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Panipat News: एक सफाई कर्मी माह में 600 मीटर नाले की करेगा सफाई
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पानीपत। प्रदेश भर के नगर निकायों की सफाई के लिए शहरी स्थानीय निकाय में निदेशक स्तर पर एक आरएफपी यानी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल तैयार किया जा रहा है। यानी सफाई के नए ठेकों के लिए नई शर्त व नियम बनाए जा रहे हैं। इनके आधार पर प्रदेश भर के नगर निगम, पालिका और परिषदों में सफाई के ठेके दिए जाएंगे। इसी आधार पर शहर में सफाई हो सकेगी। प्रावधान के अनुसार एक सफाई कर्मचारी एक माह में 600 मीटर नाले की सफाई करेगा। वहीं, कूड़ा उठाने वाले 100 कर्मचारियों को एक ट्रैक्टर ट्राली दी जाएगी।
शहर में जहां डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन हो रहा है वह रोड की सफाई की जरूरत ही नहीं है। घरों से निकलने वाले कूड़े के ढेरों को डोर टू डोर कूड़ा उठाने वाले गाड़ियां ही उठाएंगी। इसके अलावा जीटी रोड या अन्य मुख्य रास्तों पर रोड स्वीपिंग के काम की आवश्यकता ही नहीं है। चूंकि यहां पहले ही रोड पर हैवी ट्रैफिक होने की वजह से कूड़ा डलता ही नहीं है। माना जा रहा है कि नवंबर के पहले सप्ताह में आरएफपी बनकर तैयार हो जाएगी। जिसे प्रदेश भर के निकायों पर लागू किया जाएगा।
इसके अलावा शहर को चार भागों में बांट कर अलग से टेंडर लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। हालांकि अभी तक ये नियम व शर्ताें के लिए अधिकारियों का विचार विमर्श चल रहा है। इन्हें पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सका है। इनकी केवल ड्रॉफ्ट सूची तैयार की गई है उसी पर मंथन चल रहा है। इसी वजह से शहर की सफाई का टेंडर भी पिछले छह माह से अधूरा पड़ा है। जबकि इसे लेकर शहर के नेताओं से लेकर मंत्री और अधिकारी तक निगम अधिकारियों को फटकार लगा चुके हैं।
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गौरतलब है कि शहर को चार जोन में बांट कर निगम ने सफाई का ठेका दिया था जो मई 2024 में पूरा हो चुका है। इसके बाद निगम की ओर से नए ठेके के लिए निकाय से अनुमति मांगी गई थी। चूंकि प्रतिमाह सफाई के ठेके का भुगतान तीन से चार करोड़ रुपये के बीच होता है इसलिए इसकी अनुमति निकाय अधिकारियों से लेना आवश्यक होती है। पहले तो इस नए ठेके की अनुमति नहीं मिली। बाद में लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई। अब आचार संहिता के बाद निकाय अधिकारी नए सिरे से टेंडर की शर्तें बनवा रहे हैं। इनके आधार पर ही नया ठेका दिया जाएगा।
नया ठेका न होने की वजह से अधिकारी बार बार पुराने टेंडर की मियाद को बढ़ा रहे हैं। जिसकी वजह से शहर में कूड़े के ढेर लगना शुरू हो चुके हैं। इसे लेकर मंत्री महिपाल ढांडा से लेकर शहरी विधायक प्रमोद विज भी निगम अधिकारियों को फटकार लगा चुके हैं। डीसी भी इस मामले को लेकर सख्त हैं कि निगम ने पहले टेंडर की योजना को तैयार क्यों नहीं किया।
वर्जन:
सफाई के ठेके के लिए नए नियम व शर्ताें के अनुसार आरएफपी तैयार की जा रही है। इनके अनुसार नया ठेका दिया जाएगा। इसमें कौन सी शर्त लगाई या हटाई जाएगी इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा सकता। ये निकाय स्तर के अधिकारियों की बात है।
जितेंद्र नरवाल, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर निगम।
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शहर में जहां डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन हो रहा है वह रोड की सफाई की जरूरत ही नहीं है। घरों से निकलने वाले कूड़े के ढेरों को डोर टू डोर कूड़ा उठाने वाले गाड़ियां ही उठाएंगी। इसके अलावा जीटी रोड या अन्य मुख्य रास्तों पर रोड स्वीपिंग के काम की आवश्यकता ही नहीं है। चूंकि यहां पहले ही रोड पर हैवी ट्रैफिक होने की वजह से कूड़ा डलता ही नहीं है। माना जा रहा है कि नवंबर के पहले सप्ताह में आरएफपी बनकर तैयार हो जाएगी। जिसे प्रदेश भर के निकायों पर लागू किया जाएगा।
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इसके अलावा शहर को चार भागों में बांट कर अलग से टेंडर लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। हालांकि अभी तक ये नियम व शर्ताें के लिए अधिकारियों का विचार विमर्श चल रहा है। इन्हें पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सका है। इनकी केवल ड्रॉफ्ट सूची तैयार की गई है उसी पर मंथन चल रहा है। इसी वजह से शहर की सफाई का टेंडर भी पिछले छह माह से अधूरा पड़ा है। जबकि इसे लेकर शहर के नेताओं से लेकर मंत्री और अधिकारी तक निगम अधिकारियों को फटकार लगा चुके हैं।
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गौरतलब है कि शहर को चार जोन में बांट कर निगम ने सफाई का ठेका दिया था जो मई 2024 में पूरा हो चुका है। इसके बाद निगम की ओर से नए ठेके के लिए निकाय से अनुमति मांगी गई थी। चूंकि प्रतिमाह सफाई के ठेके का भुगतान तीन से चार करोड़ रुपये के बीच होता है इसलिए इसकी अनुमति निकाय अधिकारियों से लेना आवश्यक होती है। पहले तो इस नए ठेके की अनुमति नहीं मिली। बाद में लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई। अब आचार संहिता के बाद निकाय अधिकारी नए सिरे से टेंडर की शर्तें बनवा रहे हैं। इनके आधार पर ही नया ठेका दिया जाएगा।
नया ठेका न होने की वजह से अधिकारी बार बार पुराने टेंडर की मियाद को बढ़ा रहे हैं। जिसकी वजह से शहर में कूड़े के ढेर लगना शुरू हो चुके हैं। इसे लेकर मंत्री महिपाल ढांडा से लेकर शहरी विधायक प्रमोद विज भी निगम अधिकारियों को फटकार लगा चुके हैं। डीसी भी इस मामले को लेकर सख्त हैं कि निगम ने पहले टेंडर की योजना को तैयार क्यों नहीं किया।
वर्जन:
सफाई के ठेके के लिए नए नियम व शर्ताें के अनुसार आरएफपी तैयार की जा रही है। इनके अनुसार नया ठेका दिया जाएगा। इसमें कौन सी शर्त लगाई या हटाई जाएगी इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा सकता। ये निकाय स्तर के अधिकारियों की बात है।
जितेंद्र नरवाल, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर निगम।