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Panipat News: गृहस्थ जीवन को संतुलित बनाने का दिया संदेश
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मतलौडा। ब्रह्मकुमारीज के थिराना गांव स्थित ज्ञान मानसरोवर रिट्रीट सेंटर दो दिवसीय युगलों की योग भट्टी कार्यक्रम के दूसरे एवं अंतिम दिन गृहस्थ जीवन को संतुलित बनाने का संदेश दिया। इसके साथ इस विशेष कार्यक्रम ने युगलों को योग और आध्यात्मिक साधना के महत्व को गहराई से समझाया गया।
दो दिवसीय कार्यक्रम के समापन सत्र के मुख्य वक्ता राजयोगी बीके भारत भूषण रहे। उन्होंने परमात्मा से जुड़ने के माध्यम से गृहस्थ जीवन को संतुलित और शांतिमय बनाने के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि योग आत्मा को शुद्ध कर जीवन को परम आनंदमय बनाता है। उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन में व्यक्ति के पास कई जिम्मेदारी आ जाती हैं। ऐसे में वह कई अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में लग जाता है। इस स्थिति में परमात्मा का ध्यान करना भी छोड़ देता है। इन सबके चलते व्यक्ति परेशानियों में फंसता चला जाता है। हमें हर समय परमात्मा का नाम स्मरण करना चाहिए।
राजयोगिनी सरला बहन ने योग साधना के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से ही समाज और परिवार में शांति और स्थायित्व लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति के शरीर और मन को परमात्मा के साथ जोड़ता है। वे हर रोज योग करेंगे तो शरीर और मन को मजबूत बना पाएंगे। एक मजबूत मन का व्यक्ति या स्त्री किसी भी बड़ी से बड़ी परेशानी का सामना खुद पार पा सकते हैं।
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ऐसे में हमको हमेशा याद पर ध्यान देना चाहिए। बीके सुरेंद्र ने कुशलतापूर्वक मंच संचालन किया। उन्होंने वक्ताओं और साधकों के अनुभवों को संप्रेषित किया। साधकों ने दो दिवसीय कार्यशाला की सराहना की। आरती और अंजली ने बताया कि दो दिवसीय कार्यक्रम में उनको योग के माध्यम मन को शांत रखने और परमात्मा का ध्यान लगाने के बारे में पता चला।
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दो दिवसीय कार्यक्रम के समापन सत्र के मुख्य वक्ता राजयोगी बीके भारत भूषण रहे। उन्होंने परमात्मा से जुड़ने के माध्यम से गृहस्थ जीवन को संतुलित और शांतिमय बनाने के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि योग आत्मा को शुद्ध कर जीवन को परम आनंदमय बनाता है। उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन में व्यक्ति के पास कई जिम्मेदारी आ जाती हैं। ऐसे में वह कई अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में लग जाता है। इस स्थिति में परमात्मा का ध्यान करना भी छोड़ देता है। इन सबके चलते व्यक्ति परेशानियों में फंसता चला जाता है। हमें हर समय परमात्मा का नाम स्मरण करना चाहिए।
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राजयोगिनी सरला बहन ने योग साधना के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से ही समाज और परिवार में शांति और स्थायित्व लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति के शरीर और मन को परमात्मा के साथ जोड़ता है। वे हर रोज योग करेंगे तो शरीर और मन को मजबूत बना पाएंगे। एक मजबूत मन का व्यक्ति या स्त्री किसी भी बड़ी से बड़ी परेशानी का सामना खुद पार पा सकते हैं।
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ऐसे में हमको हमेशा याद पर ध्यान देना चाहिए। बीके सुरेंद्र ने कुशलतापूर्वक मंच संचालन किया। उन्होंने वक्ताओं और साधकों के अनुभवों को संप्रेषित किया। साधकों ने दो दिवसीय कार्यशाला की सराहना की। आरती और अंजली ने बताया कि दो दिवसीय कार्यक्रम में उनको योग के माध्यम मन को शांत रखने और परमात्मा का ध्यान लगाने के बारे में पता चला।