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कॉलेज में ली बेटी बचाने की शपथ
अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Fri, 10 Jan 2014 08:44 PM IST
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अमर उजाला के ‘बेटी ही बचाएगी’ अभियान से शुक्रवार को द्रोणाचार्य राजकीय महाविद्यालय भी जुड़ गया। कॉलेज के सैकड़ों विद्यार्थियों और स्टाफ ने बेटी बचाने की शपथ ली। सभी ने कहा कि सामाजिक सरोकार से जुड़े इस महत्वपूर्ण व अति संवेदनशील मुद्दे को उठा अखबार ने सराहनीय कार्य किया है। हम सभी इसका हिस्सा बन गर्व महसूस कर रहे हैं।
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हरियाणा के सेंटर ऑफ एक्सिलेंस कॉलेजों में शुमार द्रोणाचार्य राजकीय महाविद्यालय के विद्यार्थियाें ने बेटी बचाने के लिए राधाकृष्णन हॉल में शपथ ली।
सभी ने कहा कि इस अभियान का हिस्सा वह खुद तो बन ही गए हैं, औरों को भी इसे लिए प्रेरित करेंगे। द्रोणाचार्य राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आरके यादव ने विद्यार्थियाें को शपथ दिलाई। सभी ने बेटी को घर और समाज में बराबर का दर्जा दिलाने की कसम खाई।
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प्राचार्य डॉ. आरके यादव ने विद्यार्थियों से कहा कि बेटी समाज की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसको कहीं से भी कमजोर नहीं होने देना है। आइये हम सभी मिलकर यह तय करें कि किसी भी बेटी के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। उन्हें समाज में बराबर का हक और जिम्मेदारी देंगे। कन्या भ्रूण हत्या जैसा अपराध नहीं करेंगे।
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उन्होंने कहा कि ‘अमर उजाला’ के बेटी बचाओ अभियान में हम कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। उसके इस अभियान को हर घर में पहुंचाने का कार्य उनके विद्यार्थी करेंगे।
बेटी सृष्टि की सबसे अनमोल रत्न है। इसकी रक्षा हर किसी का कर्त्तव्य है। ‘अमर उजाला’ का बेटी बचाओ अभियान बहुत अच्छा कदम है।
-प्रो. सुभाष सपड़ा
21वीं सदी में भी जिस प्रकार से बेटियों का अनादर हो रहा है, वह उचित नहीं है। बेटे-बेटियों में फर्क नहीं होना चाहिए।
-जगदंबे वर्मा
अमर उजाला’ का यह अभियान समाज को सकारात्मक दिशा में ले जाएगा। इससे सभी को जुड़ना चाहिए।
-डॉ. मीनाक्षी पांडे
बेटियों और बेटों में कोई फर्क नहीं है। अगर बेटियों को मौका दिया जाए तो वह बेटों से किसी प्रकार से कम नहीं है।
-उषा गोयल
बेटी ही बचाएगी’ अभियान काफी अच्छा कदम है।
-रोहित
बेटी को बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए। मैं सदैव ऐसा ही करूंगा और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करूंगा।
-अमित
अमर उजाला के इस पहल का स्वागत करता हूं।
-रविंद्र
बेटियों और बेटों में किसी प्रकार कर फर्क नहीं है। हर क्षेत्र में बेटियां आगे हैं। उन्हें लड़कों के बराबर मौका देना चाहिए।
-संदीप खटाना