फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   Purushottam month is not just a month of rituals, but it is also a month of purifying one's inner self: Pandit Brijkishore Shastri

पुरुषोत्तम मास केवल कर्मकांड का महीना नहीं है, बल्कि यह अपने अंतर्मन को शुद्ध करने का है : पंडित बृजकिशोर शास्त्री

Thu, 04 Jun 2026 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Thu, 04 Jun 2026 01:12 AM IST
विज्ञापन
Purushottam month is not just a month of rituals, but it is also a month of purifying one's inner self: Pandit Brijkishore Shastri
सनातन धर्म मंदिर पुरुषोत्तम मास कथा में पूजा करते श्रद्धालु। स्रोत : मंदिर
पानीपत। कथावाचक पंडित बृजकिशोर शास्त्री ने कहा कि पुरुषोत्तम मास केवल कर्मकांड का महीना नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और अहंकार त्याग का अवसर है। इस पवित्र माह में व्यक्ति को अपने अंतर्मन को निर्मल बनाकर भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में पूर्ण शरणागति प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।
विज्ञापन

उन्होंने बुधवार को श्री सनातन धर्म मंदिर, मॉडल टाउन में आयोजित पुरुषोत्तम मास (मलमास) कथा के 18वें दिन व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए यह संदेश दिया।
विज्ञापन


पंडित बृजकिशोर शास्त्री ने कथा के दौरान राजा दृढ़धन्वा का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि राजा दृढ़धन्वा अत्यंत प्रतापी, धर्मात्मा और पुण्यवान थे, लेकिन उन्हें अपने वैभव और पुण्य कर्मों पर अहंकार हो गया था। जब पुरुषोत्तम मास आया तो उन्होंने इसकी महत्ता को नजरअंदाज कर व्रत और पूजन नहीं किया। इस भूल के कारण उन्हें अगले जन्म में अनेक कष्टों का सामना करना पड़ा। बाद में अपनी त्रुटि का बोध होने पर उन्होंने विधि-विधान से पुरुषोत्तम मास का व्रत और पूजन किया, जिससे उन्हें मोक्ष का मार्ग प्राप्त हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन




उन्होंने कहा कि इस प्रसंग से स्पष्ट होता है कि भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं है। ईश्वर के नियमों और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना ही सच्ची मानवता और श्रद्धा का परिचायक है। कथा के दौरान उन्होंने द्रौपदी के पूर्व जन्म का प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने बताया कि पूर्व जन्म में द्रौपदी एक ब्राह्मण कन्या थीं, जिनका नाम मेधावी था।

उन्होंने कहा कि माता-पिता के निधन के बाद वे अकेली रह गई थीं। इसी दौरान महर्षि दुर्वासा उनके आश्रम पहुंचे और उन्हें जीवन के दुखों से मुक्ति पाने के लिए पुरुषोत्तम मास का व्रत करने का उपदेश दिया।


मंदिर सभा के प्रधान तरुण गांधी ने कहा कि भगवान के किसी भी स्वरूप, धार्मिक अनुष्ठान या पवित्र काल का अनादर नहीं करना चाहिए। कई बार अनजाने में कही या की गई बातें भी व्यक्ति के जीवन और भाग्य को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि पुरुषोत्तम मास में श्रद्धा और भक्ति से किया गया छोटा-सा जप, तप और दान भी अनेक पापों का नाश करने की क्षमता रखता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed