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Panipat News: युवा पीढ़ी हिंदी के पठन, लेखन के महत्व से हो रही दूर
Sun, 14 Sep 2025 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sun, 14 Sep 2025 01:56 AM IST
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पिंकी श्योराण
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रति गहरी भावना और समर्पण का प्रतीक है। आज की युवा पीढ़ी शुद्ध हिंदी के पठन, लेखन, समझ और इसके महत्व से दूर होती जा रही है। युवा हिंदी को सीख नहीं पा रहे। उनका हिंदी लेखन भी अशुद्ध है। यदि कोई युवा हिंदी लिखना या बोलता है तो उसमें अंग्रेजी के शब्दों का बहुतायत में प्रयोग होता है। यही कारण है कि हिंदी का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। हमें हिंदी को सशक्त बनाने के लिए हिंदी की बारीकियों को समझना होगा। इसके बाद नियमित अध्ययन से हिंदी भाषा को समृद्ध बनाना होगा। जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के हिंदी विशेषज्ञों ने हिंदी की दिशा और दशा पर अपने विचार साझा किए।
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अधिक तकनीकी शब्दावली विकसित की जाए
अंग्रेजी का प्रभाव हमारी दैनिक भाषा पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। हिंदी भाषी लोग भी अपनी बातचीत में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करते हैं जिससे हिंदी भाषा का शुद्ध रूप से प्रयोग कम हो गया है। हिंदी को शिक्षा के हर स्तर पर मजबूत बनाना चाहिए।
- लक्ष्मी नारायण, वरिष्ठ प्रवक्ता हिंदी, डाइट पानीपत
रोजगार और फैशन की भाषा बनी अंग्रेजी
आज हिंदी को राजभाषा के तौर पर जो सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए, उससे वंचित दिखाई देती है। हिंदी को पुरानी पीढ़ी की भाषा मानने वाली युवा पीढ़ी इसको बोलने या पढ़ने में सकुचाने लगी है। उनकी रुचि हिंदी से अधिक अंग्रेजी सीखने में है। रोजगार और फैशन की भाषा अंग्रेजी बन चुकी है।
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- तकदीर सिंह, सहायक प्रोफेसर, मनोविज्ञान, डायट पानीपत
रोजगार की भाषा बने हिंदी
हिंदी भाषा एक वैज्ञानिक भाषा है। दौड़ती-भागती युवा पीढ़ी उस भाषा पर मेहनत करने से कतरा रही है। हिंदी को उसका सम्मान वापस दिलाने के लिए उसे रोजगार की भाषा बनाना अत्यंत आवश्यक है। विदेशों में भी जिस भाषा को सम्मान मिल रहा है, अब आवश्यकता है कि उसे अपने देश में भी सम्मान और अधिकार मिले।
- ज्योति दहिया, हिंदी अध्यापिका, आर्य बाल भारती पब्लिक स्कूल
नई पीढ़ी ने हिंदी से मूंद ली आंखें
वर्तमान में जिस भाषा को राजभाषा का दर्जा प्राप्त है, वह अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। इस प्रकार की भाषा के प्रति अनदेखी किसी भी देश में देखने को नहीं मिलती। नई पीढ़ी ने तो इससे आंखें मूंद ली है। यदि इस प्रकार स्थिति बनी रही तो अपनी भाषा का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा।
- रवींद्र सिंह, हिंदी प्राध्यापक, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बड़ौली
हिंदी भाषा की उपेक्षा की जा रही
वर्तमान समय में अंग्रेजी भाषा को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में अपने लोगों द्वारा ही हिंदी भाषा की उपेक्षा की जा रही हैं। सभी विकसित व समृद्ध देश अपने सभी कार्य अपनी-अपनी भाषाओं में कर रहे है। भारतीयों के लिए आवश्यक है कि उनकी संतान अपनी मातृभाषा अवश्य सीखें।
- नरेंद्र शास्त्री, संस्कृत अध्यापक, राजकीय स्कूल कालखा
हिंदुस्तान की भाषा है हिंदी : कविता मलिक
