{"_id":"6639789162377b3f4b0658e4","slug":"parasnath-seated-on-the-new-altar-devotees-gathered-for-darshan-panipat-news-c-244-1-pnp1001-117876-2024-05-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: नवीन वेदी पर पारसनाथ विराजमान, दर्शनों को उमड़े भक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: नवीन वेदी पर पारसनाथ विराजमान, दर्शनों को उमड़े भक्त
विज्ञापन
पानीपत। श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जैन मोहल्ला में नवीन वेदी पर पारसनाथ भगवान को विराजमान किया गया। पहले दिन ही श्रद्धालु दर्शनों के उमड़ पड़े। इसके साथ त्रि-दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का समापन हो गया।
श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में महोत्सव के अंतर्गत सोमवार को प्रात: काल में अभिषेक और शांतिधारा की रस्म की गई। इसके साथ नव वेदी पर पारसनाथ भगवान को विराजमान किया गया। आर्किटेक्ट रीना जैन की देखरेख में उनकी टीम ने मशीन की मदद से मूर्ति को विराजमान किया। इसको लेकर लोगों में उत्सुकता भी बनी रही। पूजन विधान कार्यक्रम प्रतिष्ठाचार्य जय निशांत भैया टीकमगढ़ वालों ने संपन्न कराया। आचार्य श्री 108 श्रुतसागर महाराज व साध्वी मां कौशल के पावन सानिध्य में वेदी प्रतिष्ठा की मांगलिक क्रियाएं संपादित की। मुकेश जैन व मनोज जैन ने बोलियों के माध्यम से सौभाग्यवती महिलाओं को वेदी शुद्धि, जाप, कलश, अखंड जोत, अष्ट प्रतिहार्य, अष्ट मंगल, जिनवाणी व चंवर स्थापना करने का सौभाग्य प्राप्त कराया। साध्वी मां कौशल ने अपने प्रवचन में कहा कि मेरा सपना था कि मैं जहां जन्मी और जहां पर मैंने अपनी शिक्षा और धर्म शिक्षा को प्राप्त किया है, उस पावन मंदिर का जीर्णोद्धार कराऊं। यह प्रेरणा दो वर्ष पहले महावीर जयंती के अवसर पर भगवान पारसनाथ से ही प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि यह मंदिर जिनेंद्र वर्णी की प्रेरणा से बना था और उन्हीं के सानिध्य में इस मंदिर की 1961 में भव्य प्रतिष्ठा हुई थी।
आचार्य श्रुत सागर महाराज ने कहा कि आज भगवान विहार करते हुए अपने समोशरण में विराजमान हुए हैं। आज भव्य वेदी प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न हो गया। उन्होंने कहा जब तीर्थंकर को केवल ज्ञान प्राप्त होता है तो वह विहार करते हैं और समोशरण में जाकर विराजमान होते हैं और जब वह बिहार करते हैं तो कुबेर स्वर्ण कमल प्रभु की राह में बिछाता है। परंतु भगवान वीतरागी हैं। उनके लिए स्वर्ण पुष्पों का कोई महत्व नहीं है। इसलिए भगवान उस कमल से भी चार उंगल ऊपर चलते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान वीतरागी हैं परंतु आज का मनुष्य वित्त रागी है। आज हम हर व्यक्ति वित्त के पीछे भाग रहा है। उनको भगवान से प्रेरणा लेनी चाहिए। उनको वीतरागी बनना चाहिए। पुनीत जैन ने तीन दिवसीय कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया।
विज्ञापन
इस अवसर पर सुरेंद्र जैन, सुखमाल जैन, सुनील जैन, राजेश जैन दिनेश जैन, संजीव जैन, श्री दिगंबर जैन पंचायत के प्रधान कुलदीप जैन, उप प्रधान सुरेश जैन, सचिव मनोज जैन, कोषाध्यक्ष सुशील जैन, प्रबंधक मुकेश जैन, एडवोकेट मेहुल जैन, वीरज जैन व दीपक जैन मौजूद रहे।
विज्ञापन
श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में महोत्सव के अंतर्गत सोमवार को प्रात: काल में अभिषेक और शांतिधारा की रस्म की गई। इसके साथ नव वेदी पर पारसनाथ भगवान को विराजमान किया गया। आर्किटेक्ट रीना जैन की देखरेख में उनकी टीम ने मशीन की मदद से मूर्ति को विराजमान किया। इसको लेकर लोगों में उत्सुकता भी बनी रही। पूजन विधान कार्यक्रम प्रतिष्ठाचार्य जय निशांत भैया टीकमगढ़ वालों ने संपन्न कराया। आचार्य श्री 108 श्रुतसागर महाराज व साध्वी मां कौशल के पावन सानिध्य में वेदी प्रतिष्ठा की मांगलिक क्रियाएं संपादित की। मुकेश जैन व मनोज जैन ने बोलियों के माध्यम से सौभाग्यवती महिलाओं को वेदी शुद्धि, जाप, कलश, अखंड जोत, अष्ट प्रतिहार्य, अष्ट मंगल, जिनवाणी व चंवर स्थापना करने का सौभाग्य प्राप्त कराया। साध्वी मां कौशल ने अपने प्रवचन में कहा कि मेरा सपना था कि मैं जहां जन्मी और जहां पर मैंने अपनी शिक्षा और धर्म शिक्षा को प्राप्त किया है, उस पावन मंदिर का जीर्णोद्धार कराऊं। यह प्रेरणा दो वर्ष पहले महावीर जयंती के अवसर पर भगवान पारसनाथ से ही प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि यह मंदिर जिनेंद्र वर्णी की प्रेरणा से बना था और उन्हीं के सानिध्य में इस मंदिर की 1961 में भव्य प्रतिष्ठा हुई थी।
विज्ञापन
आचार्य श्रुत सागर महाराज ने कहा कि आज भगवान विहार करते हुए अपने समोशरण में विराजमान हुए हैं। आज भव्य वेदी प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न हो गया। उन्होंने कहा जब तीर्थंकर को केवल ज्ञान प्राप्त होता है तो वह विहार करते हैं और समोशरण में जाकर विराजमान होते हैं और जब वह बिहार करते हैं तो कुबेर स्वर्ण कमल प्रभु की राह में बिछाता है। परंतु भगवान वीतरागी हैं। उनके लिए स्वर्ण पुष्पों का कोई महत्व नहीं है। इसलिए भगवान उस कमल से भी चार उंगल ऊपर चलते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान वीतरागी हैं परंतु आज का मनुष्य वित्त रागी है। आज हम हर व्यक्ति वित्त के पीछे भाग रहा है। उनको भगवान से प्रेरणा लेनी चाहिए। उनको वीतरागी बनना चाहिए। पुनीत जैन ने तीन दिवसीय कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया।
विज्ञापन
इस अवसर पर सुरेंद्र जैन, सुखमाल जैन, सुनील जैन, राजेश जैन दिनेश जैन, संजीव जैन, श्री दिगंबर जैन पंचायत के प्रधान कुलदीप जैन, उप प्रधान सुरेश जैन, सचिव मनोज जैन, कोषाध्यक्ष सुशील जैन, प्रबंधक मुकेश जैन, एडवोकेट मेहुल जैन, वीरज जैन व दीपक जैन मौजूद रहे।