{"_id":"65076264ca67ba05fb05dce5","slug":"park-in-tdi-in-the-name-of-martyr-announcement-of-job-to-wife-and-help-of-rs-50-lakh-panipat-news-c-244-1-pnp1001-6060-2023-09-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: शहीद के नाम टीडीआई में पार्क, पत्नी को नौकरी और 50 लाख की मदद का एलान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: शहीद के नाम टीडीआई में पार्क, पत्नी को नौकरी और 50 लाख की मदद का एलान
विज्ञापन
पानीपत। शहीद मेजर आशीष धौंचक के नाम पर टीडीआई में पार्क और पैतृक गांव बिंझौल में स्वागत द्वार बनाया जाएगा। शहीद परिवार को सरकार की तरफ से 50 लाख रुपये नकद और पत्नी ज्योति को योग्यता अनुसार सरकारी नौकरी दी जाएगी। शहीद के पानीपत टीडीआई स्थित आवास पर शोक व्यक्त करने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उक्त घोषणा की।
पलवल से अंबाला जाते समय रविवार को दोपहर में मुख्यमंत्री कुछ देर के लिए पानीपत में रुके। इस दौरान वे शहीद मेजर आशीष धौंचक के परिजनों से मिलने पहुंचे। करीब 1:50 बजे शहीद के घर पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 20 मिनट तक रुके। उन्होंने पहले शहीद के पिता लालचंद से बात की और उनको ढांढस बंधाया। इसके बाद शहीद की पत्नी ज्योति, मां कमला देवी और परिजनों से मिले। उन्होंने कहा कि मेजर आशीष ने मां भारती की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। दुख की इस घड़ी में सरकार शहीद के परिजनों के साथ खड़ी है।
उन्होंने कहा कि मेजर आशीष को सर्वोच्च बलिदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा। विदित हो कि शहीद मेजर आशीष अनंतनाग में आतंकवादियों के साथ लड़ते हुए शहीद हो गए थे। दो गोली लगने के बाद भी वे मोर्चे पर डटे रहे, जिस कारण अत्यधिक खून बहने से उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनका पार्थिव शरीर शुक्रवार को पानीपत लाया गया था, जहां उनके पिता लालचंद व चचेरे भाई मेजर विकास ने उनको मुखाग्नि दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पलवल से अंबाला जाते समय रविवार को दोपहर में मुख्यमंत्री कुछ देर के लिए पानीपत में रुके। इस दौरान वे शहीद मेजर आशीष धौंचक के परिजनों से मिलने पहुंचे। करीब 1:50 बजे शहीद के घर पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 20 मिनट तक रुके। उन्होंने पहले शहीद के पिता लालचंद से बात की और उनको ढांढस बंधाया। इसके बाद शहीद की पत्नी ज्योति, मां कमला देवी और परिजनों से मिले। उन्होंने कहा कि मेजर आशीष ने मां भारती की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। दुख की इस घड़ी में सरकार शहीद के परिजनों के साथ खड़ी है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि मेजर आशीष को सर्वोच्च बलिदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा। विदित हो कि शहीद मेजर आशीष अनंतनाग में आतंकवादियों के साथ लड़ते हुए शहीद हो गए थे। दो गोली लगने के बाद भी वे मोर्चे पर डटे रहे, जिस कारण अत्यधिक खून बहने से उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनका पार्थिव शरीर शुक्रवार को पानीपत लाया गया था, जहां उनके पिता लालचंद व चचेरे भाई मेजर विकास ने उनको मुखाग्नि दी थी।
विज्ञापन