निसंदेह हिंदी किसी एक प्रांत या क्षेत्र विशेष की भाषा नहीं है अपितु वह हिंदुस्तान की भाषा है। साहित्यिक हिंदी और बोलचाल की हिंदी में भिन्नता होती है। बोलचाल की हिंदी वास्तव में बोली मिश्रित भाषा है।
- कविता मलिक, हिंदी प्राध्यापिका
हिंदी है मान हिंद का इसका करें सम्मान
आज का युवा अंग्रेजी भाषा में बोलकर स्वयं को शिक्षित होने का प्रमाण तो देता है, वहीं दूसरी ओर अपने राष्ट्र के सम्मान की प्रतीक हिंदी को दरकिनार कर रहा है। हिंदी अपने हिंद का मान है। मात्र एक दिन ही हिंदी भाषा को समर्पित ना करके इसे कार्यालय कार्यों में प्रमुख भाषा के रूप में अपनाएं।
- नीलम पाढा, हिंदी अध्यापिका, आर्य कन्या विद्यालय, वीर भवन
युवा हिंदी अपनाने को आएं आगे
हिंदी राजभाषा है। इसको उचित सम्मान दिलवाने के लिए दृढ़ संकल्प ऊर्जा और आदमी साहस की जरूरत है। इसको लेकर शिक्षित युवाओं को हिंदी अपनाने के लिए आगे आना चाहिए। उनके आगे आने पर भाषा को मजबूती मिलेगी।
- संगीता कुंडू, संस्कृत प्राध्यापिका, कन्या माध्यमिक विद्यालय, निजामपुर।
बच्चों को हिंदी साहित्य से जोड़ें
विश्व में हिंदी भाषा को तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा में शामिल किया जाता है। परंतु फिर भी आज की पीढ़ी इसको ठीक से सीखने या लिखने में उत्साहित नहीं हो पा रही है। यदि बच्चों को हिंदी साहित्य से जोड़ा जाए तो हिंदी के विकास में उल्लेखनीय मदद मिलेगी।
- बोधराज श्योराण, जेबीटी, जीपीएस वार्ड-10
प्राथमिक शिक्षा से ही हिंदी पर ध्यान देने की जरूरत
प्राथमिक शिक्षा से ही विद्यार्थियों पर ध्यान देने की जरूरत है। जिस प्रकार से नई शिक्षा नीति में निपुण अभियान के अंतर्गत कक्षा एक से तीन के लिए भाषा में प्रवीणता के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रयास पर जोर दिया गया है ताकि बच्चा समझ के साथ पढ़, लिख और बोल सके।
- पिंकी, जेबीटी शिक्षिका, फरीदपुर
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पानीपत। हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रति गहरी भावना और समर्पण का प्रतीक है। आज की युवा पीढ़ी शुद्ध हिंदी के पठन, लेखन, समझ और इसके महत्व से दूर होती जा रही है। युवा हिंदी को सीख नहीं पा रहे। उनका हिंदी लेखन भी अशुद्ध है। यदि कोई युवा हिंदी लिखना या बोलता है तो उसमें अंग्रेजी के शब्दों का बहुतायत में प्रयोग होता है। यही कारण है कि हिंदी का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। हमें हिंदी को सशक्त बनाने के लिए हिंदी की बारीकियों को समझना होगा। इसके बाद नियमित अध्ययन से हिंदी भाषा को समृद्ध बनाना होगा। जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के हिंदी विशेषज्ञों ने हिंदी की दिशा और दशा पर अपने विचार साझा किए।
अधिक तकनीकी शब्दावली विकसित की जाए
अंग्रेजी का प्रभाव हमारी दैनिक भाषा पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। हिंदी भाषी लोग भी अपनी बातचीत में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करते हैं जिससे हिंदी भाषा का शुद्ध रूप से प्रयोग कम हो गया है। हिंदी को शिक्षा के हर स्तर पर मजबूत बनाना चाहिए।
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- लक्ष्मी नारायण, वरिष्ठ प्रवक्ता हिंदी, डाइट पानीपत
रोजगार और फैशन की भाषा बनी अंग्रेजी
आज हिंदी को राजभाषा के तौर पर जो सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए, उससे वंचित दिखाई देती है। हिंदी को पुरानी पीढ़ी की भाषा मानने वाली युवा पीढ़ी इसको बोलने या पढ़ने में सकुचाने लगी है। उनकी रुचि हिंदी से अधिक अंग्रेजी सीखने में है। रोजगार और फैशन की भाषा अंग्रेजी बन चुकी है।
