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Panipat News: मंत्रोच्चार के साथ किया याग मंडल विधान
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पानीपत। श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जैन मोहल्ला में त्रिदिवसीय वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ के दूसरे दिन याग मंडल विधान का आयोजन धूमधाम से किया गया। प्रतिष्ठाचार्य जय निशांत भैया टीकमगढ़ वालों ने सर्वप्रथम श्रीजी का अभिषेक, शांति धारा, पूजन व विधान मंत्रोच्चारण के साथ कराई। संगीतकार संगीता जैन एंड पार्टी जबलपुर ने प्रभु का संकीर्तन व भजनों की सुंदर प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। श्रद्धालुओं ने इंद्र इंद्राणी के रूप में प्रभु के चरणों में भाव समर्पित किए।
आचार्य श्रुत सागर महाराज ने कहा कि आनंद ही परमात्मा का स्वरूप है। परमात्मा हमारे मन में ही विराजमान हैं। वह आनंद रूप में हमारे अंदर विराजमान है। उन्होंने कहा कि प्रातः काल उठते ही आप लोग अपनी हथेलियों के दर्शन जरूर करें। ऐसा करने से हमें 24 तीर्थंकर सिद्ध शिला और शाश्वत भूमि श्री सम्मेद शिखर जी के दर्शन होते हैं, क्योंकि हथेली के अग्रभाग में 24 पोर होते हैं जो 24 तीर्थंकरों का प्रतीक है। हथेली के मध्य में सिद्ध शिला विराजमान है और हथेली के मूल भाग में निर्वाण स्थल सम्मेद शिखरजी विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि स्थापना मंत्र पूजन में नहीं अपितु अपने दिल में करनी है।
उन्होंने पारस का संधि विच्छेद करते हुए कहा कि जहां पर हमें रस की प्राप्ति हो जहां पर हमें आनंद रस की प्राप्ति हो, वही सच्चा पारसनाथ का दरबार है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर तीन लोक के नाथ, तीन लोक के शिरोमणि ऋषभदेव भगवान मात्र जैन में ही नहीं पूजे जाते व उनका वर्णन सिर्फ जैन शास्त्रों में ही नहीं अपितु ऋषभदेव का वर्णन वेदों, भागवत, पुराणों में भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि लोग घड़ी-घड़ी मोबाइल को देखते हैं, परंतु न जाने किस घड़ी में क्या होगा, किसी को पता नहीं जिंदगी में कहां से आए थे और कहां जाना है? ऐसे में लोगों को प्रभु का पूजन करना चाहिए।
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मां कौशल ने बताया कि चार सौभाग्यशाली परिवारों द्वारा आचार्य श्रुत सागर महाराज को शास्त्र भेंट किए। जैन संत अपने पास पिच्छी, कमंडल और शास्त्र रखते हैं। इस दौरान मंदिर निर्माण के लिए दान की घोषणा की गई। विशेष रूप से शाइनी जैन ने अपनी बाली और रिहाना जैन ने अपने सोने का कड़ा मंदिर निर्माण के लिए दान में दिया। मनोज जैन ने इन बच्चों के दान की अनुमोदना की और उन्होंने कहा कि यह जैन धर्म की सुंदरता है कि छोटे-छोटे बच्चे भी दान के लिए अग्रसर रहते हैं। इस मौके पर सुरेंद्र जैन, राजेश जैन, भूपेंद्र जैन, दिनेश जैन, सुरेश जैन, संजीव जैन, श्री दिगंबर जैन पंचायत के प्रधान कुलदीप जैन, उप प्रधान सुरेश जैन, प्रबंधक मुकेश जैन, सचिव मनोज जैन, कोषाध्यक्ष सुशील जैन, जैन धर्मशाला के प्रबंधक पुनीत जैन, प्रदीप जैन सुनील जैन, अधिवक्ता मेहुल जैन व पंकज जैन मौजूद रहे।
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आचार्य श्रुत सागर महाराज ने कहा कि आनंद ही परमात्मा का स्वरूप है। परमात्मा हमारे मन में ही विराजमान हैं। वह आनंद रूप में हमारे अंदर विराजमान है। उन्होंने कहा कि प्रातः काल उठते ही आप लोग अपनी हथेलियों के दर्शन जरूर करें। ऐसा करने से हमें 24 तीर्थंकर सिद्ध शिला और शाश्वत भूमि श्री सम्मेद शिखर जी के दर्शन होते हैं, क्योंकि हथेली के अग्रभाग में 24 पोर होते हैं जो 24 तीर्थंकरों का प्रतीक है। हथेली के मध्य में सिद्ध शिला विराजमान है और हथेली के मूल भाग में निर्वाण स्थल सम्मेद शिखरजी विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि स्थापना मंत्र पूजन में नहीं अपितु अपने दिल में करनी है।
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उन्होंने पारस का संधि विच्छेद करते हुए कहा कि जहां पर हमें रस की प्राप्ति हो जहां पर हमें आनंद रस की प्राप्ति हो, वही सच्चा पारसनाथ का दरबार है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर तीन लोक के नाथ, तीन लोक के शिरोमणि ऋषभदेव भगवान मात्र जैन में ही नहीं पूजे जाते व उनका वर्णन सिर्फ जैन शास्त्रों में ही नहीं अपितु ऋषभदेव का वर्णन वेदों, भागवत, पुराणों में भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि लोग घड़ी-घड़ी मोबाइल को देखते हैं, परंतु न जाने किस घड़ी में क्या होगा, किसी को पता नहीं जिंदगी में कहां से आए थे और कहां जाना है? ऐसे में लोगों को प्रभु का पूजन करना चाहिए।
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मां कौशल ने बताया कि चार सौभाग्यशाली परिवारों द्वारा आचार्य श्रुत सागर महाराज को शास्त्र भेंट किए। जैन संत अपने पास पिच्छी, कमंडल और शास्त्र रखते हैं। इस दौरान मंदिर निर्माण के लिए दान की घोषणा की गई। विशेष रूप से शाइनी जैन ने अपनी बाली और रिहाना जैन ने अपने सोने का कड़ा मंदिर निर्माण के लिए दान में दिया। मनोज जैन ने इन बच्चों के दान की अनुमोदना की और उन्होंने कहा कि यह जैन धर्म की सुंदरता है कि छोटे-छोटे बच्चे भी दान के लिए अग्रसर रहते हैं। इस मौके पर सुरेंद्र जैन, राजेश जैन, भूपेंद्र जैन, दिनेश जैन, सुरेश जैन, संजीव जैन, श्री दिगंबर जैन पंचायत के प्रधान कुलदीप जैन, उप प्रधान सुरेश जैन, प्रबंधक मुकेश जैन, सचिव मनोज जैन, कोषाध्यक्ष सुशील जैन, जैन धर्मशाला के प्रबंधक पुनीत जैन, प्रदीप जैन सुनील जैन, अधिवक्ता मेहुल जैन व पंकज जैन मौजूद रहे।