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Panipat News: फिर बदला मौसम, बूंदाबांदी ने बढ़ाई ठिठुरन
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पानीपत। पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम में एक बार फिर से बदलाव आ गया है। शनिवार दिनभर हल्के बादल में धूप की लुका छिपी चलती रही। शाम के समय बूंदाबांदी के साथ शीतलहर चलने पर ठिठुरन बढ़ गई।
पिछले एक महीने में पांचवीं बार बारिश व बूंदाबांदी से अधिकतम और न्यूनतम तापमान एक दो डिग्री तक कम हो गया। करीब 20 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चलने पर रात के समय ठिठुरन बढ़ गई। बूंदाबांदी से गेहूं उत्पादक किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। मौसम विशेषज्ञों ने अगले 24 घंटे बूंदाबांदी का अनुमान जताया है।
जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह ही आसमान में हल्के बादल छा गए। दोपहर में कुछ देर के लिए हल्की धूप निकली लेकिन शीतलहर के चलते किसी प्रकार की राहत नहीं मिली। शाम के समय आसमान में बादल घिर आए। शाम को करीब सात बजे एक साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई। बूंदाबांदी देर रात तक चलती रही। इसके साथ करीब 20 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चली। बूंदाबांदी और तेज हवा चलने से ठिठुरन बढ़ गई। अधिकतम तापमान 13.1 और न्यूनतम तापमान 6.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
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कृषि विज्ञान केंद्र उझा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजबीर आर्य ने बताया कि शनिवार और रविवार को बारिश का पूर्वानुमान जताया गया था। 24 घंटों में तेज हवा के साथ बारिश आने की संभावना है।
किसानों के खिले चेहरे, सिंचाई अभी न करें ः जिला में करीब 85 हजार हेक्टेयर में गेहूं और करीब 10 हजार हेक्टेयर में सरसों की फसल है। इस मौसम में बारिश और बूंदाबांदी गेहूं और सरसों दोनों फसलों के लिए फायदेमंद है। इस समय किसान गेहूं में दूसरी और तीसरी सिंचाई की तैयारी में हैं। इस दौरान बूंदाबांदी से गेहूं में फुटाव होने के साथ बढ़वार होगी। वहीं बारिश से सरसों की फसल बीमारी से मुक्त होगी। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अभी गेहूं की सिंचाई न करने की सलाह दी है।
मौसम बदलने से बढ़ी बीमारों की संख्या बढ़ी ः सर्दी में मौसम के लगातार बदलाव से बुखार और जुकाम समेत कई तरह की बीमारी बढ़ गई है। खासकर दमा के रोगियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एलआर मदान ने बताया कि ठंड में बुजुर्गों की सांस की नली कमजोर हो जाती हैं। ऐसे में उनको सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
पांचवीं बार हो चुकी मध्यम से तेज बारिश ः मौसम विशेषज्ञों के अनुसार एक महीने में पांचवीं बार मध्यम से तेज बारिश हो चुकी है। नौ दिसंबर को मौसम में बदलाव के साथ इसराना खंड में एक एमएम बारिश हुई। इसके बाद 27 और 28 दिसंबर को तेज बारिश हुई। पांच जनवरी को फिर से मौसम में बदलाव हुआ।
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पिछले एक महीने में पांचवीं बार बारिश व बूंदाबांदी से अधिकतम और न्यूनतम तापमान एक दो डिग्री तक कम हो गया। करीब 20 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चलने पर रात के समय ठिठुरन बढ़ गई। बूंदाबांदी से गेहूं उत्पादक किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। मौसम विशेषज्ञों ने अगले 24 घंटे बूंदाबांदी का अनुमान जताया है।
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जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह ही आसमान में हल्के बादल छा गए। दोपहर में कुछ देर के लिए हल्की धूप निकली लेकिन शीतलहर के चलते किसी प्रकार की राहत नहीं मिली। शाम के समय आसमान में बादल घिर आए। शाम को करीब सात बजे एक साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई। बूंदाबांदी देर रात तक चलती रही। इसके साथ करीब 20 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चली। बूंदाबांदी और तेज हवा चलने से ठिठुरन बढ़ गई। अधिकतम तापमान 13.1 और न्यूनतम तापमान 6.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
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कृषि विज्ञान केंद्र उझा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजबीर आर्य ने बताया कि शनिवार और रविवार को बारिश का पूर्वानुमान जताया गया था। 24 घंटों में तेज हवा के साथ बारिश आने की संभावना है।
किसानों के खिले चेहरे, सिंचाई अभी न करें ः जिला में करीब 85 हजार हेक्टेयर में गेहूं और करीब 10 हजार हेक्टेयर में सरसों की फसल है। इस मौसम में बारिश और बूंदाबांदी गेहूं और सरसों दोनों फसलों के लिए फायदेमंद है। इस समय किसान गेहूं में दूसरी और तीसरी सिंचाई की तैयारी में हैं। इस दौरान बूंदाबांदी से गेहूं में फुटाव होने के साथ बढ़वार होगी। वहीं बारिश से सरसों की फसल बीमारी से मुक्त होगी। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अभी गेहूं की सिंचाई न करने की सलाह दी है।
मौसम बदलने से बढ़ी बीमारों की संख्या बढ़ी ः सर्दी में मौसम के लगातार बदलाव से बुखार और जुकाम समेत कई तरह की बीमारी बढ़ गई है। खासकर दमा के रोगियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एलआर मदान ने बताया कि ठंड में बुजुर्गों की सांस की नली कमजोर हो जाती हैं। ऐसे में उनको सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
पांचवीं बार हो चुकी मध्यम से तेज बारिश ः मौसम विशेषज्ञों के अनुसार एक महीने में पांचवीं बार मध्यम से तेज बारिश हो चुकी है। नौ दिसंबर को मौसम में बदलाव के साथ इसराना खंड में एक एमएम बारिश हुई। इसके बाद 27 और 28 दिसंबर को तेज बारिश हुई। पांच जनवरी को फिर से मौसम में बदलाव हुआ।