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- तकदीर सिंह, सहायक प्रोफेसर, मनोविज्ञान, डायट पानीपत
रोजगार की भाषा बने हिंदी
हिंदी भाषा एक वैज्ञानिक भाषा है। दौड़ती-भागती युवा पीढ़ी उस भाषा पर मेहनत करने से कतरा रही है। हिंदी को उसका सम्मान वापस दिलाने के लिए उसे रोजगार की भाषा बनाना अत्यंत आवश्यक है। विदेशों में भी जिस भाषा को सम्मान मिल रहा है, अब आवश्यकता है कि उसे अपने देश में भी सम्मान और अधिकार मिले।
- ज्योति दहिया, हिंदी अध्यापिका, आर्य बाल भारती पब्लिक स्कूल
नई पीढ़ी ने हिंदी से मूंद ली आंखें
वर्तमान में जिस भाषा को राजभाषा का दर्जा प्राप्त है, वह अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। इस प्रकार की भाषा के प्रति अनदेखी किसी भी देश में देखने को नहीं मिलती। नई पीढ़ी ने तो इससे आंखें मूंद ली है। यदि इस प्रकार स्थिति बनी रही तो अपनी भाषा का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा।
- रवींद्र सिंह, हिंदी प्राध्यापक, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बड़ौली
हिंदी भाषा की उपेक्षा की जा रही
वर्तमान समय में अंग्रेजी भाषा को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में अपने लोगों द्वारा ही हिंदी भाषा की उपेक्षा की जा रही हैं। सभी विकसित व समृद्ध देश अपने सभी कार्य अपनी-अपनी भाषाओं में कर रहे है। भारतीयों के लिए आवश्यक है कि उनकी संतान अपनी मातृभाषा अवश्य सीखें।
- नरेंद्र शास्त्री, संस्कृत अध्यापक, राजकीय स्कूल कालखा
हिंदुस्तान की भाषा है हिंदी : कविता मलिक
निसंदेह हिंदी किसी एक प्रांत या क्षेत्र विशेष की भाषा नहीं है अपितु वह हिंदुस्तान की भाषा है। साहित्यिक हिंदी और बोलचाल की हिंदी में भिन्नता होती है। बोलचाल की हिंदी वास्तव में बोली मिश्रित भाषा है।
- कविता मलिक, हिंदी प्राध्यापिका
हिंदी है मान हिंद का इसका करें सम्मान
आज का युवा अंग्रेजी भाषा में बोलकर स्वयं को शिक्षित होने का प्रमाण तो देता है, वहीं दूसरी ओर अपने राष्ट्र के सम्मान की प्रतीक हिंदी को दरकिनार कर रहा है। हिंदी अपने हिंद का मान है। मात्र एक दिन ही हिंदी भाषा को समर्पित ना करके इसे कार्यालय कार्यों में प्रमुख भाषा के रूप में अपनाएं।
- नीलम पाढा, हिंदी अध्यापिका, आर्य कन्या विद्यालय, वीर भवन
युवा हिंदी अपनाने को आएं आगे
हिंदी राजभाषा है। इसको उचित सम्मान दिलवाने के लिए दृढ़ संकल्प ऊर्जा और आदमी साहस की जरूरत है। इसको लेकर शिक्षित युवाओं को हिंदी अपनाने के लिए आगे आना चाहिए। उनके आगे आने पर भाषा को मजबूती मिलेगी।
- संगीता कुंडू, संस्कृत प्राध्यापिका, कन्या माध्यमिक विद्यालय, निजामपुर।
बच्चों को हिंदी साहित्य से जोड़ें
विश्व में हिंदी भाषा को तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा में शामिल किया जाता है। परंतु फिर भी आज की पीढ़ी इसको ठीक से सीखने या लिखने में उत्साहित नहीं हो पा रही है। यदि बच्चों को हिंदी साहित्य से जोड़ा जाए तो हिंदी के विकास में उल्लेखनीय मदद मिलेगी।
- बोधराज श्योराण, जेबीटी, जीपीएस वार्ड-10
प्राथमिक शिक्षा से ही हिंदी पर ध्यान देने की जरूरत
प्राथमिक शिक्षा से ही विद्यार्थियों पर ध्यान देने की जरूरत है। जिस प्रकार से नई शिक्षा नीति में निपुण अभियान के अंतर्गत कक्षा एक से तीन के लिए भाषा में प्रवीणता के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रयास पर जोर दिया गया है ताकि बच्चा समझ के साथ पढ़, लिख और बोल सके।
- पिंकी, जेबीटी शिक्षिका, फरीदपुर

पिंकी श्योराण

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