुप्ता, विनयशील, रिपुदमन गुप्ता, अमित गुप्ता, प्रदीप गोयल, लक्ष्मीनारायण, ललित गुप्ता, संजीव गुप्ता, हेमंत अग्रवाल, चरत अग्रवाल, जितेन्द्र जिंदल, बनवारीलाल अग्रवाल व दिनेश गोयल आदि उपस्थित रहे।


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