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ड्रेन नंबर-1 पर कब्जे का मामला गरमाया: कब्जाधारियों ने पेश किए रजिस्ट्री और इंतकाल के दावे, नोटिसों को बताया गलत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2026 02:56 AM IST
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Occupants submitted claims based on sale deeds and mutation records, terming the notices incorrect.
पानीपत। ड्रेन नंबर-1 को अतिक्रमण मुक्त करने की नगर निगम की कार्रवाई पर मामला गर्मा गया है। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन ऐतिहासिक देवी मंदिर परिसर में आयोजित जनता दरबार में कब्जाधारियों और निगम अधिकारियों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। नगर निगम जहां ड्रेन नंबर-1 की जमीन पर हुए निर्माण को अवैध मानकर 227 लोगों को ध्वस्तीकरण की नोटिस थमा चुका है, वहीं प्रभावित लोगों ने अपनी जमीनों की वैध रजिस्ट्री, जमाबंदी और इंतकाल के दस्तावेज पेश कर निगम की कार्रवाई को पूरी तरह गलत करार दिया है।
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जनता दरबार में नगर निगम और राजस्व विभाग के आला अधिकारी मौके पर दावे और आपत्तियों की सुनवाई के लिए मौजूद रहे। इस दौरान संयुक्त आयुक्त मनी त्यागी, जिला नगर योजनाकार (डीटीपी), नायब तहसीलदार वेद सैनी, कानूनगो और पटवारी की टीम ने लोगों के दस्तावेज की जांच। नोटिस पाने वाले 227 लोगों में से सात प्रभावितों ने शुक्रवार को अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत किया। दावों के आधार पर अब निगम की टीम संबंधित स्थलों का डिमार्केशन (पैमाइश) कर वास्तविक स्थिति का परीक्षण कर रही है।
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बाॅक्स

अतिक्रमण की सीमा तय, सोमवार-मंगलवार को अंतिम सुनवाई
दो दिनों की सुनवाई के दौरान जिन लोगों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इनमें से कई मामलों में मौके पर जाकर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि उनके द्वारा सरकारी भूमि पर कितनी सीमा तक अतिक्रमण किया गया है। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को अभी भी अपने दस्तावेजों के संबंध में कोई स्पष्टीकरण देना है, तो वह सोमवार और मंगलवार को नगर निगम कार्यालय में संयुक्त आयुक्त मनी त्यागी के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकता है। इसके तुरंत बाद इसी सप्ताह हरियाणा नगर निगम अधिनियम की धारा 408-ए (2) के तहत अवैध निर्माणों को गिराने के अंतिम आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
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पीड़ितों का दर्द : रजिस्ट्री है, बैंक लोन है, फिर निर्माण अवैध कैसे
केस-1
उजड़ जाएगा बुजुर्ग महिला का आशियाना
78 वर्षीय बुजुर्ग महिला राजरानी ने बताया कि उनके दिवंगत पति बिजली निगम में कार्यरत थे। करीब 15-16 साल पहले उन्होंने पूरी मेहनत की कमाई लगाकर ड्रेन के साथ मकान बनाया था, जिसकी उनके पास बाकायदा रजिस्ट्री और इंतकाल है। कोरोना काल में उनके बेटे की मौत हो गई थी। इसके बाद वे अब अपने तीन पोते-पोतियों के साथ यहां रह रही हैं। निगम का नोटिस मिलने के बाद से उनका पूरा परिवार बेघर होने के डर से सहमा हुआ है।
केस-2
सारे सरकारी दस्तावेज मौजूद, फिर भी कार्रवाई
स्थानीय निवासी राजेश शर्मा ने बताया कि उनके पास जमीन की रजिस्ट्री, जमाबंदी और इंतकाल जैसे सभी पुख्ता कानूनी दस्तावेज हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर ही लोगों को बैंकों से होम लोन तक मिले हुए हैं। यदि निर्माण अवैध था, तो बैंक और सरकारी विभागों ने इसकी अनुमति क्यों दी? पिछले 15 सालों से सिर्फ नोटिस-नोटिस का खेल खेला जा रहा है। इससे आम जनता मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रही है।



केस-3
दो महीने में बदल गया कब्जे का पैमाना
दीपू ने बताया कि दो महीने पहले सिंचाई विभाग से नोटिस मिला था। इसमें केवल दो फीट तक का कब्जा होना बताया गया था। अब नगर निगम की नई पैमाइश में उसी जगह पर 10 से 15 फीट तक का कब्जा दर्शाया जा रहा है।
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