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पानीपत: शहरी विधायक ने विधानसभा में उठाया बेसहारा पशुओं की समस्या का मुद्दा
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पानीपत। शहर में बेसहारा घूम रहे पशुओं को मुद्दा मंगलवार को शहरी विधायक प्रमोद विज ने विधानसभा में उठाया। उन्होंने सरकार से गोशालाओं को अधिक फंड देने की मांग की, जिससे कोई भी गोशाला बेसहारा पशुओं को लेने से मना न कर सके।
शहरी विधायक ने कहा कि पहले पशु खेतीबाड़ी के उपयोग में आ जाते थेष अब खुले में छोड़ दिया जाता है। उन्होंने कुछ दिन पहले गाय की टक्कर से कच्चा कैंप निवासी मनप्रीत की मौत की भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शहर में कई गोशालाएं हैं, लेकिन बेसहारा पशुओं को लेने से मना कर देती हैं। बेसहारा पशुओं की समस्या से निजात के लिए ठोस व्यवस्था की मांग की।
विधायक ने शहर के औद्योगिक सेक्टरों की समस्याओं को भी उठाया। उन्होंने कहा कि नगर निगम, एचएसवीपी और एचएसआईडीसी में तालमेल ही नहीं है। औद्योगिक क्षेत्रों को पूर्ण रूप से नगर निगम या किस एक विभाग को देने की मांग रखी। शहर के कुछ एचएसवीपी, कुछ एचएसआईडी तो कुछ नगर निगम के पास हैं। तालमेल की कमी की वजह से विकास कार्य एवं मूलभूत सुविधा मुहैया नहीं होने पर जनता को परेशानी होती है।
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ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया का जिक्र करते हुए कहा कि ये एरिया 1956 में बना। इसे एचएसआईडीसी को हैंडओवर किया गया। इस समयावधि में संपत्तियों को बंटवारा भी हो चुका है लेकिन डिवीजन का नियम नहीं है, जिससे आगे इन संपत्तियों की रजिस्ट्री तक नहीं हो पा रही हैं। यहां का डेवलपमेंट का काम तो एचएसआईआईडीसी के पास है, लेकिन उनके पास मेंटीनेंस के साधन नहीं हैं। पानी की सप्लाई, स्ट्रॉम वाटर निगम करता है जबकि सीवरेज का काम एचएसआईडीसी के पास तो है लेकिन उनके पास इसके लिए न साधन हैं और न फंड। इसी प्रकार एचएसवीपी के कुछ औद्योगिक सेक्टर भी एचएसआईडीसी के पास हैं। इनमें सफाई, स्ट्रॉम वाटर, लाइट निगम और रोड का काम निगम को दिया गया है लेकिन सीवरेज का एचएसवीपी के पास ही है।
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शहरी विधायक ने कहा कि पहले पशु खेतीबाड़ी के उपयोग में आ जाते थेष अब खुले में छोड़ दिया जाता है। उन्होंने कुछ दिन पहले गाय की टक्कर से कच्चा कैंप निवासी मनप्रीत की मौत की भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शहर में कई गोशालाएं हैं, लेकिन बेसहारा पशुओं को लेने से मना कर देती हैं। बेसहारा पशुओं की समस्या से निजात के लिए ठोस व्यवस्था की मांग की।
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विधायक ने शहर के औद्योगिक सेक्टरों की समस्याओं को भी उठाया। उन्होंने कहा कि नगर निगम, एचएसवीपी और एचएसआईडीसी में तालमेल ही नहीं है। औद्योगिक क्षेत्रों को पूर्ण रूप से नगर निगम या किस एक विभाग को देने की मांग रखी। शहर के कुछ एचएसवीपी, कुछ एचएसआईडी तो कुछ नगर निगम के पास हैं। तालमेल की कमी की वजह से विकास कार्य एवं मूलभूत सुविधा मुहैया नहीं होने पर जनता को परेशानी होती है।
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ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया का जिक्र करते हुए कहा कि ये एरिया 1956 में बना। इसे एचएसआईडीसी को हैंडओवर किया गया। इस समयावधि में संपत्तियों को बंटवारा भी हो चुका है लेकिन डिवीजन का नियम नहीं है, जिससे आगे इन संपत्तियों की रजिस्ट्री तक नहीं हो पा रही हैं। यहां का डेवलपमेंट का काम तो एचएसआईआईडीसी के पास है, लेकिन उनके पास मेंटीनेंस के साधन नहीं हैं। पानी की सप्लाई, स्ट्रॉम वाटर निगम करता है जबकि सीवरेज का काम एचएसआईडीसी के पास तो है लेकिन उनके पास इसके लिए न साधन हैं और न फंड। इसी प्रकार एचएसवीपी के कुछ औद्योगिक सेक्टर भी एचएसआईडीसी के पास हैं। इनमें सफाई, स्ट्रॉम वाटर, लाइट निगम और रोड का काम निगम को दिया गया है लेकिन सीवरेज का एचएसवीपी के पास ही है।